NIT Kurukshetra News: विवादों और 4 सुसाइड के बाद एक्शन में शिक्षा मंत्रालय, एनआईटी कुरुक्षेत्र के लिए नए डायरेक्टर की खोज शुरू

GGaganpreet Kaur
विवादों और 4 सुसाइड के बाद एक्शन में शिक्षा मंत्रालय, एनआईटी कुरुक्षेत्र के लिए नए डायरेक्टर की खोज शुरू
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कुरुक्षेत्र। देश के प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थानों में शुमार नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एनआईटी) कुरुक्षेत्र इस समय अपने इतिहास के सबसे बुरे प्रशासनिक और मानसिक स्वास्थ्य संकट से गुजर रहा है। पिछले करीब दो महीने से कैंपस के भीतर चल रहे गंभीर घटनाक्रमों, आंतरिक कलह और दिल्ली तक पहुंची शिकायतों के बीच अब केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने मोर्चा संभाल लिया है। मंत्रालय के उच्चतर शिक्षा विभाग ने संस्थान के प्रशासनिक ढर्रे को दोबारा पटरी पर लाने के लिए एक नियमित डायरेक्टर की नियुक्ति प्रक्रिया का आधिकारिक शंखनाद कर दिया है। इसके लिए आगामी 1 जून से लेकर 30 जून तक योग्य उम्मीदवारों से आवेदन मांगे गए हैं। इस विज्ञापन के जारी होते ही एनआईटी परिसर में कयासबाजियों का दौर शुरू हो गया है, वहीं लंबे समय से घुटन महसूस कर रहे शिक्षक और गैर-शिक्षक कर्मचारी भी अब खुलकर अपनी राय जाहिर करने लगे हैं।

अनियमितताओं के आरोपों में घिरे पूर्व डायरेक्टर, रजिस्ट्रार पर गिरी गाज

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एनआईटी कुरुक्षेत्र में विवादों की पटकथा तब और गंभीर हो गई जब संस्थान की कार्यशैली को लेकर सीधी शिकायतें दिल्ली दरबार यानी केंद्रीय मंत्रालय तक पहुंचने लगीं। कार्रवाई की पहली बड़ी किस्त 29 मार्च को देखने को मिली, जब मंत्रालय ने तत्कालीन डायरेक्टर प्रो. बीवी रमना रेड्डी की सभी प्रशासनिक और वित्तीय शक्तियों को फ्रीज (रोक) कर दिया। इसके ठीक बाद, कथित अनियमितताओं और मनमाने फैसलों के आरोपों के चलते जॉइंट रजिस्ट्रार ज्ञान रंजन सामंत्रे को भी सस्पेंड कर घर बैठा दिया गया। चौतरफा दबाव के बीच 25 अप्रैल को प्रो. बीवी रमना रेड्डी का इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया, जिसके बाद मंत्रालय ने प्रो. ब्रह्मजीत सिंह को कार्यकारी डायरेक्टर की कमान सौंपी। वर्तमान में वही कार्यवाहक के तौर पर रोजमर्रा का कामकाज संभाल रहे हैं।

दो महीने में 4 सुसाइड: अवसाद और तनाव के साये में कुरुक्षेत्र कैंपस

संस्थान के प्रशासनिक गलियारे की लड़ाई एक तरफ है, लेकिन सबसे डरावनी और झकझोरने वाली हकीकत छात्रों के हॉस्टलों से सामने आई है। साल 2026 के शुरुआती चार महीनों के भीतर ही इस कैंपस में चार होनहार छात्रों ने आत्महत्या जैसा आत्मघाती कदम उठाया। सिलसिले की शुरुआत 16 फरवरी को हुई जब तेलंगाना के 19 वर्षीय छात्र अंगोद शिवा ने हॉस्टल में फांसी लगा ली। इसके बाद 31 मार्च को नूंह के घासैड़ा निवासी इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग सेकंड ईयर के छात्र पवन कुमार ने मौत को गले लगाया।

अभी यह सदमा थमा भी नहीं था कि 9 अप्रैल को सिरसा के शेरपुर गांव के रहने वाले बीटेक थर्ड ईयर के छात्र प्रियांशु वर्मा का शव उनके कमरे में मिला। इसके ठीक एक हफ्ते बाद 16 अप्रैल को बिहार के बक्सर की रहने वाली और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की फर्स्ट ईयर की होनहार छात्रा दीक्षा दुबे ने भी फंदा लगाकर जान दे दी। दीक्षा की मौत के बाद एक और छात्रा द्वारा उठाए गए आत्मघाती कदम की कोशिश ने यह साबित कर दिया कि कैंपस के भीतर छात्रों की मेंटल हेल्थ और काउंसलिंग को लेकर गंभीर कमियां मौजूद हैं।

बीओजी चेयरपर्सन का कार्यकाल खत्म, नए चेहरों पर टिकी नजरें

एनआईटी के शीर्ष प्रशासनिक ढांचे में बदलाव की कड़ी सिर्फ डायरेक्टर तक सीमित नहीं है। संस्थान के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स (BOG) की चेयरपर्सन डॉ. तेजस्विनी अनंता कुमार का 6 महीने का संक्षिप्त कार्यकाल भी बीती 24 मई को पूरा हो गया है। उन्हें 25 नवंबर 2025 को इस मानद पद पर नियुक्त किया गया था। अब डायरेक्टर के साथ-साथ संस्थान को एक नया बीओजी चेयरमैन भी मिलना तय है। कैंपस के वरिष्ठ प्रोफेसरों का मानना है कि जून के महीने में होने वाली ये नियुक्तियां तय करेंगी कि आने वाले समय में एनआईटी कुरुक्षेत्र अपनी खोई हुई साख को वापस पा सकेगा या राजनीति के अखाड़े में ही उलझा रहेगा।

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