Gurugram Water Dispute: गुरुग्राम में पानी के धंधे पर कब्जे की जंग, 5 स्कॉर्पियो के साथ 8 हुड़दंगी गिरफ्तार
रंगदारी के आरोप निकले झूठे, लेकिन पुलिस ने पार्षद और पानी कारोबारी के विवाद में 8 बदमाशों को दबोचा
Gurugram Water Dispute: साइबर सिटी गुरुग्राम के धड़कते कंक्रीट के जंगलों के बीच पानी का कारोबार कितना रसूखदार और खतरनाक हो चुका है, इसकी बानगी सेक्टर-103 में देखने को मिली। यहां पानी और मिट्टी की सप्लाई करने वाले कारोबारी मनीष दहिया ने आरोप लगाया कि वार्ड नंबर-7 के भाजपा समर्थित पार्षद दिनेश दहिया उनके फलते-फूलते धंधे पर कब्जा करना चाहते हैं।
मनीष का दावा था कि बुधवार को पार्षद के गुर्गे 10 से अधिक काली स्कॉर्पियो गाड़ियों के काफिले के साथ उनकी कंस्ट्रक्शन साइट पर धमकाते हुए पहुंचे। आरोप यह भी था कि जेल में बंद कुख्यात गैंगस्टर कौशल चौधरी के नाम का खौफ दिखाकर कारोबार में 50 फीसदी की हिस्सेदारी मांगी जा रही है। इस हुड़दंग का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था।
करोड़ों का खेल और ‘HWRA’ के नियमों की धज्जियां
दरअसल, इस पूरे फसाद की जड़ में गुरुग्राम नगर निगम द्वारा नई बोरिंग पर लगाई गई रोक और कंस्ट्रक्शन साइटों पर भूजल के इस्तेमाल की पाबंदी है।
नियमों के मुताबिक निर्माण कार्यों के लिए हरियाणा वॉटर रिसोर्सेज अथॉरिटी (HWRA) से मंजूरी लेना अनिवार्य है, जो इतनी आसानी से नहीं मिलती। इसी लंबी कागजी प्रक्रिया से बचने के लिए बड़ी-बड़ी रिहायशी सोसाइटियां और बिल्डर्स निजी सप्लायरों को करोड़ों रुपये के ठेके देते हैं। इसी अकूत कमाई वाले खेल पर वर्चस्व कायम करने के लिए यह पूरी जंग छिड़ी हुई है।
पार्षद का पलटवार: ‘तोता गैंग’ से हैं कारोबारी के तार
दूसरी तरफ, इन गंभीर आरोपों से घिरे पार्षद दिनेश दहिया ने खुद को बेकसूर बताते हुए मामले को पूरी तरह राजनीतिक और चुनावी रंजिश का रंग दिया है। दिनेश दहिया ने आरोप लगाया कि शिकायतकर्ता मनीष दहिया के तार खुद दूसरे गैंगस्टर सुनील उर्फ तोता से जुड़े हैं, जो दो महीने पहले ही जेल से बाहर आया है।
पार्षद के मुताबिक, पिछले चुनाव में गैंगस्टर तोता के भाई ने उनके खिलाफ पार्षद का चुनाव लड़ा था और करारी हार झेली थी। उसी हार की खुन्नस निकालने और उनकी राजनीतिक छवि को धूमिल करने के लिए यह पूरा ताना-बाना बुना गया है।
पुलिसिया तफ्तीश: रंगदारी की कहानी झूठी, लेकिन हुड़दंगियों पर चला हंटर
शुक्रवार को जब मामला तूल पकड़ने लगा, तो गुरुग्राम पुलिस के एसीपी ने जांच के बाद स्थिति स्पष्ट की। पुलिस टीमों ने जब घटनास्थल का मुआयना किया और तकनीकी साक्ष्य जुटाए, तो कारोबारी मनीष द्वारा लगाए गए रंगदारी, काम बंद कराने और जान से मारने की धमकी के आरोप पूरी तरह झूठे और निराधार पाए गए।
हालांकि, कानून-व्यवस्था को हाथ में लेने और सड़कों पर गाड़ियों का काफिला निकालकर शांति भंग करने के आरोप में पुलिस ने सख्त रुख अपनाया।
पुलिस ने बीएनएसएस (BNSS) की धारा 126/170 के तहत कार्रवाई करते हुए मौके से 8 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। पकड़े गए आरोपियों की पहचान नवीन उर्फ भोला, देवेंद्र, परवीन, अजय, योगेंद्र (सभी धनवापुर निवासी), अनिल (रोहतक), मोहित (चरखी दादरी) और सचेत उर्फ मोटा (करौला) के रूप में हुई है। पुलिस ने इनके पास से हुड़दंग में इस्तेमाल की गईं 5 स्कॉर्पियो गाड़ियां भी जब्त कर ली हैं और आगे की कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जा रही है।
