Punjab Weather: पंजाब में 20 से 22 जुलाई के बीच मूसलाधार बारिश की चेतावनी, जारी हुआ ऑरेंज अलर्ट
बठिंडा में पारा 41 डिग्री पार, पर आज से बदलेगा मौसम; जानिए अमृतसर-जालंधर में कब होगी झमाझम बारिश
Punjab Weather: पंजाब के लोगों को जल्द ही चिपचिपी गर्मी और पसीने छुड़ाने वाली उमस से छुटकारा मिलने वाला है। पिछले काफी समय से बादलों की बेरुखी के चलते राज्य का औसत अधिकतम तापमान सामान्य से करीब तीन डिग्री सेल्सियस ऊपर चल रहा था।
शनिवार को भी बठिंडा में पारा 41.1 डिग्री और अबोहर में 40.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जिससे लोग बेहाल रहे। हालांकि, भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने राहत का बुलेटिन जारी करते हुए कहा है कि रविवार यानी 19 जुलाई से हवाओं का रुख बदलेगा और मानसूनी बादल एक बार फिर सूबे में पूरी तरह सक्रिय हो जाएंगे।
जानिए 19 से 23 जुलाई तक कैसा रहेगा आपके शहर का हाल
मौसम केंद्र चंडीगढ़ के मुताबिक, रविवार से शुरू हो रहा यह सिस्टम अगले चार-पांच दिनों तक सूबे को तरबतर करेगा। तारीखवार अनुमान के तहत रविवार को गुरदासपुर, पठानकोट, होशियारपुर और रूपनगर में गरज-चमक के साथ बारिश का यलो अलर्ट है।
20 जुलाई को मानसून और मजबूत होगा, जिससे पठानकोट, नवांशहर, मोहाली, चंडीगढ़, फतेहगढ़ साहिब और पटियाला में भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। 21 और 22 जुलाई को भी अमृतसर, जालंधर और कपूरथला समेत माझा और दोआबा के बेल्ट में ऑरेंज अलर्ट का असर दिखेगा, जबकि 23 जुलाई से बारिश की तीव्रता में थोड़ी कमी आएगी।
जलभराव का खतरा, मौसम विभाग ने जारी की सख्त हिदायत
लगातार होने वाली इस संभावित बारिश को देखते हुए मौसम विभाग ने आम जनता और प्रशासन को अलर्ट रहने को कहा है। भारी बारिश के चलते निचले रिहायशी इलाकों में जलभराव, बरसाती नालों में उफान और सड़कों पर विजिबिलिटी (दृश्यता) कम होने से ट्रैफिक जाम की स्थिति बन सकती है।
विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे खराब मौसम के दौरान पेड़ों, खंभों या कमजोर छतों के नीचे शरण न लें और बिजली चमकने के दौरान सुरक्षित स्थानों पर रहें।
अन्नदाताओं के लिए विशेष गाइडलाइन, इन बातों का रखें ध्यान
कृषि विशेषज्ञों ने इस मानसूनी बारिश को देखते हुए पंजाब के किसानों के लिए जरूरी सलाह जारी की है। किसानों से कहा गया है कि वे खेतों में जल निकासी (वॉटर ड्रेनेज) की व्यवस्था पहले से दुरुस्त कर लें ताकि फसलों की जड़ें न गलें।
इसके साथ ही, कटी हुई फसलों को सुरक्षित गोदामों या तिरपाल से ढककर रखने और अगले तीन से चार दिनों तक खेतों में किसी भी तरह के कीटनाशक या खाद (उर्वरक) का छिड़काव न करने की हिदायत दी गई है, ताकि दवाइयां पानी में बहकर बर्बाद न हों।
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