Kalesar national park: कलेसर नेशनल पार्क में तेंदुए की तड़पकर मौत, ‘कैनाइन डिस्टेंपर वायरस’ के लक्षण से मचा हड़कंप
कलेसर नेशनल पार्क में तेंदुए की तड़पकर मौत
Kalesar national park (रघबीर सिंह) हरियाणा के यमुनानगर जिले में स्थित कलेसर नेशनल पार्क और वन्यजीव अभ्यारण्य (सेंचूरी एरिया) से एक बेहद परेशान करने वाली खबर सामने आई है। यहां के जंगलों में बिचरने वाले एक महज 8 से 10 महीने के नर तेंदुए की संदेहास्पद और तड़प-तड़प कर मौत हो गई है। इस घटना के बाद से ही स्थानीय वन्यजीव विभाग के अधिकारियों के कान खड़े हो गए हैं। दरअसल, प्राथमिक जांच और पोस्टमार्टम में इस शावक के भीतर बेहद खतरनाक और जानलेवा माने जाने वाले ‘कैनाइन डिस्टेंपर वायरस’ (CDV) के मजबूत लक्षण दिखाई दिए हैं। यदि विसरा रिपोर्ट में इस संक्रमण की पुष्टि होती है, तो यह कलेसर के समूचे इकोसिस्टम और वहां मौजूद अन्य तेंदुओं व मांसाहारी जीवों के लिए एक बड़ा खतरा साबित हो सकता है।
ग्रामीणों ने दी थी सूचना, तड़पते हुए शावक ने इलाज के दौरान तोड़ा दम
स्थानीय ग्रामीणों से मिली जानकारी के अनुसार, कलेसर जंगल से सटे शाहजादवाला गांव के नजदीक इस छोटे तेंदुए को बेहद गंभीर और लाचार हालत में जमीन पर तड़पते हुए देखा गया था। ग्रामीणों ने बिना समय गंवाए इसकी सूचना तुरंत वन्यजीव विभाग के अधिकारियों को दी। सूचना मिलते ही रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची और डॉक्टरों की देखरेख में शावक को बचाने और उसका इलाज करने के हरसंभव प्रयास शुरू किए गए। लेकिन संक्रमण का असर इतना गहरा था कि इस बेजुबान ने उपचार के दौरान ही दम तोड़ दिया।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में खुलासा: अंदरूनी अंगों में ब्लीडिंग और भयंकर डैमेज
मृत तेंदुए की मौत के असली कारणों का पता लगाने के लिए तीन अनुभवी पशु चिकित्सकों का एक विशेष पैनल गठित किया गया था। पोस्टमार्टम के दौरान जो तथ्य सामने आए, वे बेहद चौंकाने वाले और चिंताजनक थे। डॉक्टरों के मुताबिक, तेंदुए के लीवर और दिल पर इस अज्ञात बीमारी का बेहद गंभीर असर हुआ था। उसकी आंतों के भीतर अंदरूनी रक्तस्राव (इंटरनल ब्लीडिंग) हो रहा था और पूरा श्वसन तंत्र (Respiratory System) बुरी तरह विकृत और डैमेज हो चुका था। पशुपालन विभाग के डॉ. सतीश धनिया ने बताया कि ये तमाम चीजें सीधे तौर पर कैनाइन डिस्टेंपर वायरस की तरफ इशारा करती हैं, हालांकि अंतिम मुहर हिसार लैब से आने वाली विसरा रिपोर्ट के बाद ही लगेगी।
हाथी पुनर्वास केंद्र में किया गया अंतिम संस्कार, हिसार भेजी गई विसरा रिपोर्ट
नियमों और प्रोटोकॉल का कड़ाई से पालन करते हुए मृत तेंदुए के शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया है। संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए उसके अवशेषों को हाथी पुनर्वास केंद्र (Elephant Rescue Centre) के परिसर में ही गहरे गड्ढे में जमीन के नीचे सुरक्षित तरीके से दबाया गया है। डॉ. धनिया ने पुष्टि की कि वैज्ञानिक जांच के लिए विसरा के जरूरी नमूने हिसार स्थित क्षेत्रीय प्रयोगशाला में भेज दिए गए हैं, जिसकी रिपोर्ट अगले कुछ दिनों में आने की उम्मीद है।
झुंड से अलग होने की फितरत से राहत, लेकिन रामपुर खादर के दूसरे तेंदुए ने बढ़ाई टेंशन
इस पूरे मामले पर रोशनी डालते हुए वन्यजीव विशेषज्ञ डॉ. सतबीर नैन ने थोड़ा राहत देने वाला पहलू साझा किया। उन्होंने बताया कि अमूमन इस तरह के घातक वायरस से संक्रमित होने के बाद वन्यजीव अपनी प्राकृतिक आदत के चलते खुद को झुंड या अन्य जानवरों से बिल्कुल अलग-थलग कर लेते हैं। इस वजह से जंगलों में बीमारी के महामारी का रूप लेने या व्यापक स्तर पर फैलने का खतरा थोड़ा कम हो जाता है। इसके बावजूद, विभाग कोई कसर नहीं छोड़ना चाहता क्योंकि ठीक दो दिन पहले ही पास के रामपुर खादर इलाके में एक और तेंदुआ बेहद सुस्त और बीमार हालत में आबादी के करीब मंडराता देखा गया था।
कलेसर में तेंदुओं का कुनबा भारी, विभाग ने शुरू की स्पेशल मॉनिटरिंग
कलेसर नेशनल पार्क और सेंचुरी एरिया अपनी समृद्ध जैव विविधता और तेंदुओं की अच्छी-खासी आबादी के लिए जाना जाता है। ऐसे में लगातार दो तेंदुओं के बीमार होने और एक की मौत ने अफसरों की नींद उड़ा दी है। वन्यजीव विभाग के आला अधिकारियों ने कलेसर के चप्पे-चप्पे पर गश्त बढ़ा दी है। वन कर्मियों और ट्रैकर्स को निर्देश दिए गए हैं कि वे जंगलों में पानी के स्रोतों के आसपास विशेष नजर रखें और किसी भी वन्यजीव के व्यवहार में थोड़ा भी बदलाव या सुस्ती दिखने पर तुरंत कंट्रोल रूम को सूचित करें।
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