Daljit Singh’s funeral: पंजाब के मानसा जिले के गांव भम्मे कलां के 35 वर्षीय दलजीत सिंह का गुरुवार को मौत के आठवें दिन अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान उनकी बहन अमरजीत कौर ने भाई की अर्थी को कंधा दिया। दलजीत की मौत को लेकर पिछले कई दिनों से विवाद जारी है। एक तरफ पुलिस ने हत्या के आरोप में तीन लोगों को गिरफ्तार किया है, वहीं गिरफ्तार युवक मनदीप सिंह की बहन ने सीसीटीवी फुटेज सामने लाकर दावा किया है कि दलजीत की मौत हत्या से नहीं, बल्कि नशे का इंजेक्शन लगाने के बाद ओवरडोज से हुई।
मनदीप सिंह की बहन का कहना है कि घर में लगे सीसीटीवी कैमरों में घटना से पहले और बाद की गतिविधियां रिकॉर्ड हुई हैं। उसके मुताबिक, फुटेज में दलजीत सिरिंज लेकर बाथरूम में जाता दिखाई दे रहा है। काफी देर तक बाहर नहीं आने पर जब युवकों ने अंदर जाकर देखा तो वह बेसुध हालत में मिला। उसने आरोप लगाया कि उसके भाई और अन्य युवकों को हत्या के मामले में गलत तरीके से फंसाया गया है। परिवार ने पुलिस से सीसीटीवी फुटेज की निष्पक्ष जांच कराने और घटना में मौजूद सभी लोगों की भूमिका सामने लाने की मांग की है।
बहन का दावा- सिरिंज लेकर बाथरूम में गया था दलजीत
मनदीप सिंह की बहन के अनुसार, दलजीत सिंह अपने तीन साथियों के साथ गांव रामानंदी निवासी मनदीप के घर आया था। वहां सभी ने नशा किया। इसी दौरान दलजीत का उसके साथ आए कुछ युवकों से झगड़ा भी हुआ, जिसके बाद कुछ युवक वहां से चले गए। बहन का दावा है कि सीसीटीवी फुटेज में दलजीत फोन पर बात करते हुए हाथ में सिरिंज हिलाता दिखाई दे रहा है। इसके बाद वह सिरिंज लेकर बाथरूम में चला गया। काफी देर तक बाहर नहीं आने पर मनदीप सिंह और उसके साथ मौजूद एक अन्य युवक ने दो-तीन बार बाथरूम में जाकर उसे देखा। बाद में दलजीत बेसुध हालत में मिला। उसने बताया कि युवकों ने दलजीत को बाथरूम से बाहर निकाला और होश में लाने की कोशिश की। उसे नींबू पानी भी पिलाया गया। इसके बाद उसे गाड़ी में बैठाकर ले जाने का प्रयास किया, लेकिन बहन के मुताबिक दलजीत ने घर छोड़ने से मना कर दिया था। उसने कहा था कि घर पहुंचने पर परिजन उसे डांटेंगे। इसके बाद उसे चारपाई पर लिटा दिया गया।
मनदीप पहले से नशे का आदी था, परिवार ने घर में लगवाए थे कैमरे
मनदीप की बहन ने बताया कि उसका भाई लंबे समय से नशे का आदी था। परिवार ने उसका तलवंडी साबो स्थित एक नशा मुक्ति केंद्र में इलाज भी करवाया था। करीब छह-सात महीने पहले वह नशा करने के एक मामले में जेल भी जा चुका था। बहन के मुताबिक, जेल से बाहर आने के बाद मनदीप ने दोबारा नशा करना शुरू कर दिया। पहले वह चिट्टा पन्नी पर रखकर सेवन करता था और बाद में इंजेक्शन के जरिए नशा करने लगा। उसकी इस आदत को देखते हुए परिवार ने घर में सीसीटीवी कैमरे लगवा दिए थे।
मनदीप की बहन ने दावा किया कि फुटेज में दलजीत को सिरिंज लेकर बाथरूम में जाते देखा जा सकता है। उसने सवाल उठाया कि यदि उसके भाई और अन्य युवकों ने दलजीत की हत्या की होती तो वे उसे बाथरूम से बाहर निकालकर होश में लाने की कोशिश क्यों करते और नींबू पानी क्यों पिलाते? उसने यह भी दावा किया कि घटना के दौरान गांव भम्मे कलां के तीन अन्य युवक वहां पहुंचे थे। बहन के आरोप के अनुसार, ये युवक दलजीत के साथ हाथापाई करते दिखाई दे रहे हैं और बाद में वहां से चले गए। उसने सवाल उठाया कि यदि फुटेज में इन युवकों की मौजूदगी और मारपीट दिखाई देती है तो पुलिस उनकी भूमिका की जांच क्यों नहीं कर रही।
पुलिस ने DVR और रिकॉर्डिंग से जुड़ा मोबाइल फोन कब्जे में लिया
मनदीप की बहन के अनुसार, घटना के बाद पुलिस ने शुरुआत में घर में लगे सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग नहीं ली थी। बाद में जब परिवार ने दूसरे पक्ष से मुलाकात के दौरान फुटेज का जिक्र किया तो पुलिस उनके घर पहुंची और कैमरों का DVR अपने कब्जे में ले लिया। परिजनों का कहना है कि पुलिस ने उस मोबाइल फोन को भी जब्त किया, जिससे सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग जुड़ी हुई थी। बहन ने पुलिस से पूरे फुटेज की निष्पक्ष जांच करने और उसमें दिखाई देने वाले सभी लोगों की पहचान करने की मांग की है।
दलजीत सिंह का शव 27 अक्टूबर की सुबह मानसा जिले के गांव रामानंदी के पास खेतों में मिला था। पुलिस ने शुरुआती जांच में हत्या की आशंका जताई थी। दलजीत के पिता जरनैल सिंह की शिकायत पर पुलिस ने तीन लोगों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया था। दूसरी ओर, दलजीत के परिवार का आरोप है कि उसकी मौत नशे की ओवरडोज से हुई। उसकी पत्नी परमजीत कौर के मुताबिक, दलजीत पहले नशे का आदी था, लेकिन उसने मौत से करीब तीन सप्ताह पहले नशा छोड़ दिया था। परिवार इलाके में नशा बेचने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग कर रहा है।
शव को लेकर पुलिस और प्रदर्शनकारियों में हुआ था टकराव
दलजीत की मौत के बाद 27 अक्टूबर को परिवार और ग्रामीण शव लेकर मानसा में झोटा के इंसाफ मोर्चे में शामिल होने जा रहे थे। रामदित्तेवाला चौक के पास पुलिस ने उन्हें रोक लिया। इसके बाद पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव हो गया। परिवार ने पुलिस पर लाठीचार्ज करने और शव जबरन कब्जे में लेने के आरोप लगाए थे। वहीं, पुलिस का पक्ष था कि भीड़ ने पुलिसकर्मियों पर हमला किया था। बाद में पुलिस शव को AIIMS बठिंडा ले गई, जहां 28 अक्टूबर को पोस्टमॉर्टम किया गया। इस घटनाक्रम के दौरान पुलिस टीम पर हमले के आरोप में अलग मामला भी दर्ज किया गया था। इसमें हत्या के प्रयास समेत अन्य धाराएं लगाई गई थीं।
दलजीत की बहन अमरजीत कौर ने मामले की जांच को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। इसमें CBI से जांच कराने, PGI चंडीगढ़ के डॉक्टरों के बोर्ड से दोबारा पोस्टमॉर्टम करवाने और परिवार को सुरक्षा देने की मांग की गई थी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि पुलिस ने परिवार की सहमति के बिना शव कब्जे में लिया और प्रदर्शन कर रहे लोगों के खिलाफ बल प्रयोग किया। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार से सवाल किया था कि पुलिस ने शव परिवार से अपने कब्जे में क्यों लिया और ऐसा करने से पुलिस को क्या हासिल हुआ। अदालत ने टिप्पणी की थी कि प्रत्येक मृत व्यक्ति को सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार का अधिकार है। अब आठ दिन बाद दलजीत का अंतिम संस्कार हो गया है, लेकिन उसकी मौत को लेकर हत्या और नशे की ओवरडोज के अलग-अलग दावों के बीच जांच और सीसीटीवी फुटेज की निष्पक्ष पड़ताल अहम बनी हुई है।
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