July 15, 2026

Chandigarh News: पीजीआई बनेगा हाईटेक हेल्थकेयर हब, प्रधानमंत्री 17 को करेंगे तीन बड़ी स्वास्थ्य परियोजनाओं का उद्घाटन

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Chandigarh News: पीजीआई बनेगा हाईटेक हेल्थकेयर हब, प्रधानमंत्री 17 को करेंगे तीन बड़ी स्वास्थ्य परियोजनाओं का उद्घाटन

Chandigarh News: पीजीआई बनेगा हाईटेक हेल्थकेयर हब

Chandigarh News: उत्तर भारत की स्वास्थ्य सेवाओं के लिए 17 जुलाई का दिन ऐतिहासिक बनने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने चंडीगढ़ दौरे के दौरान पीजीआई में करीब 1200 करोड़ रूपये की स्वास्थ्य परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे। इस अवसर पर एडवांस्ड मदर एंड चाइल्ड सेंटर (एएमसीसी) और एडवांस्ड न्यूरोसाइंसेज सेंटर (एएनसी) राष्ट्र को समर्पित किए जाएंगे, जबकि प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन के तहत बनने वाले 150 बेड के क्रिटिकल केयर हॉस्पिटल ब्लॉक की आधारशिला भी रखी जाएगी। इन परियोजनाओं से पीजीआई की उपचार क्षमता, मेडिकल एजुकेशन और अनुसंधान को नई मजबूती मिलेगी।

प्रधानमंत्री के दौरे से चार दिन पहले सोमवार को पीजीआई निदेशक प्रो. विवेक लाल ने प्रैस वार्ता के दौरान इन परियोजनाओं की जानकारी देते हुए कहा कि यह संस्थान की विकास यात्रा का एक निर्णायक पड़ाव है। उन्होंने कहा कि यह केवल नई इमारतों का उद्घाटन नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों तक अत्याधुनिक, सुलभ और किफायती स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने की दिशा में बड़ा कदम है। उनका कहना था कि पीजीआई का मूल मंत्र हमेशा “रोगी सेवा, रोगी सेवा और केवल रोगी सेवा” रहा है और नई सुविधाएं इसी सोच को आगे बढ़ाएंगी।

जच्चा-बच्चा से लेकर न्यूरो मरीजों तक, एक ही छत के नीचे अत्याधुनिक इलाज

करीब 505 करोड़ रुपये की लागत से तैयार 300 बेड वाले एडवांस्ड मदर एंड चाइल्ड सेंटर में हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी, नवजात शिशुओं और बच्चों के इलाज की आधुनिक सुविधाएं एक ही परिसर में उपलब्ध होंगी। अत्याधुनिक एनआईसीयू, मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर और मातृ-शिशु स्वास्थ्य सेवाओं से लैस यह केंद्र हर साल 6,000 से अधिक हाई-रिस्क डिलीवरी संभालने में सक्षम होगा। इससे अब मरीजों और उनके परिजनों को अलग-अलग विभागों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।

वहीं, 300 बेड वाले एडवांस्ड न्यूरोसाइंसेज सेंटर में न्यूरोलॉजी, न्यूरोसर्जरी, न्यूरो एनेस्थीसिया, न्यूरो रेडियोलॉजी, न्यूरो क्रिटिकल केयर और पुनर्वास सेवाएं एक ही छत के नीचे उपलब्ध होंगी। 61 आईसीयू बेड, अत्याधुनिक मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर और आधुनिक डायग्नोस्टिक सुविधाओं से लैस यह केंद्र स्ट्रोक, ब्रेन ट्यूमर, मिर्गी और रीढ़ की हड्डी से जुड़ी गंभीर बीमारियों के इलाज में नई दिशा देगा। निदेशक के अनुसार इससे इलाज में देरी कम होगी और मरीजों के बेहतर स्वास्थ्य परिणाम सामने आएंगे।

150 बेड के क्रिटिकल केयर हॉस्पिटल ब्लॉक की रखी जाएगी आधारशिला

प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन के तहत 244 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले 150 बेड के क्रिटिकल केयर हॉस्पिटल ब्लॉक की आधारशिला भी रखेंगे। कोविड-19 महामारी के अनुभवों को ध्यान में रखकर तैयार की जा रही यह सुविधा भविष्य में किसी भी आपात स्वास्थ्य संकट से निपटने की क्षमता को मजबूत करेगी। प्रो. विवेक लाल ने बताया कि इन्फोसिस फाउंडेशन ने अत्याधुनिक चिकित्सा उपकरणों के लिए 147 करोड़ रुपये का सहयोग दिया है। उन्होंने कहा कि आयुष्मान भारत योजना और पीजीआई की अमृत फार्मेसी के माध्यम से कई महंगी दवाएं पश्चिमी देशों की तुलना में बेहद कम कीमत पर मरीजों को उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिससे गरीब मरीजों को बड़ी राहत मिली है।

12 हजार लोगों के लिए जर्मन हैंगर, हाई अलर्ट पर सुरक्षा एजेंसियां

प्रधानमंत्री के कार्यक्रम को लेकर पीजीआई और चंडीगढ़ प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। कार्यक्रम स्थल पर करीब 12 हजार लोगों की क्षमता वाला विशाल वाटरप्रूफ जर्मन हैंगर बनाया जा रहा है। इसके लिए इंजीनियरिंग विभाग ने 2.02 करोड़ रुपये का टेंडर जारी किया है। परिसर में व्यापक स्तर पर सजावट, मंच निर्माण और अन्य व्यवस्थाएं की जा रही हैं। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चंडीगढ़ सचिवालय में लगातार उच्चस्तरीय बैठकें हो रही हैं। पूरे पीजीआई परिसर में अतिरिक्त सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहे हैं तथा प्रधानमंत्री के काफिले के लिए अलग वीआईपी रूट तैयार किया जा रहा है।

कार्यक्रम में शामिल होने वाले 120 डॉक्टरों और 20 विशिष्ट अतिथियों के लिए विशेष वीआईपी लाउंज बनाया जाएगा, जबकि आमंत्रित अतिथियों के लिए 1,500 विशेष कुर्सियों की व्यवस्था की गई है। पीजीआई प्रशासन का मानना है कि इन परियोजनाओं के शुरू होने से न केवल उत्तर भारत के लाखों मरीजों को बेहतर और समय पर इलाज मिलेगा, बल्कि पीजीआई चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान और सुपर स्पेशियलिटी स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में भी नई ऊंचाइयों को छुएगा। प्रधानमंत्री का यह दौरा संस्थान के इतिहास में स्वास्थ्य अवसंरचना के सबसे बड़े विस्तार के रूप में दर्ज होने जा रहा है।

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