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Pehowa Bhagwat Katha: पिहोवा के श्री गोविंदनंद आश्रम में एक महीने चली श्रीमद्भागवत कथा संपन्न, विशाल भंडारे में उमड़े श्रद्धालु

GGaganpreet Kaur
पिहोवा के श्री गोविंदनंद आश्रम में एक महीने चली श्रीमद्भागवत कथा संपन्न, विशाल भंडारे में उमड़े श्रद्धालु
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पिहोवा (अभिषेक पूर्णिमा ) धर्मनगरी पिहोवा में पिछले एक महीने से चल रहे आध्यात्मिक उत्सव का मंगलवार को श्रद्धा और उल्लास के साथ समापन हो गया। शिवपुरी रोड पर स्थित श्री गोविंदनंद आश्रम ठाकुरद्वारा में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के अंतिम दिन आश्रम परिसर में भक्तों का हुजूम उमड़ पड़ा। पुरुषोत्तम मास के विशेष महत्व को देखते हुए इस दीर्घकालिक कथा का आयोजन किया गया था, जो आधुनिक दौर की व्यस्त जीवनशैली के बीच लोगों को अध्यात्म से जोड़ने का एक बड़ा जरिया बनी।

समापन सत्र के दौरान व्यासपीठ की आरती उतारी गई और मुख्य कथावाचक महंत सर्वेश्वरी गिरी का आभार व्यक्त किया गया। इस पूरे अनुष्ठान के दौरान पिहोवा ही नहीं बल्कि दूर-दराज के इलाकों से भी श्रद्धालु हर रोज कथा का श्रवण करने और ठाकुर जी के विभिन्न प्रसंगों की झांकियों के दर्शन करने पहुंच रहे थे।

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कथा जीवन बदलने का दिव्य ज्ञान: महामंडलेश्वर स्वामी विद्या गिरी

पूर्णाहुति के अवसर पर संगत को आशीर्वाद देते हुए महामंडलेश्वर स्वामी विद्या गिरी महाराज ने बेहद मार्मिक बातें कहीं। उन्होंने कहा कि भागवत कथा को केवल सात दिनों या एक महीने के धार्मिक कर्मकांड के चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए। यह साक्षात भगवान का वांग्मय स्वरूप है, जो मानव जीवन को अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने का मार्ग दिखाता है।

उन्होंने विशेष रूप से पुरुषोत्तम मास की महिमा का बखान करते हुए कहा कि इस महीने में किया गया दान, सत्संग और प्रभु सिमरन कई गुना अधिक फलदायी होता है। महाराज ने उपस्थित जनसमूह से आह्वान किया कि वे कथा पंडाल से केवल यादें लेकर न जाएं, बल्कि यहां से मिली सदाचार, दया और सेवा की शिक्षाओं को अपने व्यावहारिक जीवन का हिस्सा बनाएं।

सामाजिक समरसता की धुरी हैं ऐसे आयोजन: श्रीमहंत बंसी पुरी

वहीं, श्री दक्षिणा काली पीठ के संस्थापक और अखाड़े के श्रीमहंत बंसी पुरी महाराज ने अपने संबोधन में इस बात पर जोर दिया कि आज के दौर में जब समाज बिखर रहा है, तब ऐसे धार्मिक आयोजन लोगों को एक सूत्र में पिरोने का काम करते हैं। उन्होंने कहा कि पूरे एक महीने तक जिस तरह जात-पात और ऊंच-नीच का भेद भूलकर श्रद्धालुओं ने एक साथ बैठकर प्रभु की लीलाओं का आनंद लिया, वही असली सनातन संस्कृति है।

श्रीमहंत बंसी पुरी ने इस महायज्ञ को सफल बनाने के लिए दिन-रात सेवा में जुटे स्वयंसेवकों, यजमानों और पिहोवा की धर्मप्रेमी जनता का खुले दिल से आभार जताया। कथा की समाप्ति के बाद शुरू हुआ भंडारा देर शाम तक चलता रहा, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने कतारबद्ध होकर महाप्रसाद ग्रहण किया।

इस आध्यात्मिक समापन के साक्षी बनने वालों में स्वामी लखन पुरी, स्वामी आशुतोष पुरी, स्वामी राम पुरी समेत मुख्य यजमान रमेश कुमार, सोहन लाल मुंगड़िया, नरेश नोनू शर्मा और राघव शर्मा जैसे इलाके के कई गणमान्य लोग और भारी संख्या में मातृशक्ति उपस्थित रही।

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