Skin Care: सोशल मीडिया पर वायरल हुआ चुकंदर और चावल का साबुन; जानिए क्या वाकई दूर होगी टैनिंग?
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ चुकंदर और चावल का साबुन
Skin Care: महंगे कॉस्मेटिक्स, केमिकल युक्त डी-टैन क्रीम और स्किन ब्राइटनिंग प्रोडक्ट्स के बढ़ते चलन के बीच इन दिनों सोशल मीडिया पर घरेलू नुस्खों (DIY) की बाढ़ आई हुई है। इसी कड़ी में इंस्टाग्राम और यूट्यूब रील पर ‘राइस एंड बीटरूट सोप’ (Rice & Beetroot Soap) का एक वीडियो खूब सुर्खियां बटोर रहा है। इंटरनेट पर दावा किया जा रहा है कि यह जादुई साबुन त्वचा की टैनिंग को चुटकियों में साफ कर शरीर को बेदाग, मुलायम और चमकदार बना देता है।
इस नुस्खे को सोशल मीडिया की जानी-मानी नेचुरल स्किन केयर एक्सपर्ट और आयुर्वेदिक डॉक्टर, डॉ. शोभना ने साझा किया है। लेकिन, क्या वाकई रसोई में मिलने वाली इन चीजों से बना साबुन त्वचा का रंग साफ कर सकता है? या फिर चमक के इस दावे के पीछे कुछ छिपे हुए रिस्क भी हैं? आइए इस वायरल नुस्खे की जमीनी हकीकत और इसके वैज्ञानिक पहलुओं को गहराई से समझते हैं।
कैसे तैयार होता है यह वायरल सोप?
डॉ. शोभना के अनुसार, इस साबुन को पूरी तरह प्राकृतिक सामग्रियों से तैयार किया जाता है। इसके लिए 4 कटोरी चावल का आटा, आधी कटोरी कॉर्न फ्लोर, आधी कटोरी पिसी हुई सफेद चीनी को एक साथ मिलाया जाता है। इसके बाद इसमें 4 चम्मच ताजा चुकंदर का रस, 4 चम्मच गुलाब जल, और दो-दो छोटे चम्मच ऑलिव व बादाम का तेल डालकर एक गाढ़ा मिश्रण गूंथ लिया जाता है। इस मिश्रण की छोटी-छोटी बॉल्स बनाकर उन्हें कुछ देर सुखाया जाता है और फिर कद्दूकस किए हुए ग्लिसरीन साबुन की कोटिंग करके इस्तेमाल में लाया जाता है।
त्वचा पर क्या होता है इन सामग्रियों का असर?
चर्म रोग विशेषज्ञों (Dermatologists) के अनुसार, इस नुस्खे में इस्तेमाल की गई सामग्री के फायदे तो हैं, लेकिन उनकी अपनी सीमाएं भी हैं:
स्क्रबिंग और एक्सफोलिएशन: चावल का आटा और चीनी बेहतरीन नेचुरल एक्सफोलिएटर हैं। ये त्वचा की ऊपरी परत पर जमा गंदगी और डेड स्किन को हटा देते हैं, जिससे त्वचा तुरंत साफ और चमकदार महसूस होने लगती है। लेकिन अगर इसे ज्यादा जोर से रगड़ा गया, तो सेंसिटिव स्किन पर बारीक खरोंचें (Micro Tears) आ सकती हैं।
मॉइश्चराइजेशन: बादाम और ऑलिव ऑयल में मौजूद विटामिन-ई त्वचा को रूखेपन से बचाते हैं। मगर, जिन लोगों की स्किन पहले से ऑयली है या जिन्हें बदन पर मुंहासे (Body Acne) होते हैं, उनके लिए यह तेल रोमछिद्रों को बंद कर समस्या बढ़ा सकते हैं।
एंटीऑक्सीडेंट्स: चुकंदर का रस विटामिन-सी और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होता है, जो स्किन को फ्रेश लुक देता है और साबुन को एक खूबसूरत गुलाबी रंगत भी प्रदान करता है।
अनदेखे खतरे: प्रिजर्वेटिव की कमी और फंगस का डर
इस घरेलू साबुन की सबसे कमजोर कड़ी यह है कि इसमें किसी भी तरह के सिंथेटिक प्रिजर्वेटिव का उपयोग नहीं होता है। चूंकि इसमें चुकंदर का ताजा रस और गुलाब जल जैसी गीली सामग्रियों का इस्तेमाल किया गया है, इसलिए इसे सामान्य तापमान (रूम टेम्परेचर) पर रखने से इसमें बेहद कम समय में हानिकारक बैक्टीरिया या फंगस (उल्ली) पनप सकती है। दूषित हो चुके इस साबुन को शरीर पर लगाने से त्वचा में गंभीर संक्रमण या एलर्जी हो सकती है। यही वजह है कि जानकार इसे हमेशा फ्रिज में रखने और बनाने के 7 से 10 दिनों के भीतर ही खत्म करने की सख्त हिदायत देते हैं।
क्या वाकई खत्म होगी टैनिंग? जानिए डॉक्टरों की राय
मेडिकल साइंस के अनुसार, दुनिया का कोई भी घरेलू या बाजारू साबुन आपकी त्वचा के प्राकृतिक रंग या मेलेनिन (Melanin) के स्तर को स्थाई रूप से नहीं बदल सकता। यह साबुन केवल बाहरी धूल-मिट्टी और टैनिंग की हल्की परत को साफ करता है, जिससे एक अस्थायी निखार दिखाई देता है। इसे परमानेंट स्किन व्हाइटनिंग ट्रीटमेंट मानना पूरी तरह गलत है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इसे चेहरे पर लगाने की भूल कतई न करें, क्योंकि चेहरे की त्वचा बेहद नाजुक होती है। पूरे शरीर पर भी इस्तेमाल करने से पहले हाथ के एक छोटे हिस्से पर ‘पैच टेस्ट’ जरूर कर लें। अगर त्वचा पर पहले से ही एक्जिमा, सोरायसिस या कोई घाव है, तो इस तरह के प्रयोगों से पूरी तरह दूरी बना कर रखें और हमेशा एक सर्टिफाइड डर्मेटोलॉजिस्ट की सलाह को ही प्राथमिकता दें।
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