Parvinder Jhota Case: पंजाब के मानसा में नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले एक्टिविस्ट परविंदर झोटा की हत्या के बाद मामला लगातार गरमाता जा रहा है। उनके पिता भीम सिंह ने अब मानसा के SSP वैभव चौधरी को पद से हटाने की मांग को लेकर भूख हड़ताल शुरू कर दी है। उनका कहना है कि मंत्री गुरमीत खुड्डियां और विधानसभा स्पीकर कुलतार सिंह संधवां के साथ हुई बैठक में SSP को हटाने की मांग पर सहमति बनी थी, लेकिन अब तक इस संबंध में कार्रवाई नहीं हुई है। भीम सिंह ने आरोप लगाया कि अगर पुलिस ने इलाके में नशे के कारोबार के खिलाफ समय रहते सख्त कार्रवाई की होती तो उनके बेटे की हत्या नहीं होती। उन्होंने साफ कहा कि जब तक SSP वैभव चौधरी को नहीं हटाया जाता, तब तक वह अन्न का एक दाना भी नहीं खाएंगे। चाहे इसके लिए उन्हें अपनी जान ही क्यों न गंवानी पड़े। दूसरी तरफ, चंडीगढ़ स्थित PGI में परविंदर झोटा के शव का पोस्टमॉर्टम शुरू हो गया है। गुरुवार रात करीब 12 बजे उनका शव मानसा से चंडीगढ़ लाया गया था। पोस्टमॉर्टम को लेकर अस्पताल में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है, ताकि किसी तरह की अव्यवस्था न हो।
परविंदर झोटा के शव का पोस्टमॉर्टम करने के लिए PGI प्रशासन ने पांच डॉक्टरों की विशेष टीम गठित की है। इसके अलावा चंडीगढ़ सेंट्रल के SDM डॉ. अतुल को ड्यूटी मजिस्ट्रेट नियुक्त किया गया है। वह पूरी प्रक्रिया की निगरानी कर रहे हैं। परिवार की नजर अब पोस्टमॉर्टम पूरा होने और शव मिलने पर टिकी है। भीम सिंह ने कहा कि अगर पोस्टमॉर्टम समय पर पूरा हो जाता है और परिवार को शव मिल जाता है तो अंतिम संस्कार शुक्रवार को ही कर दिया जाएगा। अगर प्रक्रिया में देरी हुई तो अंतिम संस्कार अगले दिन किया जाएगा।
हत्या की जांच में पोस्टमॉर्टम क्यों है अहम?
परविंदर झोटा की मौत के मामले में पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट जांच के लिहाज से बेहद अहम मानी जा रही है। इससे मौत की वास्तविक वजह और गोली लगने से शरीर को हुए नुकसान की चिकित्सकीय जानकारी मिल सकती है। रिपोर्ट से यह भी पता लगाने में मदद मिलेगी कि गोली शरीर के किस हिस्से में लगी और उससे कौन-कौन से महत्वपूर्ण अंग प्रभावित हुए। पोस्टमॉर्टम के दौरान गोली के प्रवेश और निकास के निशानों की जांच की जाती है। शरीर के अंदर गोली का रास्ता, हड्डियों में फ्रैक्चर और अन्य अंदरूनी चोटों की जानकारी भी जुटाई जा सकती है। घाव के आसपास बारूद के कण और जलने के निशान मिलने पर गोली चलने की संभावित दूरी का अनुमान लगाने में मदद मिलती है।
इसके अलावा, अगर गोली या उसका कोई हिस्सा शरीर के अंदर मिलता है तो उसे निकालकर फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा जा सकता है। इससे बरामद गोली और संदिग्ध हथियार के बीच संबंध की जांच में मदद मिल सकती है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट जांच एजेंसियों को वैज्ञानिक और चिकित्सकीय साक्ष्य उपलब्ध कराती है। इन साक्ष्यों की तुलना घटनास्थल से मिले सबूतों और चश्मदीदों के बयानों से की जा सकती है। इससे गोली चलने की दिशा, दूरी और घटना की परिस्थितियों को समझने में मदद मिलेगी। यही रिपोर्ट आगे अदालत में पेश किए जाने वाले साक्ष्यों का भी अहम हिस्सा बन सकती है।
सरकार और परिवार के बीच किन मांगों पर बनी सहमति?
परविंदर झोटा के मामले में सरकार और परिवार के बीच हुई बातचीत के दौरान कई मांगों पर सहमति बनी थी। इसमें परिवार को आर्थिक सहायता, पत्नी को सरकारी नौकरी और झोटा की याद में उनके पैतृक गांव में सुविधाएं विकसित करने जैसे फैसले शामिल हैं। समझौते के मुताबिक, परविंदर झोटा की पत्नी को उनकी योग्यता के आधार पर सरकारी नौकरी दी जाएगी। इसके साथ ही परिवार को 2 करोड़ रुपये का मुआवजा देने पर सहमति बनी है। उनके पिता भीम सिंह और एंटी ड्रग टास्क फोर्स के सदस्यों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने का भी भरोसा दिया गया है। पंजाब में फ्लेक्स फाड़ने को लेकर दर्ज मामलों को भी वापस लेने की बात कही गई है। इसके अलावा मानसा में परविंदर झोटा की प्रतिमा स्थापित की जाएगी। उनके पैतृक गांव ख्याला में उनके नाम पर ट्रॉमा सेंटर बनाने का फैसला भी हुआ है। इसके लिए एक सप्ताह के भीतर मंजूरी देने का भरोसा दिया गया है।
गोलीबारी में घायलों और दवा की बिक्री को लेकर भी फैसले
इस मामले में गोलीबारी के दौरान घायल हुए चार लोगों को पांच-पांच लाख रुपये मुआवजा देने पर सहमति बनी है। सरकार उनके इलाज का पूरा खर्च भी उठाएगी। इसके साथ ही प्रिगाबालिन कैप्सूल की बिक्री और उसके दुरुपयोग पर नियंत्रण के लिए एक सप्ताह के भीतर नोटिफिकेशन जारी करने का भरोसा दिया गया है। लुधियाना में विरोध प्रदर्शन के दौरान जान गंवाने वाले एक युवक के परिवार को भी मुआवजा देने पर सहमति बनी है। वहीं, महिला कार्यकर्ता अरविंदर कौर के साथ कथित दुर्व्यवहार के मामले में विधानसभा स्पीकर कुलतार सिंह संधवां ने माफी मांगी थी। भीम सिंह और उनके अन्य सहयोगियों के खिलाफ दर्ज मामलों को लेकर सरकार ने अदालत में कैंसिलेशन रिपोर्ट दाखिल करने का भरोसा भी दिया है। हालांकि, इन मांगों पर सहमति के बावजूद भीम सिंह की मुख्य मांग SSP वैभव चौधरी को हटाने की है। इसी मांग को लेकर उन्होंने भूख हड़ताल शुरू की है। अब देखना होगा कि सरकार इस मांग पर क्या फैसला लेती है और परिवार को बाकी आश्वासनों पर कब तक कार्रवाई दिखाई देती है।
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