Haryana Stray Dog Sterilization Drive: हरियाणा में कुत्तों के आतंक पर फुलस्टॉप, 30 सितंबर तक 58 हजार आवारा कुत्तों की होगी नसबंदीHaryana Stray Dog Sterilization Drive: हरियाणा में कुत्तों के आतंक पर फुलस्टॉप, 30 सितंबर तक 58 हजार आवारा कुत्तों की होगी नसबंदी

Haryana Stray Dog Sterilization Drive: कलायत। हरियाणा के शहरों से लेकर गांवों तक की गलियों में अकेले निकलने वाले बच्चों, बुजुर्गों और बाइक सवारों को अब आवारा कुत्तों के आतंक से नहीं डरना होगा। प्रदेश में आए दिन मासूमों को श्वानों द्वारा नोच डालने जैसी दर्दनाक और विचलित करने वाली घटनाओं पर संज्ञान लेते हुए सरकार ने इस समस्या की जड़ पर प्रहार करने की तैयारी कर ली है। केंद्र सरकार की वित्तीय मदद से हरियाणा में एक वृहद नसबंदी और टीकाकरण अभियान की रूपरेखा तैयार की गई है, जिसे ‘सर्वोच्च प्राथमिकता’ वाले प्रोजेक्ट्स में शामिल किया गया है।

पशुपालन एवं डेयरी विभाग हरियाणा के महानिदेशक कार्यालय की ओर से जारी एक आधिकारिक पत्र के मुताबिक, इस अभियान को अमलीजामा पहनाने के लिए शहरी स्थानीय निकाय, पंचायत विभाग और पशुपालन विभाग को एक साथ मैदान में उतारा गया है।

3000 करोड़ का है देशव्यापी बजट, स्कोरिंग तय करेगी हरियाणा का हिस्सा

दरअसल, यह पूरा अभियान केंद्र सरकार की ‘स्पेशल असिस्टेंस टू स्टेट्स फॉर कैपिटल इन्वेस्टमेंट 2026-27’ योजना से जुड़ा हुआ है। इसके तहत केंद्र ने देश भर के लिए 3000 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि आरक्षित की है। हालांकि, यह फंड राज्यों को खैरात में नहीं, बल्कि उनके ऑन-ग्राउंड परफॉर्मेंस के आधार पर मिलेगा। केंद्र ने इसके लिए एक सख्त स्कोरिंग प्रणाली तय की है।

यदि कोई राज्य अपने तय लक्ष्य का 70 प्रतिशत से कम काम कर पाता है, तो उसे रिपोर्ट कार्ड में ‘शून्य’ अंक मिलेंगे और वह प्रोत्साहन राशि की रेस से बाहर हो जाएगा। वहीं, 70 से 80 फीसदी काम पर 5 अंक और 90 प्रतिशत से अधिक की शानदार उपलब्धि हासिल करने पर पूरे 10 अंक दिए जाएंगे। यही वजह है कि हरियाणा सरकार ने अपने प्रशासनिक अमले को सख्त हिदायत दी है कि 30 सितंबर की समय-सीमा के भीतर 58,000 कुत्तों की नसबंदी का टारगेट हर हाल में पूरा किया जाए, ताकि राज्य को केंद्र से अधिकतम वित्तीय सहायता मिल सके।

कड़े कानूनी दायरे में होगा काम, कलायत पालिका सचिव ने दी जानकारी

यह अभियान जितना प्रशासनिक है, उतना ही कानूनी रूप से संवेदनशील भी है। कलायत के नगरपालिका सचिव पवन कुमार ने इस संबंध में बताया कि महानिदेशक कार्यालय के आदेशानुसार, यह पूरी कवायद ‘पशु जन्म नियंत्रण (एबीसी) नियम-2023’ के सख्त मानकों के तहत ही संचालित की जाएगी। इसका सीधा मतलब यह है कि आवारा कुत्तों को पकड़ने से लेकर उनकी सर्जरी, डॉक्टरों की देखरेख में रिकवरी और फिर उन्हें वापस उसी इलाके में छोड़ने की पूरी प्रक्रिया बेहद मानवीय ढंग से होगी।

इस बाबत राज्य के सभी जिला उपायुक्तों (DC), नगर निगम कमिश्नरों, नगरपालिकाओं के सचिवों और जिला विकास एवं पंचायत अधिकारियों (DDPO) को विस्तृत गाइडलाइन जारी कर दी गई है। स्थानीय स्तर पर डॉग-कैचर टीमों और पशु चिकित्सकों के विशेष पैनल तैयार किए जा रहे हैं, ताकि जमीनी स्तर पर किसी भी तरह की अव्यवस्था या पशु क्रूरता की शिकायत न आए।

By Jagmarg