Sant Ravidas Express: छेहर्टा-वाराणसी एक्सप्रेस को चंडीगढ़ के रास्ते चलाने की मांग, ट्राइसिटी को मिलेगी यूपी से सीधी रेल कनेक्टिविटी
छेहर्टा-वाराणसी एक्सप्रेस
Sant Ravidas Express: छेहर्टा (अमृतसर) और वाराणसी के बीच शुरू होने जा रही नई ट्रेन ‘संत रविदास एक्सप्रेस’ के रूट में बदलाव की मांग तेज हो गई है। पूर्वांचल वेलफेयर एसोसिएशन ने रेलवे मंत्रालय और रेलवे बोर्ड से आग्रह किया है कि इस ट्रेन को अंबाला कैंट से सीधे सहारनपुर भेजने के बजाय चंडीगढ़ के रास्ते अमृतसर (छेहर्टा) तक संचालित किया जाए, ताकि ट्राइसिटी के लाखों यात्रियों को भी इस बहुप्रतीक्षित सेवा का लाभ मिल सके। रेलवे बोर्ड की ओर से इस ट्रेन के स्टॉपेज की जो सूची जारी है उसके तहत ट्रेन अमृतसर, जालंधर सिटी, लुधियाना, अंबाला कैंट, सहारनपुर, मुरादाबाद, बरेली, शाहजहांपुर, लखनऊ, सुल्तानपुर और जौनपुर सिटी स्टेशनों पर रुकेगी। एसोसिएशन का कहना है कि वर्तमान प्रस्तावित रूट के कारण चंडीगढ़, मोहाली और पंचकूला के यात्रियों को इस न का कोई फायदा नहीं मिलेगा और उन्हें ट्रेन पकड़ने के लिए अंबाला जाना पड़ेगा। यदि ट्रेन अंबाला–चंडीगढ़–लुधियाना–अमृतसर मार्ग से चलाई जाती है तो ट्राइसिटी को वाराणसी व उत्तर प्रदेश के कई अन्य शहरों के लिए सीधी ट्रेन मिल जाएगी।
एसोसिएशन के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट यूके सिंह ने कहा कि ट्राइसिटी में पूर्वांचल और पूर्वी उत्तर प्रदेश के लाखों लोग रहते हैं। इसके अलावा बड़ी संख्या में छात्र, सरकारी कर्मचारी, कारोबारी, उद्योगपति और श्रद्धालु नियमित रूप से वाराणसी तथा आसपास के क्षेत्रों की यात्रा करते हैं। चंडीगढ़ से वाराणसी के लिए सिर्फ एक ही ट्रेन है और वह सप्ताह में दो ही दिन चलती है। उन्होंने कहा कि वाराणसी देश की धार्मिक, सांस्कृतिक और शैक्षणिक दृष्टि से सबसे महत्वपूर्ण नगरी है, जबकि चंडीगढ़ उत्तर भारत का प्रमुख प्रशासनिक, शैक्षणिक और स्वास्थ्य केंद्र है। दोनों शहरों के बीच सीधी रेल सेवा शुरू होने से न केवल यात्रियों का समय बचेगा, बल्कि उन्हें ट्रेन बदलने की परेशानी से भी मुक्ति मिलेगी।
यूके सिंह सहित एसोसिएशन के अन्य पदाधिकारियों ने रेलवे मंत्रालय से मांग की है कि ट्रेन के नियमित संचालन से पहले इसके प्रस्तावित मार्ग की समीक्षा की जाए और इसे चंडीगढ़ होकर संचालित करने का निर्णय लिया जाए। एसोसिएशन ने उम्मीद जताई कि यात्रियों की सुविधा और बढ़ती मांग को देखते हुए रेलवे इस सुझाव पर सकारात्मक निर्णय लेगा, जिससे पंजाब के साथ-साथ चंडीगढ़, मोहाली और पंचकूला के लोगों को भी वाराणसी तक तेज, आरामदायक और सीधी रेल कनेक्टिविटी मिल सकेगी।
उल्लेखनीय है कि चंडीगढ़ से लखनऊ के बीच चलने वाली चंडीगढ़ एक्सप्रेस, चंडीगढ़ से प्रयागराज के बीच चलने वाली ऊंचाहार एक्सप्रेस, कालका से हावड़ा तक चलने वाली कालका मेल, चंडीगढ़-पाटलीपुत्र तक चलने वाली पाटलीपुत्र एक्सप्रेस में यात्रियों की लंबी वेटिंग चलती है। उत्तरप्रदेश व बिहार रूट की प्रमुख ट्रेनों में दोनों ओर की टिकटें दो महीने पहले ही पूरी तरह बुक हो जाती हैं। ट्राईसिटी और हिमाचल प्रदेश के बद्दी इंडस्ट्रियल एरिया में विभिन्न राज्यों के लाखों लोग रहते हैं। इनमें से ज्यादातर लोग गर्मी की छुट्टियों में अपने परिवार के साथ अपने गृहराज्य की ट्रेन पकड़ने के लिए चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन से ट्रेन लेते हैं। लोगों की संख्या के मुकाबले इन राज्यों को जाने वाली ट्रेनों की संख्या काफी कम है। इनमें तीन ट्रेनें दैनिक है, बाकि ट्रेनें सप्ताह में एक या दो दिन चलती हैं। इसलिए रेलवे की ओर से समर स्पेशल ट्रेनें चलाई जाती हैं।
प्रधानमंत्री 17 जुलाई को संत रविदास एक्सप्रेस को दिखा सकते हैं झंडी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 17 जुलाई को जालंधर से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से छेहर्टा (अमृतसर) और वाराणसी के बीच चलने वाली नई संत रविदास एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाकर रवाना कर सकते हैं। इसी अवसर पर वह जालंधर के नवनिर्मित विश्वस्तरीय रेलवे स्टेशन का भी उद्घाटन करेंगे। रेलवे द्वारा जारी शेड्यूल के अनुसार छेहर्टा-वाराणसी संत रविदास एक्सप्रेस (14624) सप्ताह में तीन दिन बुधवार, शुक्रवार और रविवार को चलेगी। ट्रेन दोपहर 2:05 बजे छेहर्टा से रवाना होकर 2:25 बजे अमृतसर पहुंचेगी और पांच मिनट के ठहराव के बाद 2:30 बजे वाराणसी के लिए प्रस्थान करेगी। अगले दिन सुबह 7:25 बजे लखनऊ पहुंचने के बाद ट्रेन दोपहर 12:15 बजे वाराणसी पहुंचेगी। वहीं, वाराणसी-छेहर्टा संत रविदास एक्सप्रेस (14623) प्रत्येक वीरवार, शनिवार और सोमवार को शाम 7:50 बजे वाराणसी से रवाना होगी। ट्रेन रात 12:10 बजे लखनऊ पहुंचेगी और अगले दिन शाम 4:35 बजे अमृतसर पहुंचने के बाद 5:10 बजे छेहर्टा पहुंचेगी।
वाराणसी स्पेशल का अंतिम फेरा, अब स्थायी ट्रेन पर टिकी यात्रियों की उम्मीदें
गर्मियों के दौरान यात्रियों की बढ़ती भीड़ को देखते हुए रेलवे हर वर्ष चंडीगढ़ और वाराणसी के बीच विशेष ट्रेन का संचालन करता है। इस वर्ष भी चलाई गई एसी स्पेशल ट्रेन का संचालन अब समाप्त हो रहा है। रविवार को ट्रेन ने वाराणसी से चंडीगढ़ के लिए अपना अंतिम फेरा लगाया, जबकि सोमवार को यह चंडीगढ़ से वाराणसी के लिए अंतिम बार रवाना होगी। करीब दो महीने तक संचालित इस स्पेशल ट्रेन ने सप्ताह में दो दिन के हिसाब से कुल 36 फेरे लगाए। इस दौरान चंडीगढ़, मोहाली, पंचकूला और आसपास के क्षेत्रों से पूर्वांचल जाने वाले यात्रियों को काफी राहत मिली और ट्रेन को अच्छा प्रतिसाद भी मिला।
इसी बीच भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य एवं हिमाचल प्रदेश के सह प्रभारी संजय टंडन ने केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से चंडीगढ़-वाराणसी स्पेशल ट्रेन को स्थायी रूप से चलाने का आग्रह किया है। उनका कहना है कि ट्राइसिटी और पूर्वी उत्तर प्रदेश के बीच यात्रियों की संख्या लगातार बढ़ रही है, इसलिए इस रूट पर नियमित ट्रेन की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही है। स्थायी रेल सेवा शुरू होने से न केवल यात्रियों को वर्षभर सुविधा मिलेगी, बल्कि ट्राइसिटी और पूर्वांचल के बीच धार्मिक, सामाजिक, शैक्षणिक और व्यावसायिक आवागमन भी और अधिक सुगम हो सकेगा।
