July 6, 2026

Haryana News: हरियाणा के बीपीएल परिवारों को झटका, इस बार सरकारी डिपो पर नहीं मिलेगा सरसों का तेल

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Haryana News: हरियाणा के बीपीएल परिवारों को झटका, इस बार सरकारी डिपो पर नहीं मिलेगा सरसों का तेल

किसानों ने प्राइवेट व्यापारियों को बेची फसल, खाली रह गए सरकारी गोदाम, राशन वितरण प्रभावित

Haryana News: हरियाणा के लाखों बीपीएल (गरीबी रेखा से नीचे) राशन कार्ड धारकों के लिए एक मायूस करने वाली खबर है। इस बार सरकारी राशन डिपो पर मिलने वाले जरूरी सामानों की सूची से सरसों का तेल नदारद रहेगा।

आम तौर पर गरीब परिवारों को बेहद कम और रियायती दरों पर मिलने वाला यह तेल इस बार उनके रसोई घर तक नहीं पहुंच पाएगा। इस संकट की सबसे बड़ी और मुख्य वजह इस साल मंडियों में सरसों की सरकारी खरीद का उम्मीद से बेहद कम होना बताया जा रहा है। सरकारी गोदामों में सरसों का पर्याप्त स्टॉक न होने की वजह से खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के सामने राशन वितरण व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने की एक बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।

बाजार के ‘अच्छे दामों’ ने बिगाड़ा सरकारी खरीद का गणित

दरअसल, इस सीजन में कृषि मंडियों के भीतर और बाहर सरसों के खेल ने एक नया रुख ले लिया था। बाजार में सरसों के दाम न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के मुकाबले काफी बेहतर और ऊंचे चल रहे थे। ऐसे में मुनाफा कमाने और अपनी गाढ़ी कमाई का सही मूल्य पाने के लिए हरियाणा के किसानों ने सरकारी एजेंसियों के चक्कर काटने के बजाय अपनी फसल को सीधे निजी खरीदारों और बड़े व्यापारियों को बेचना ज्यादा फायदेमंद समझा।

किसानों के इस व्यावहारिक कदम का सीधा असर सरकारी खरीद पर पड़ा और सरकार की झोली खाली रह गई। पर्याप्त मात्रा में सरसों का बफर स्टॉक न जुटने का खामियाजा अब सीधे तौर पर राशन कार्ड धारकों को भुगतना पड़ रहा है।

तेल नहीं तो नकद सही, ‘डीबीटी’ के फॉर्मूले पर मंथन जारी

सरसों के तेल की इस भारी किल्लत को देखते हुए अब प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में वैकल्पिक रास्तों की तलाश तेज हो गई है। सचिवालय के उच्च पदस्थ सूत्रों की मानें तो सरकार गरीब परिवारों को इस कमी से उबारने के लिए डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) यानी सीधे बैंक खातों में नकद सहायता राशि भेजने की तजवीज पर काम कर रही है।

इस योजना के तहत तेल की कीमत के बराबर की राशि सीधे लाभार्थियों के जनधन या आधार लिंक खातों में ट्रांसफर कर दी जाएगी, ताकि वे खुले बाजार से अपनी जरूरत का तेल खरीद सकें। हालांकि, इस नकद सहायता राशि का पैमाना क्या होगा और यह कब से खातों में आएगी, इस पर मुख्यमंत्री कार्यालय और वित्त विभाग की ओर से कोई आधिकारिक मुहर नहीं लगी है।

अंतिम फैसले पर टिकी नजरें, तब तक बनी रहेगी अनिश्चितता

जब तक चंडीगढ़ मुख्यालय से इस बाबत कोई स्पष्ट और लिखित गाइडलाइन जारी नहीं हो जाती, तब तक डिपो धारकों और कार्ड धारकों के बीच असमंजस की स्थिति बनी रहने वाली है। जमीनी स्तर पर राशन डिपो संचालकों का कहना है कि उपभोक्ता हर महीने तेल की मांग करते हैं और उनके पास ऊपर से सप्लाई न होने का कोई ठोस लिखित जवाब नहीं होता।

अब हर किसी की निगाहें सरकार के अंतिम फैसले और आधिकारिक घोषणा पर टिकी हैं। देखना होगा कि सरकार तेल के बदले खातों में सीधे नकदी डालने का फैसला कब लेती है या फिर इन गरीब परिवारों को राहत देने के लिए किसी अन्य अनाज या खाद्य पदार्थ की व्यवस्था की जाती है।

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