Breaking News
Magha Shraddha 2026: 7 अक्टूबर को है मघा श्राद्ध, जानें द्वादशी तिथि पर तर्पण का शुभ समय और नियमKaithal Nursing Staff Strike: ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी के खिलाफ कैथल में नर्सिंग स्टाफ का हल्लाबोल, 5 से 7 अक्टूबर तक हड़तालMahendragarh : हकेवि की डॉ. सुमन रानी को मिला ‘श्रेष्ठ शिक्षक अवार्ड’, शिक्षा मंत्री ने किया सम्मानितNarnaul: हरियाणा के सभी जिलों में 8 अक्ट्रबर को होगा ‘वोट बचाओ-देश बचाओ’ विशाल रोष मार्चCEC ज्ञानेश कुमार मामले में SC ने EC से मांगा जवाब, CJI बोले Form-6 पर- हमने कोई बदलाव मंजूर नहीं कियाMagha Shraddha 2026: 7 अक्टूबर को है मघा श्राद्ध, जानें द्वादशी तिथि पर तर्पण का शुभ समय और नियमKaithal Nursing Staff Strike: ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी के खिलाफ कैथल में नर्सिंग स्टाफ का हल्लाबोल, 5 से 7 अक्टूबर तक हड़तालMahendragarh : हकेवि की डॉ. सुमन रानी को मिला ‘श्रेष्ठ शिक्षक अवार्ड’, शिक्षा मंत्री ने किया सम्मानितNarnaul: हरियाणा के सभी जिलों में 8 अक्ट्रबर को होगा ‘वोट बचाओ-देश बचाओ’ विशाल रोष मार्चCEC ज्ञानेश कुमार मामले में SC ने EC से मांगा जवाब, CJI बोले Form-6 पर- हमने कोई बदलाव मंजूर नहीं किया

Paddy Nursery Care: धान की पनीरी को 'बौने रोग' से कैसे बचाएं? पिहोवा के कृषि अधिकारी ने दी बड़ी चेतावनी

AAmandeep Singh
Paddy Nursery Care: धान की पनीरी को 'बौने रोग' से कैसे बचाएं? पिहोवा के कृषि अधिकारी ने दी बड़ी चेतावनी
शेयर करें
AI Quick Summary

Want to save time? Let our AI read the article and give you 3 quick bullet points.

Listen to this article
AUDIO VERSION

पिहोवा। धान की बुआई का सीजन शुरू होते ही अन्नदाताओं के माथे पर फसलों की सुरक्षा को लेकर चिंता की लकीरें खिंचने लगी हैं। इस बीच, पिहोवा के उपमंडल कृषि अधिकारी डॉ. मनीष वत्स ने किसानों को सचेत करते हुए धान की नर्सरी को ‘व्हाइट बैक्ड प्लांट हॉपर’ (सफेद पीठ वाला टिड्डा) और ‘राइस ड्वार्फ’ यानी धान के बौने रोग के संभावित हमले से बचाने के लिए एक महत्वपूर्ण निवारक परामर्श (प्रिवेंटिव एडवाइजरी) जारी किया है। दरअसल, पिछले साल हरियाणा के कई जिलों में धान की फसल में बौने रोग ने जमकर कहर बरपाया था, जिससे सबक लेते हुए इस बार कृषि विभाग शुरुआती स्तर पर ही मुस्तैद नजर आ रहा है।

मक्के के खेत के पास भूलकर भी न बनाएं नर्सरी, खरपतवार से बनाएं दूरी

विज्ञापन

किसानों को व्यावहारिक सुझाव देते हुए डॉ. मनीष वत्स ने कहा कि इस बीमारी को फैलने से रोकने के लिए सबसे पहले अपने खेतों की मेड़ों को बिल्कुल साफ-सुथरा रखें और खेत के आसपास जमा खरपतवार को तुरंत हटा दें। उन्होंने एक बेहद महत्वपूर्ण तकनीकी नुक्ता साझा करते हुए कहा कि किसान भाई मक्के के खेतों के बिल्कुल नजदीक धान की पनीरी (नर्सरी) तैयार न करें। ऐसा इसलिए, क्योंकि मक्के की फसल में इस रोग को फैलाने वाले वाहक कीट (वेक्टर) भारी तादाद में पनपते हैं, जो वहां से सीधे उड़कर धान की नई और कोमल पौध पर हमला कर सकते हैं। इसके अलावा, उन्होंने खेतों में जरूरत से ज्यादा यूरिया या नाइट्रोजन का इस्तेमाल न करने और जलभराव वाले निचले इलाकों में नर्सरी लगाने से बचने की हिदायत दी है।

संक्रमित पौध दिखे तो तुरंत उखाड़कर जमीन में गाड़ें, बीजोपचार है रामबाण

कृषि अधिकारी ने जोर देकर कहा कि जिन किसानों ने अभी तक धान की नर्सरी नहीं डाली है, वे बुआई से पहले बीजों को मिट्टी और बीज जनित कीटों व रोगजनकों (पैथोजन्स) से बचाने के लिए अनुशंसित कीटनाशकों या जैव-कीटनाशकों से अच्छी तरह उपचारित (सीड ट्रीटमेंट) जरूर कर लें। उन्होंने कहा, “नर्सरी उगने के बाद किसान भाई रोजाना उसकी निगरानी करें। अगर शुरुआती चरण में ही कोई पौधा पीला, कमजोर या संक्रमित दिखाई दे, तो उसकी पहचान कर तुरंत जड़ से उखाड़ लें। ऐसे बीमार पौधों को खेत से काफी दूर ले जाकर मिट्टी में गहरा दबा दें, ताकि यह संक्रमण हवा या पानी के जरिए पूरी फसल में न फैल सके।”

कुरुक्षेत्र के खेतों पर दिल्ली की नजर, केंद्रीय टीम लगातार कर रही है औचक निरीक्षण

धान के इस संवेदनशील सीजन में कुरुक्षेत्र जिले के किसानों को तकनीकी रूप से मजबूत करने और फसलों की स्थिति का जायजा लेने के लिए भारत सरकार भी गंभीर है। डॉ. वत्स ने बताया कि कृषि विभाग की एक विशेष केंद्रीय टीम लगातार कुरुक्षेत्र के ग्रामीण इलाकों का सघन दौरा कर रही है। इस उच्च स्तरीय टीम में डॉ. लक्ष्मीकांत कौशिक, डॉ. केपी शर्मा और डॉ. सुरजीत जैसे जाने-माने कृषि विशेषज्ञ शामिल हैं। यह टीम समय-समय पर खेतों में जाकर सीधे किसानों से संवाद कर रही है और मिट्टी व पौधों के सैंपल ले रही है, ताकि समय रहते किसी भी बड़े संकट को टाला जा सके और इस बार धान की बंपर पैदावार सुनिश्चित की जा सके।

विज्ञापन

कुरुक्षेत्र की और ख़बरें

ताज़ा ख़बरें सीधे अपने ईमेल पर

जगमार्ग न्यूज़ की बड़ी ख़बरें रोज़ अपने इनबॉक्स में पाएं। मुफ़्त, कभी भी अनसब्सक्राइब करें।