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NIT Kurukshetra News: "स्किल बेहतर बनाना ही एकमात्र विकल्प"— एनआईटी कुरुक्षेत्र में वर्ल्ड बैंक की टीम ने दी नई उम्मीद

GGaganpreet Kaur
"स्किल बेहतर बनाना ही एकमात्र विकल्प"— एनआईटी कुरुक्षेत्र में वर्ल्ड बैंक की टीम ने दी नई उम्मीद
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कुरुक्षेत्र (जग मार्ग)। कुरुक्षेत्र के राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) में पिछले कुछ समय से पसरी मायूसी और चार छात्रों की आत्महत्या के बाद बने संवेदनशील माहौल के बीच अब एक नई और सकारात्मक पहल शुरू हुई है। संस्थान में छात्रों के मानसिक और पेशेवर कौशल को निखारने के लिए वर्ल्ड बैंक (विश्व बैंक) और प्रदेश सरकार ने साझा कवायद तेज कर दी है। उद्देश्य साफ है— पाठ्यक्रम को समय की जरूरत के हिसाब से ढालना और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को रोजगार का मुख्य आधार बनाना।

एआई विकास परियोजना: पहले दौर की वार्ता में विशेषज्ञों का जमावड़ा

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सोमवार को वर्ल्ड बैंक की एक उच्चस्तरीय 10 सदस्यीय टीम एनआईटी पहुंची। इस टीम में न केवल अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ शामिल थे, बल्कि प्रदेश सरकार के ‘हारट्रोन’ विभाग से जुड़े तकनीकी प्रतिनिधि भी मौजूद रहे। संस्थान के प्रशासनिक भवन में करीब तीन घंटे तक चली इस उच्चस्तरीय बैठक में एनआईटी के एआई और डेटा साइंस विभाग के विशेषज्ञ, ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट प्रभारी प्रो. गुलशन सचदेवा और डीन अकादमिक सहित कई दिग्गजों ने हिस्सा लिया।

यह दौरा ‘हरियाणा एआई विकास परियोजना’ (HAIDP) के तहत किया गया। टीम का मुख्य फोकस इस बात पर रहा कि कैसे एआई के क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर पैदा किए जाएं और मौजूदा इंजीनियरिंग पाठ्यक्रम में ऐसे कौन से सुधार किए जाएं, जिससे छात्र वैश्विक स्तर की प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार हो सकें।

रोजगार और स्किल पर केंद्रित रहा मंथन

बैठक में इस बात पर गहन चर्चा हुई कि भविष्य की नौकरियों में एआई की भूमिका निर्णायक होने वाली है। ऐसे में छात्रों की स्किल (कौशल) को कैसे बेहतर बनाया जाए ताकि वे केवल डिग्रीधारी न रहकर ‘जॉब रेडी’ प्रोफेशनल बनें। एनआईटी के प्रवक्ता प्रो. ज्ञान भूषण ने जानकारी देते हुए बताया कि इस पहले दौर की वार्ता का मूल उद्देश्य युवाओं को एआई की नई संभावनाओं से जोड़ना था। इसमें एनआईटी एक ‘नोडल सेंटर’ या सहयोगी के रूप में कैसे भूमिका निभा सकता है, इस पर विस्तृत सुझाव लिए गए।

नकारात्मकता के बीच सकारात्मकता की उम्मीद

एनआईटी परिसर में पिछले एक महीने के दौरान हुई दुखद घटनाओं ने संस्थान की साख और छात्रों के मनोबल पर गहरा असर डाला था। विशेषज्ञों का मानना है कि वर्ल्ड बैंक जैसी संस्थाओं का दखल और नए दौर के रोजगारपरक कोर्स में सुधार की यह पहल छात्रों के बीच फिर से विश्वास पैदा करने में सहायक होगी।

वर्ल्ड बैंक की टीम ने बैठक के बाद परिसर का दौरा भी किया और बुनियादी ढांचे का जायजा लिया। इस कवायद को एनआईटी के पुनरुद्धार की दिशा में एक बड़े कदम के रूप में देखा जा रहा है। अब देखना यह होगा कि पहले दौर की इस बातचीत के बाद पाठ्यक्रम में धरातल पर कब तक बदलाव नजर आते हैं।

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