July 3, 2026

Jind Cyber Crime: सावधान! ‘लोन-112’ ऐप के नाम पर हो रही है भारी ठगी, जींद पुलिस ने अलीगढ़ से दबोचा शातिर अपराधी

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Jind Cyber Crime: सावधान! 'लोन-112' ऐप के नाम पर हो रही है भारी ठगी, जींद पुलिस ने अलीगढ़ से दबोचा शातिर अपराधी

सावधान! 'लोन-112' ऐप के नाम पर हो रही है भारी ठगी

Jind Cyber Crime (दलेर सिंह) आज के डिजिटल दौर में जहां बैंकिंग और कर्ज मिलना आसान हुआ है, वहीं साइबर अपराधियों ने भी ठगी के नए-नए रास्ते अख्तियार कर लिए हैं। ऐसा ही एक सनसनीखेज मामला जींद में सामने आया है, जहां सीआईए स्टाफ ने लोन देने के नाम पर फर्जीवाड़ा करने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है। जींद के पुलिस अधीक्षक कुलदीप सिंह के कड़े दिशा-निर्देशों पर जिला पुलिस इन दिनों साइबर अपराधियों के खिलाफ एक विशेष मुहिम चला रही है। इसी कड़ी में पुलिस ने उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ से हेमंत नाम के एक ऐसे शातिर ठग को गिरफ्तार किया है, जो फर्जी वेबसाइट और मोबाइल ऐप्स का जाल बुनकर लोगों की मेहनत की कमाई पर डाका डाल रहा था।

‘लोन-112’ का झांसा और ₹24,255 की चपत: ऐसे बुना ठगी का ताना-बाना

इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब जींद के सेक्टर-8 के रहने वाले ऋषभ नाम के एक युवक ने सिविल लाइन थाने में धोखाधड़ी की लिखित शिकायत दर्ज कराई। सीआईए स्टाफ जींद के प्रभारी निरीक्षक अनूप कुमार ने शुक्रवार को मामले की तफ्तीश साझा करते हुए बताया कि पीड़ित ऋषभ के मोबाइल पर कुछ दिन पहले एक व्हाट्सएप मैसेज आया था। इस मैसेज में ‘लोन-112’, ‘देवमुनी लीजिंग एंड फाइनेंस लिमिटेड’ और ‘भारत लोन’ जैसी नामचीन या विश्वसनीय दिखने वाली कंपनियों के नाम का इस्तेमाल किया गया था। मैसेज भेजने वाले ने ऋषभ को झांसा दिया कि उनका एक पुराना लोन अभी भी सिस्टम में एक्टिव है और यदि वे नया लोन पास कराना चाहते हैं, तो उन्हें प्रोसेसिंग फीस या एडवांस के तौर पर कुछ रकम जमा करनी होगी।

असली कंपनी के दफ्तर पहुंचे पीड़ित, तब खुला फर्जीवाड़े का राज

आरोपियों की बातों और उनके पेशेवर अंदाज से प्रभावित होकर ऋषभ उनके झांसे में आ गए। ठगों ने उन्हें व्हाट्सएप पर ही एक फर्जी वेबसाइट का लिंक भेजा, जिसमें पेमेंट गेटवे की तरह एक यूपीआई (UPI) आईडी दी गई थी। ऋषभ ने बिना किसी संदेह के उस यूपीआई आईडी पर ₹24,255 ऑनलाइन ट्रांसफर कर दिए। ठगी का अहसास पीड़ित को तब हुआ जब कुछ दिन बीत जाने के बाद भी लोन की राशि उनके खाते में नहीं आई। परेशान होकर जब ऋषभ ने संबंधित फाइनेंस कंपनी के असली दफ्तर और कस्टमर केयर से संपर्क किया, तो वहां के अधिकारियों ने साफ कह दिया कि कंपनी को ऐसा कोई भुगतान नहीं मिला है और न ही ऐसा कोई लोन प्रोसेस में है। पैर तले जमीन खिसकने के बाद पीड़ित ने तुरंत पुलिस की शरण ली।

डिजिटल फुटप्रिंट्स ने पहुंचाया सलाखों के पीछे; बड़े नेटवर्क का खुलासा होने की उम्मीद

सिविल लाइन थाना पुलिस ने ऋषभ की शिकायत पर धोखाधड़ी और आईटी एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज कर मामले की कमान सीआईए स्टाफ को सौंप दी। चूंकि मामला पूरी तरह डिजिटल था, इसलिए पुलिस की साइबर सेल ने बैंक खातों के ट्रांजैक्शन और उस व्हाट्सएप नंबर के आईपी एड्रेस व कॉल डिटेल्स (CDR) को खंगालना शुरू किया। कड़ियां जुड़ते ही पुलिस की एक विशेष टीम ने उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में छापेमारी कर मुख्य आरोपी हेमंत को धर दबोचा। प्रभारी निरीक्षक अनूप कुमार ने बताया कि हेमंत से इस समय गहन पूछताछ की जा रही है। पुलिस को अंदेशा है कि यह महज एक मोहरा है और इसके पीछे एक बड़ा अंतरराज्यीय सिंडिकेट काम कर रहा है। आने वाले दिनों में इस गिरोह से जुड़े कुछ और बड़े चेहरों की गिरफ्तारी की संभावना जताई जा रही है।

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