NIILM University: कैथल (संजय शर्मा) आधुनिकता और भागदौड़ के इस दौर में मानसिक शांति और शारीरिक सुदृढ़ता की तलाश के बीच आज कुरुक्षेत्र रोड स्थित एनआईआईएलएम यूनिवर्सिटी का परिसर पूरी तरह योग के रंग में सराबोर नजर आया। मौका था 12वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस का, जिसे विश्वविद्यालय प्रबंधन और छात्र समुदाय ने मिलकर एक उत्सव का रूप दे दिया। सुबह की ताजी हवा के बीच, कैंपस के विशाल मैदान में सैकड़ों की संख्या में मौजूद छात्र-छात्राओं और प्रोफेसरों ने एक सुर में ‘ॐ’ के उच्चारण के साथ योग सत्र की शुरुआत की।
समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार डॉ. आर.के. गुप्ता ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया। उनके साथ विशिष्ट अतिथि के तौर पर असिस्टेंट रजिस्ट्रार (परीक्षा) डॉ. संजीव नरवाल, डीन डॉ. रेखा गुप्ता, डीन डॉ. गौतम, कैप्टन अनिल, एडमिशन डायरेक्टर राजेंद्र गोयत और जनसंपर्क अधिकारी डॉ. मनोज कुमार भी अग्रिम पंक्ति में योग मुद्रा में नजर आए।
आयुष विभाग के योगाचार्य ने सिखाए निरोगी रहने के गुर
इस विशेष योग सत्र को तकनीकी और वैज्ञानिक रूप से संचालित करने की जिम्मेदारी आयुष विभाग से आए योगाचार्य संदीप को सौंपी गई थी। उन्होंने शारीरिक शिक्षा विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. बलकार सिंह के समन्वय से विद्यार्थियों को ताड़ासन, वृक्षासन, भुजंगासन और कपालभाति व अनुलोम-विलोम जैसे प्राणायामों का सघन अभ्यास कराया।
योगाचार्य संदीप ने प्रत्येक आसन के शारीरिक लाभ और उसे करते समय बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में भी विस्तार से बताया। विशेष रूप से परीक्षा और करियर के तनाव से जूझ रहे विद्यार्थियों के लिए अंत में कराया गया ‘ध्यान’ (Meditation) सत्र बेहद शांतिदायक रहा।
छात्रों के सर्वांगीण विकास पर जोर
विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए रजिस्ट्रार डॉ. आर.के. गुप्ता ने योग की महत्ता को रेखांकित किया। उन्होंने अपने वक्तव्य में कहा:
“योग को अक्सर लोग केवल शारीरिक कसरत या स्ट्रेचिंग समझ लेते हैं, जबकि वास्तव में यह हमारे शरीर, मन और आत्मा के बीच सामंजस्य स्थापित करने का एक संपूर्ण विज्ञान है। आज की इस अत्यधिक तनावपूर्ण जीवनशैली में यदि कोई दवा के बिना स्वस्थ रहना चाहता है, तो योग ही एकमात्र और सबसे सुलभ मार्ग है।”
डॉ. गुप्ता ने आगे जोड़ा कि एनआईआईएलएम यूनिवर्सिटी केवल किताबी ज्ञान पर भरोसा नहीं करती, बल्कि छात्रों के मानसिक और बौद्धिक विकास (सर्वांगीण विकास) के लिए ऐसे व्यावहारिक आयोजनों को हमेशा प्राथमिकता देती रहेगी।
सत्र के अंत में, प्रांगण में मौजूद हर एक व्यक्ति ने हाथ आगे बढ़ाकर यह संकल्प लिया कि वे इस विधा को अपनी जीवनशैली में स्थायी रूप से शामिल करेंगे। कार्यक्रम के सफल समापन पर विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से सभी प्रतिभागी विभागों, शिक्षकों और सहयोगी स्टाफ का आभार प्रकट किया गया।

