T-Rex Fossil Auction: 483 करोड़ रुपये में बिका 67 मिलियन साल पुराना डायनासोर का कंकाल, बना दुनिया का सबसे महंगा फॉसिल
महज कुछ घंटों की खुदाई में मिला था खजाना, अब 483 करोड़ में नीलाम हुआ 'गस' डायनासोर
T-Rex Fossil Auction: धरती पर कभी राज करने वाले सबसे खूंखार शिकारियों में शुमार टायरानोसॉरस रेक्स (टी-रेक्स) का एक कंकाल आज के दौर में भी अपनी बादशाहत साबित कर रहा है। न्यूयॉर्क में सोथबी (Sotheby’s) की नीलामी में ‘गस’ नाम के एक प्राचीन टी-रेक्स कंकाल ने 483 करोड़ रुपये की हैरतअंगेज कीमत हासिल कर दुनिया के सबसे महंगे फॉसिल होने का खिताब अपने नाम कर लिया है।
नीलामी की शुरुआत होते ही इस जीवाश्म को हासिल करने के लिए खरीदारों के बीच होड़ मच गई। महज 10 मिनट की रस्साकशी के बाद एक अज्ञात फोन कॉलर ने इस ऐतिहासिक सौदे पर अंतिम मुहर लगा दी।
आकार और पूर्णता ने बढ़ाई कीमत, विज्ञान के लिए किसी खजाने से कम नहीं
‘गस’ की यह रिकॉर्डतोड़ कीमत महज एक संयोग नहीं है, बल्कि इस कंकाल की असाधारण बनावट और इसकी पूर्णता है। सोथबी के विशेषज्ञों के अनुसार, यह कंकाल लगभग 63 प्रतिशत तक पूरा है, लेकिन अगर वजन और हड्डियों के घनत्व की बात करें तो यह पूरे शरीर का करीब 75 से 80 प्रतिशत हिस्सा कवर करता है।
38 फीट लंबे और साढ़े 12 फीट ऊंचे इस नरकंकाल का जबड़ा, नुकीले दांत और सिर का हिस्सा बेहद मजबूत स्थिति में मिला है। इसके अलावा, इसमें टी-रेक्स प्रजाति की बेहद दुर्लभ मानी जाने वाली ‘विशबोन’ (हंसली की हड्डी) भी सुरक्षित मिली है, जो वैज्ञानिकों को डायनासोर और आधुनिक पक्षियों के बीच के विकासवादी संबंधों को समझने में मदद करेगी।
डकोटा की पहाड़ियों में खुदाई का वह जादुई पल
इस नायाब जीवाश्म की खोज की कहानी भी किसी रोमांचक थ्रिलर फिल्म जैसी है। साल 2021 में अमेरिका के साउथ डकोटा की बंजर पहाड़ियों में फॉसिल हंटर्स (जीवाश्म खोजी दल) की एक टीम सामान्य खोजबीन में जुटी थी।
खुदाई के शुरुआती कुछ ही घंटों के भीतर टीम के हाथ पैर की एक विशालकाय हड्डी लगी। इसके बाद शुरू हुआ पांच साल तक चलने वाला एक बेहद जटिल और धीमा अभियान, जिसके तहत जमीन के सीने से डायनासोर की हड्डियों के करीब 1000 अलग-अलग टुकड़ों को निकाला गया। इन टुकड़ों को बिना नुकसान पहुंचाए आपस में जोड़ने के लिए वैज्ञानिकों को एक विशाल पिकलबॉल कोर्ट जितनी जगह और लोहे के विशेष फ्रेम का सहारा लेना पड़ा।
जमीन के मालिक को समर्पित रहा डायनासोर का नाम
नीलामी से पहले इस जीवाश्म के 190 से 280 करोड़ रुपये के बीच बिकने का अनुमान लगाया गया था, लेकिन अंतिम बोली ने बाजार के सभी पंडितों को चौंका दिया। इस डायनासोर का नाम ‘गस’ उस फार्म के मालिक गैरी लिकिंग के नाम पर रखा गया है, जिनकी जमीन पर यह कंकाल दफन था।
हालांकि, इस ऐतिहासिक खोज को मुकम्मल शक्ल में देखने से पहले ही गैरी का निधन हो गया, लेकिन उनकी पत्नी डाना लिकिंग इस पूरे प्रोजेक्ट के दौरान वैज्ञानिकों की टीम के साथ लगातार जुड़ी रहीं। सोथबी की वाइस चेयर कैसेंड्रा हैटन ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ‘गस’ केवल एक पुरातात्विक खोज नहीं है, बल्कि यह इंसानी धैर्य, वैज्ञानिक सटीकता और पृथ्वी के प्राचीन इतिहास का सबसे खूबसूरत दस्तावेज है।
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