Police Commemoration Day: छत्तीसगढ़ में पुलिस स्मृति दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने शहीद पुलिस और सुरक्षा बलों के जवानों को नमन किया। बुधवार, 21 अक्टूबर को राजधानी रायपुर के माना स्थित चौथी वाहिनी छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल परिसर में आयोजित पुलिस स्मृति दिवस परेड को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि नक्सलवाद के खिलाफ मिली सफलता जवानों के अदम्य साहस, कर्तव्यनिष्ठा और सर्वोच्च बलिदान का परिणाम है। मुख्यमंत्री ने कहा कि दशकों तक नक्सली हिंसा और भय से प्रभावित रहे बस्तर सहित प्रदेश के दूरस्थ इलाकों में अब शांति, सुरक्षा और विश्वास का वातावरण बनाने के प्रयास आगे बढ़े हैं।
इस बदलाव के पीछे उन जवानों का त्याग है, जिन्होंने प्रदेश और देश की सुरक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। उन्होंने कहा कि अमर शहीदों का बलिदान हमेशा प्रदेश को मार्गदर्शन देता रहेगा और विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के संकल्प को मजबूत करेगा। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने शहीद स्मारक पर पुष्पचक्र अर्पित कर वीर जवानों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने शहीद पुलिस अधिकारियों और जवानों के परिजनों को शाल, श्रीफल और स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि शहीद परिवारों का सम्मान और कल्याण सरकार की जिम्मेदारी है। जवान के साथ उसका पूरा परिवार भी त्याग, धैर्य और साहस के साथ राष्ट्रसेवा में योगदान देता है।
21 अक्टूबर को क्यों मनाया जाता है पुलिस स्मृति दिवस?
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि पुलिस स्मृति दिवस उन जवानों को याद करने का अवसर है, जिन्होंने देश की एकता, अखंडता और नागरिकों की सुरक्षा के लिए अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान दिया। उन्होंने 21 अक्टूबर 1959 को लद्दाख के हॉट स्प्रिंग्स क्षेत्र में चीनी सैनिकों का सामना करते हुए शहीद हुए 10 भारतीय पुलिस जवानों की वीरता को याद किया। उन्हीं की शहादत की स्मृति में हर साल 21 अक्टूबर को पुलिस स्मृति दिवस मनाया जाता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पुलिस और सुरक्षा बल कठिन परिस्थितियों में भी कानून-व्यवस्था बनाए रखने और नागरिकों की सुरक्षा के लिए तत्पर रहते हैं। उनका साहस और समर्पण समाज में शांति तथा सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
उन्होंने कहा कि शहीदों को श्रद्धांजलि देने के साथ उनके आदर्शों और राष्ट्रसेवा की परंपरा को आगे बढ़ाने का संकल्प लेना भी जरूरी है। साय ने शहीद जवानों के परिवारों को भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार हर परिस्थिति में उनके साथ खड़ी है। उन्होंने कहा कि परिजनों ने अपने प्रियजनों के बलिदान को जिस धैर्य और साहस के साथ स्वीकार किया है, वह पूरे समाज के लिए प्रेरणादायी है। प्रदेश अपने शहीदों और उनके परिवारों के योगदान को कभी नहीं भूलेगा।
नक्सल विरोधी अभियानों में 84 नक्सली मारे गए, पुलिस के छह जवान शहीद
पुलिस महानिदेशक अरुण देव गौतम ने पुलिस स्मृति दिवस पर नक्सलवाद के खिलाफ चलाए गए अभियानों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 1 सितंबर 2025 से 31 अगस्त 2026 तक छत्तीसगढ़ पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों की नक्सल विरोधी कार्रवाइयों में 84 नक्सली मारे गए। इसी अवधि में छत्तीसगढ़ पुलिस के छह जवानों ने कर्तव्य निर्वहन के दौरान सर्वोच्च बलिदान दिया। DGP ने कहा कि छत्तीसगढ़ लंबे समय तक माओवादी हिंसा की चुनौती से जूझता रहा है। इस संघर्ष में छत्तीसगढ़ पुलिस, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों और अन्य सुरक्षा बलों ने सामूहिक प्रयासों, साहस और बलिदान के जरिए सशस्त्र नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक सफलता हासिल करने में योगदान दिया है।
उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने भी शहीद जवानों को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि 1 सितंबर 2025 से 31 अगस्त 2026 के बीच नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में छत्तीसगढ़ पुलिस के अनेक जवानों ने वीरगति प्राप्त की। उन्होंने कहा कि जवानों ने कठिन परिस्थितियों में साहस और समर्पण के साथ कर्तव्य निभाया। उनका बलिदान प्रदेश के लिए गौरव और प्रेरणा का स्रोत है। विजय शर्मा ने यह भी कहा कि सुरक्षा बल नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति और सुरक्षा बनाए रखने के साथ सरकारी योजनाओं और विकास का लाभ आम नागरिकों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने शहीद जवानों के परिवारों के त्याग और धैर्य को भी नमन किया।
बस्तर में सड़क, बिजली और स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार पर जोर
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि जिन इलाकों में कभी हिंसा और भय का माहौल था, वहां अब बुनियादी सुविधाओं के विस्तार पर काम हो रहा है। सड़क, बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल और संचार सेवाओं को दूरस्थ गांवों तक पहुंचाने के प्रयास किए जा रहे हैं। इससे लोगों का शासन और लोकतांत्रिक व्यवस्था पर विश्वास मजबूत करने में मदद मिल रही है। उन्होंने बताया कि नियद नेल्लानार योजना, पीएम जनमन और धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के माध्यम से दूरस्थ और वंचित जनजातीय क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार पर जोर दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सुरक्षा और विकास को साथ लेकर चलना जरूरी है, ताकि बस्तर में शांति के साथ रोजगार, शिक्षा और बेहतर जीवन के अवसर भी बढ़ सकें।
साय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में केंद्र तथा राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों को नक्सलवाद के खिलाफ अभियान में महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि अब चुनौती हासिल की गई सुरक्षा उपलब्धियों को स्थायी बनाने और विकास की गति तेज करने की है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार पुलिस और सुरक्षा बलों को आधुनिक तकनीक, संसाधन और बेहतर प्रशिक्षण उपलब्ध कराने के लिए काम कर रही है। जवानों और उनके परिवारों का कल्याण, कानून का शासन तथा जनता की सुरक्षा सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल हैं।
पुलिस स्मृति दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय राजीव स्मृति वन स्थित शहीद वाटिका भी पहुंचे। यहां उन्होंने अमर जवान स्तंभ पर पुष्प अर्पित कर शहीद जवानों को श्रद्धांजलि दी। मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने शहीद जवानों के नामों की पट्टिका पर भी श्रद्धासुमन अर्पित किए। इस दौरान विधायक मोतीलाल साहू, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक विवेकानंद सिन्हा सहित पुलिस और सुरक्षा बलों के वरिष्ठ अधिकारी तथा शहीद जवानों के परिजन मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने कहा कि शहीदों का शौर्य और बलिदान आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्र और समाज की सेवा के लिए प्रेरित करता रहेगा।
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