July 18, 2026

Bhutta Recipe: भुट्टा भूनकर खाना बेहतर है या उबालकर? जानिए क्या कहती है कॉर्नल यूनिवर्सिटी की रिसर्च

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Bhutta Recipe: भुट्टा भूनकर खाना बेहतर है या उबालकर? जानिए क्या कहती है कॉर्नल यूनिवर्सिटी की रिसर्च

भुट्टा भूनकर खाना बेहतर है या उबालकर

Bhutta Recipe: भारतीय मानसून और सड़क किनारे कोयले की अंगीठी पर सिकते भुट्टे का रिश्ता सदियों पुराना है। जैसे ही आसमान में काली घटाएं छाती हैं, वैसे ही नींबू-चाट मसाले से सराबोर गर्म भुट्टे की तलब हर किसी को होने लगती है। लेकिन खान-पान के शौकीनों के बीच अक्सर यह बहस छिड़ती है कि भुट्टे का असली लुत्फ भुना हुआ खाने में है या फिर इसे उबालकर खाने में? इस पारंपरिक स्वाद के पीछे छिपे फूड साइंस के व्यावहारिक पहलुओं और न्यूट्रिशन एक्सपर्ट्स की राय को खंगालें, तो कुछ बेहद दिलचस्प और चौंकाने वाले तथ्य सामने आते हैं, जो हमारी सेहत से सीधे जुड़े हैं।

अमेरिकी कृषि विभाग की मुहर: सिर्फ टाइमपास नहीं, पोषक तत्वों का पावरहाउस

अक्सर लोग भुट्टे को केवल एक मौसमी स्नैक या टाइमपास के रूप में देखते हैं, जबकि अमेरिकी कृषि विभाग (USDA FoodData Central) के आंकड़े इसे एक मुकम्मल न्यूट्रिशनल डाइट बताते हैं। भुट्टा मूल रूप से फाइबर, कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट, विटामिन B कॉम्प्लेक्स, मैग्नीशियम और फॉस्फोरस का बेहतरीन जरिया है। इसमें प्रचुर मात्रा में पाए जाने वाले ‘ल्यूटिन’ और ‘जिएक्सैंथिन’ जैसे तत्व हमारी आंखों की रोशनी को बुढ़ापे तक सलामत रखने में मददगार होते हैं, वहीं इसका रफेज पाचन क्रिया को दुरुस्त रखता है।

कॉर्नल यूनिवर्सिटी की रिसर्च: गर्म करने पर घटता नहीं, बल्कि बढ़ जाता है भुट्टे का गुण

आमतौर पर यह माना जाता है कि हरी सब्जियों या अनाजों को जब पकाया या उबाला जाता है, तो आंच के संपर्क में आने से उनके प्राकृतिक विटामिन्स और पोषक तत्व दम तोड़ देते हैं। लेकिन मक्के (कॉर्न) के मामले में विज्ञान का नियम उलट जाता है। कॉर्नल यूनिवर्सिटी द्वारा की गई एक महत्वपूर्ण रिसर्च में यह बात साबित हुई है कि जब भुट्टे को गर्म किया जाता है, तो उसमें मौजूद ‘फेरुलिक एसिड’ नामक एंटीऑक्सीडेंट की सक्रियता और मात्रा काफी बढ़ जाती है। यह एसिड शरीर में फ्री रेडिकल्स को खत्म कर कैंसर और हृदय संबंधी गंभीर बीमारियों के जोखिम को कम करता है। यानी भुट्टे को कच्चा चबाने के मुकाबले उसे पकाकर खाना वैज्ञानिक रूप से कहीं अधिक फायदेमंद है।

कोयले का स्मोकी फ्लेवर बनाम सेहत का रिस्क: नींबू-मसाले की केमिस्ट्री

सड़क किनारे मिलने वाले भुने हुए भुट्टे का स्मोकी फ्लेवर सबसे ज्यादा पसंद किया जाता है। मगर हार्वर्ड टी.एच. चान स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ की एक चेतावनी को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। रिपोर्ट के मुताबिक, अत्यधिक स्टार्च या कार्बोहाइड्रेट वाले भोजन को जब सीधे खुली आग पर बहुत ज्यादा जलाया जाता है, तो उसके काले पड़ चुके दानों में अवांछित रासायनिक बदलाव होने लगते हैं। इसलिए बेहतर यही है कि भुट्टे को केवल हल्का सुनहरा होने तक ही भुनवाएं।

वहीं, इस पर नींबू और काला नमक रगड़ने के पीछे भी एक मुकम्मल विज्ञान है। नींबू में मौजूद विटामिन C भुट्टे के प्लांट-बेस्ड आयरन और अन्य पोषक तत्वों को हमारे शरीर में अवशोषित (Absorb) होने की रफ्तार बढ़ा देता है। इसके अलावा, मानसून के दिनों में हवा में पनपने वाले बैक्टीरिया से निपटने के लिए नींबू का एसिडिक नेचर और काले नमक का मिश्रण गले के लिए एक एंटी-बैक्टीरियल ढाल की तरह काम करता है।

थियेटर के ‘बटर कॉर्न’ से दूरी भली, खाते समय बरतें ये सावधानियां

विशेषज्ञों के मुताबिक, मॉल्स या सिनेमाघरों में मिलने वाले डिब्बाबंद ‘बटर स्वीट कॉर्न’ से बचना चाहिए, क्योंकि उनमें सोडियम, प्रिजर्वेटिव्स और सैचुरेटेड फैट की मात्रा अत्यधिक होती है, जो वजन और कोलेस्ट्रॉल बढ़ाती है। इसके साथ ही, हाईवे या सड़क किनारे भुट्टा खाते समय हमेशा यह ध्यान रखें कि वह पहले से भूनकर न रखा गया हो, क्योंकि ठंडे हो चुके कॉर्न पर बैक्टीरिया बहुत तेजी से हमला करते हैं। हमेशा ताजा कटा हुआ नींबू ही इस्तेमाल करवाएं। निष्कर्ष के तौर पर कहें तो, अगर आप स्वाद और सेहत दोनों का मुकम्मल तालमेल चाहते हैं, तो नींबू-मसाले से लबरेज, बिना जलाया हुआ ‘हल्का भुना’ भुट्टा ही मानसून का असली और सेहतमंद मजा है।

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