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Gayatri Mahayajya Pihowa: पांचवें दिन भी गायत्री महायज्ञ में उमड़ी भक्तों की भारी भीड़; जयकारों से गुंजायमान हुआ पिहोवा

GGaganpreet Kaur
पांचवें दिन भी गायत्री महायज्ञ में उमड़ी भक्तों की भारी भीड़; जयकारों से गुंजायमान हुआ पिहोवा
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पिहोवा(अभिषेक पूर्णिमा) पिहोवा के मॉडल टाउन इलाके में इन दिनों अध्यात्म और भक्ति की अविरल गंगा बह रही है। श्री दक्षिणा काली पीठ धाम में आयोजित हो रहे सात दिवसीय गायत्री महायज्ञ के पांचवें दिन शुक्रवार को श्रद्धा और उल्लास का अद्भुत नजारा देखने को मिला। भीषण गर्मी के बावजूद तड़के से ही श्रद्धालु माता गायत्री के दर्शन और यज्ञ कुंड में आहुति देने के लिए जुटने शुरू हो गए थे। संतों के सानिध्य में चल रहे इस अनुष्ठान ने पूरे शहर के वातावरण को दिव्य बना दिया है। सुबह की मुख्य पूजा के बाद जब महाआरती हुई, तो पूरा परिसर ‘जय माता गायत्री’ और ‘हर-हर महादेव’ के उद्घोष से गूंज उठा।

संतों की वाणी से बरस रहा ज्ञान; श्रद्धालुओं ने साझा किए अनुभव

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महायज्ञ के समानांतर चल रहे सत्संग कार्यक्रम में विभिन्न अखाड़ों और पीठों से आए संत-महात्माओं का जमावड़ा लगा हुआ है। इस मौके पर धार्मिक प्रवचनों, सुमधुर भजनों और विद्वान पंडितों के वैदिक मंत्रोच्चारण ने समां बांध दिया है। यज्ञ में शामिल होने आए स्थानीय श्रद्धालु विपिन काहड़ा, विकल चौबे और सरोज गुप्ता ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा, “ऐसे आयोजन रोज-रोज नहीं होते। गायत्री महायज्ञ की इस पावन भूमि पर कदम रखते ही मन को असीम शांति मिलती है। यह केवल एक धार्मिक कर्मकांड नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक ऊर्जा और नवचेतना का संचार करने का माध्यम है।” आयोजन समिति ने बताया कि इस बार युवाओं की टोली व्यवस्था संभालने से लेकर पूजा में बैठने तक हर मोर्चे पर आगे दिख रही है।

“चित्त शुद्धि और आत्मबल का आधार है गायत्री यज्ञ” — यज्ञाचार्य डॉ. अभिषेक कुश

महायज्ञ के आध्यात्मिक और वैज्ञानिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए मुख्य यज्ञाचार्य डॉ. अभिषेक कुश ने संगत को संबोधित किया। उन्होंने वेदों का हवाला देते हुए कहा, “गायत्री महायज्ञ सनातन संस्कृति का एक अत्यंत दिव्य और लोक-कल्याणकारी अनुष्ठान है। यह केवल व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं, बल्कि समूचे ब्रह्मांड के कल्याण के लिए किया जाता है। इसके प्रभाव से मानव जीवन में आध्यात्मिकता, आत्मबल और चित्तशुद्धि का प्रादुर्भाव होता है।”

उन्होंने आगे कहा कि यज्ञ से निकलने वाला औषधीय धुआं पर्यावरण को भी शुद्ध करता है, जिससे समाज में सुख, शांति और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है। महायज्ञ के पांचवें दिन के समापन पर विशाल भंडारे का भी आयोजन किया गया, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। पीठ प्रबंधन के अनुसार, आगामी दो दिनों में पूर्णाहुति के अवसर पर कई वीआईपी और बड़े संतों के पहुंचने की संभावना है।

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