Parvinder Singh Jhota Murder Case Mansa : पंजाब के मानसा में नशा-विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की नृशंस हत्या के बाद उपजा आक्रोश थमने का नाम नहीं ले रहा है। घटना के छह दिन बीत जाने के बावजूद पीड़ित परिवार और संघर्ष कमेटी ने अभी तक पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार नहीं किया है। परिवार अपनी जिद पर अड़ा है कि जब तक हत्यारों के आकाओं पर शिकंजा नहीं कसा जाता और मुख्यमंत्री तथा डीजीपी इस्तीफा नहीं देते, तब तक संघर्ष जारी रहेगा। इस संवेदनशील माहौल के बीच अब इस मामले की गूंज फिल्म इंडस्ट्री से लेकर सियासी गलियारों तक साफ सुनाई देने लगी है।
नीरू बाजवा ने रोकी फिल्म, केवल सिंह ढिल्लों पहनेंगे काली पगड़ी
पंजाब के सुलगते हालातों को देखते हुए पंजाबी सिनेमा की मशहूर अभिनेत्री नीरू बाजवा ने संवेदनशीलता का परिचय देते हुए अपनी हालिया रिलीज फिल्म ‘थापी’ को फिलहाल सिनेमाघरों में होल्ड करने का बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने दोटूक कहा कि उनकी पहचान इस पंजाब की मिट्टी से है, इसलिए जब तक हालात सामान्य नहीं होते, वह इस फिल्म को आगे प्रदर्शित नहीं करेंगी।
उधर, राजनीतिक मोर्चे पर भी सियासत गरमा गई है। पंजाब बीजेपी के नेता केवल सिंह ढिल्लों ने ऐलान किया है कि जब तक परविंदर सिंह झोटा को सही मायनों में न्याय नहीं मिल जाता, वे विरोध स्वरूप काली पगड़ी पहनेंगे।
19 अक्टूबर को आप विधायकों के घरों के बाहर प्रदर्शन का ऐलान
इंसाफ कमेटी ने सरकार पर दबाव बनाने के लिए अपनी रणनीति तेज कर दी है। तय कार्यक्रम के अनुसार, 19 अक्टूबर को दोपहर 12 बजे से 3 बजे के बीच आम आदमी पार्टी के सभी विधायकों के आवासों के बाहर जोरदार प्रदर्शन किए जाएंगे। इस दौरान प्रदर्शनकारियों द्वारा विधायकों को ‘लाहनती पत्र’ सौंपे जाने की तैयारी है।
कमेटी का मानना है कि इस पूरे मामले में प्रशासन की विफलता को उजागर करने के लिए जन-सहयोग और किसान संगठनों के बीच मजबूत तालमेल बेहद जरूरी है। इसके साथ ही संयुक्त किसान मोर्चा पंजाब ने भी पूरे प्रदेश में जिला स्तर पर बैठकें बुलाकर इस आंदोलन को एक नया विस्तार देने का फैसला किया है।
प्रशासन की कोशिशें नाकाम, अंतिम संस्कार पर असमंजस बरकरार
दूसरी तरफ, जिला प्रशासन और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के माथे पर बल पड़े हुए हैं। पुलिस लगातार परिवार और इंसाफ कमेटी के नुमाइंदों के साथ दौर-की-बैठकें कर रही है ताकि किसी तरह सहमति बनाकर शव का पोस्टमॉर्टम कराया जा सके और कानूनी प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सके। लेकिन परिवार का रवैया बेहद सख्त है।
वे सीबीआई जांच की मांग पर पूरी तरह डटे हुए हैं। प्रशासन की तमाम मिन्नतों के बावजूद जब तक सरकार उनकी शर्तें नहीं मानती, तब तक अंतिम संस्कार को लेकर असमंजस के बादल छाए हुए हैं और मानसा का यह संघर्ष अब पूरे सूबे की राजनीति का केंद्र बन चुका है।
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