July 18, 2026

Hydrogen Train Schedule: पीएम मोदी के उद्घाटन के बाद शनिवार को क्यों नहीं चली हाइड्रोजन ट्रेन? रेलवे ने दी बड़ी जानकारी

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Hydrogen Train Schedule: पीएम मोदी के उद्घाटन के बाद शनिवार को क्यों नहीं चली हाइड्रोजन ट्रेन? रेलवे ने दी बड़ी जानकारी

हरियाणा के हिसार से है हाइड्रोजन ट्रेन का खास कनेक्शन, जिंदल स्टेनलेस ने बनाया और मजबूत

Hydrogen Train Schedule: भारतीय रेलवे के इतिहास में स्वर्णिम अध्याय जोड़ने वाली देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन उद्घाटन के अगले ही दिन शनिवार को यार्ड में खड़ी रही। शुक्रवार को जींद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस पर्यावरण अनुकूल ट्रेन को बड़ी धूमधाम से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था, लेकिन शनिवार को आम यात्रियों को इसके संचालन का इंतजार ही करना पड़ा।

रेलवे मुख्यालय, नई दिल्ली ने अब इस ट्रेन का नया और नियमित टाइम-टेबल जारी कर दिया है। इसके अनुसार, 89.1 किलोमीटर लंबे जींद-सोनीपत रूट पर यह ट्रेन रविवार (19 जुलाई) से नियमित रूप से दौड़ना शुरू करेगी। रेलवे ने स्पष्ट किया है कि तकनीकी बारीकियों को देखते हुए हर शुक्रवार को इस ट्रेन का मेंटेनेंस ब्लॉक रहेगा, यानी सप्ताह में छह दिन ही इसकी सेवाएं मिलेंगी।

दो घंटे का सफर और 12 स्टेशनों पर ठहराव

3200 किलोवाट की क्षमता वाले दो शक्तिशाली इंजनों से लैस इस ट्रेन की समय-सारणी तय कर दी गई है। ट्रेन नंबर 74010 (जींद–सोनीपत) रोजाना सुबह 07:40 बजे जींद जंक्शन से प्रस्थान करेगी और दो घंटे का सफर तय कर सुबह 09:40 बजे सोनीपत पहुंचेगी।

इसके बाद वापसी के फेरे में ट्रेन नंबर 74009 (सोनीपत–जींद) सुबह 10:40 बजे सोनीपत से खुलेगी और दोपहर 12:40 बजे जींद वापस आ जाएगी। इस दोतरफा सफर के दौरान दोनों दिशाओं में यह ट्रेन जींद सिटी, गोहाना और मोहाना समेत कुल 12 मध्यवर्ती रेलवे स्टेशनों पर रुकेगी, जिससे लोकल यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी।

हिसार के प्रीमियम स्टील से चमकी स्वदेशी ट्रेन

इस ऐतिहासिक ट्रेन के निर्माण में हरियाणा की औद्योगिक साख भी जुड़ी हुई है। ट्रेन को तैयार करने में लगे कुल स्टेनलेस स्टील का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा जिंदल स्टेनलेस कंपनी ने मुहैया कराया है।

कंपनी ने अपने हरियाणा के हिसार और ओडिशा के जाजपुर स्थित विश्वस्तरीय प्लांट से विशेष ऑस्टेनिटिक स्टेनलेस स्टील की आपूर्ति की है। इस खास मेटल की खूबी यह है कि इस पर हवा, पानी या किसी भी तरह के रसायनों का असर नहीं होता। जंगरोधी होने के कारण इसे बार-बार पेंट या मरम्मत की जरूरत नहीं पड़ती और हल्का होने की वजह से ट्रेन में ईंधन की भी भारी बचत होती है।

आधे घंटे में रीफिलिंग और इमरजेंसी में बैटरी बैकअप की ताकत

ट्रेन के लोको पायलट और तकनीशियनों ने इसकी तकनीकी खूबियों को लेकर कई अहम जानकारियां साझा की हैं। ट्रेन के दोनों इंजनों में 210-210 किलोग्राम यानी कुल 420 किलोग्राम हाइड्रोजन गैस भरी जाती है, जिससे यह एक बार में करीब 420 किलोमीटर की दूरी नाप सकती है।

जींद से सोनीपत के दो चक्करों में करीब 360 किलोमीटर की दूरी तय होती है, जिसके बाद इसके टैंक को दोबारा भरने में आधे से सवा घंटे का वक्त लगता है। सबसे खास बात यह है कि यदि ट्रैक पर कभी हाइड्रोजन सिस्टम में कोई तकनीकी खराबी आ भी जाए, तो यह ट्रेन रुकने वाली नहीं है; यह करीब 60 किलोमीटर तक अपनी इन-बिल्ट बैटरी के सहारे सुरक्षित आगे बढ़ सकती है।

वंदे भारत जैसी सुविधाएं, स्टेशनों पर हुआ था भव्य स्वागत

सुरक्षा और आधुनिकता के मामले में इस ट्रेन को वंदे भारत की तर्ज पर तैयार किया गया है। इसमें पैसेंजर इंफॉर्मेशन सिस्टम लगाया गया है, जिससे किसी भी आपात स्थिति में यात्री सीधे चालक दल (क्रू) से संवाद कर सकते हैं।

गौरतलब है कि शुक्रवार को अपनी उद्घाटन यात्रा के दौरान इस ट्रेन का गोहाना और सोनीपत समेत तमाम ठहरावों पर शंखनाद, फूलों की वर्षा और पारंपरिक पूजा-अर्चना के साथ जोरदार स्वागत किया गया था। नई तकनीक की इस ट्रेन को देखने और इसके साथ सेल्फी लेने के लिए स्टेशनों पर भारी हुजूम उमड़ा था।

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