Hera Panchami Date: 16 जुलाई से शुरू होगी महाप्रभु जगन्नाथ की रथ यात्रा, जानिए किस दिन पड़ेगी ‘हेरा पंचमी’
क्यों बदला हेरा पंचमी का शेड्यूल? जानिए द्रिक पंचांग और पुरी मंदिर प्रशासन की अलग-अलग तिथियों का सच
Hera Panchami Date: सनातन धर्म में महाप्रभु जगन्नाथ की रथ यात्रा का स्थान बेहद खास है। हर साल ओडिशा के पुरी में आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया से शुरू होने वाला यह 9 दिवसीय उत्सव अपने आप में कई अनूठी परंपराओं को समेटे हुए है।
इसी यात्रा के दौरान आने वाली ‘हेरा पंचमी’ को लेकर इस बार श्रद्धालुओं के बीच तारीखों का एक दिलचस्प पेंच फंस गया है। अगर आप भी इस उलझन में हैं कि साल 2026 में हेरा पंचमी कब है, तो आपको ज्योतिषीय गणना और मंदिर की परंपराओं के इस अंतर को समझना होगा।
क्या कहती है पंचांग की गणना और मंदिर की वेबसाइट?
द्रिक पंचांग के गणित को देखें तो इस साल आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि 15 जुलाई 2026 की सुबह 11:50 बजे से शुरू होकर अगले दिन 16 जुलाई को सुबह 08:52 बजे तक रहेगी। उदयातिथि के नियम के अनुसार, जगन्नाथ रथ यात्रा का आगाज 16 जुलाई 2026, गुरुवार से हो रहा है। इसके ठीक ९ दिन बाद यानी 24 जुलाई 2026, शुक्रवार को बहुड़ा यात्रा (उल्टी रथ यात्रा) के साथ इसका समापन होगा।
अब बात करते हैं हेरा पंचमी की। द्रिक पंचांग के अनुसार हेरा पंचमी की तिथि 18 जुलाई 2026, शनिवार को निर्धारित की गई है। इसके उलट, जब आप पुरी के श्री जगन्नाथ मंदिर की ऑफिशियल वेबसाइट खंगालते हैं, तो वहां हेरा पंचमी की तारीख 20 जुलाई 2026 (सोमवार) दिखाई देती है। मंदिर प्रशासन के सेवायतों और स्थानीय परंपराओं के अनुसार तिथियों के घटने-बढ़ने और मंदिर के विशेष अनुष्ठानों के चलते अक्सर इस तरह का अंतर देखने को मिलता है, जिसे मंदिर के पंचांग के अनुसार ही अंतिम माना जाता है।
क्यों मनाते हैं हेरा पंचमी? जब भगवान जगन्नाथ से रूठ गईं माता लक्ष्मी
हेरा पंचमी के पीछे की पौराणिक कथा बेहद जीवंत और मानवीय भावनाओं से ओतप्रोत है। मान्यता है कि जब भगवान जगन्नाथ अपने बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ अचानक अपनी मौसी के घर यानी गुंडिचा मंदिर के लिए निकलते हैं, तो वे अपनी अर्धांगिनी माता लक्ष्मी को साथ नहीं ले जाते और न ही उन्हें बताकर जाते हैं।
पति के इस तरह बिना बताए चले जाने से माता लक्ष्मी नाराज हो जाती हैं। वे कुछ दिन तो प्रतीक्षा करती हैं, लेकिन रथ यात्रा के पांचवें दिन उनके सब्र का बांध टूट जाता है। वे भगवान जगन्नाथ को खोजने (ओड़िया में ‘हेरा’ का अर्थ देखना या खोजना होता है) और अपना गुस्सा जाहिर करने खुद गुंडिचा मंदिर पहुंच जाती हैं। इसी पावन और कौतुकभरी लीला को जीवंत करने के लिए पुरी में हर साल हेरा पंचमी का पर्व बेहद धूमधाम से मनाया जाता है, जहां माता लक्ष्मी के प्रतीक स्वरूप को गुंडिचा मंदिर ले जाया जाता है।
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