Political Update: दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के प्रदर्शन को लेकर शनिवार को राजनीतिक टकराव तेज हो गया। प्रदर्शन में शामिल होने के लिए आ रहे लोगों को पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने और सुरक्षा के लिए मेट्रो स्टेशन बंद रखने के फैसले पर आम आदमी पार्टी (AAP) ने केंद्र सरकार को घेरा है। पार्टी ने भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर देश में ‘काला आपातकाल’ लगाने का आरोप लगाया। AAP नेताओं का कहना है कि प्रदर्शनकारी शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखना चाहते हैं, लेकिन राजधानी में बड़े पैमाने पर सुरक्षा बलों की तैनाती और आवाजाही पर प्रतिबंधों से डर का माहौल बन रहा है। कॉजपा ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और कथित ‘वोट चोरी’ के विरोध में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का कार्यक्रम तय किया था। इसी प्रदर्शन के मद्देनजर दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई और मेट्रो के 45 स्टेशन अस्थायी रूप से बंद रखे गए। इन फैसलों को लेकर विपक्षी दलों ने सवाल उठाए हैं।
AAP विधायक गोपाल राय ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने के बजाय सरकार ने देश में ‘काला आपातकाल’ जैसी स्थिति पैदा कर दी है। राय के मुताबिक, प्रदर्शन के मद्देनजर दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था इतनी सख्त कर दी गई कि राजधानी छावनी जैसी नजर आने लगी। गोपाल राय ने पत्रकारों से कहा, “मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने के बजाय केंद्र सरकार ने देश में काला आपातकाल लगा दिया है। आज कुमार को बचाने के लिए आपने दिल्ली को छावनी में बदल दिया है। लेकिन याद रखिए, आप चाहे जितनी भी ताकत लगा लें, इस आंदोलन को दबाया नहीं जा सकेगा।” राय ने यह भी आरोप लगाया कि एक व्यक्ति की सुरक्षा के लिए मेट्रो स्टेशन बंद किए गए और ट्रेनें रद्द की गईं। यह AAP का राजनीतिक आरोप है। सुरक्षा प्रतिबंधों को लेकर सरकार और संबंधित एजेंसियों का पक्ष सामने आने पर पूरे मामले की स्थिति अधिक स्पष्ट होगी। दिल्ली में CJP प्रदर्शन से पहले 600 समर्थक हिरासत में, सड़कों पर कीलें; ध्रुव राठी को घर से ले गई पुलिस
सौरभ भारद्वाज बोले- ताकत से युवाओं को चुप नहीं करा सकते
AAP की दिल्ली इकाई के अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने भी पुलिस कार्रवाई और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए। एक वीडियो संदेश में उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारी केवल शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखना चाहते हैं। उनके मुताबिक, बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मियों की तैनाती से युवाओं के बीच डर का माहौल बनता है। भारद्वाज ने कहा, “आप ताकत के दम पर ‘जेन-जी’ को चुप नहीं करा सकते। ये हमारे युवा हैं। इनसे बात कीजिए और इन्हें साथ लेकर चलिए।” उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार अपनी कार्रवाई के जरिए यह दिखाना चाहती है कि लोग डरे हुए हैं। भारद्वाज ने कहा कि उनकी पार्टी डरने वाली नहीं है और वह अहिंसा तथा भारतीय संविधान में विश्वास करती है। AAP नेताओं के इन बयानों से स्पष्ट है कि पार्टी ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने और राजधानी में लगाए गए प्रतिबंधों को लोकतांत्रिक अधिकारों से जोड़कर मुद्दा बनाया है। हालांकि, पुलिस की कार्रवाई और सुरक्षा प्रबंधों को लेकर संबंधित अधिकारियों का पक्ष भी इस विवाद को समझने के लिए अहम है।
प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली मेट्रो ने सुरक्षा कारणों से शुक्रवार रात 9 बजे से शनिवार शाम 6 बजे तक 45 स्टेशन बंद रखे। इस फैसले का असर उन यात्रियों पर भी पड़ा, जो प्रदर्शन से जुड़े नहीं थे और रोजाना काम, पढ़ाई या अन्य जरूरी कामों के लिए मेट्रो का इस्तेमाल करते हैं। मेट्रो स्टेशन बंद रहने से यात्रियों को वैकल्पिक रास्तों और परिवहन साधनों का सहारा लेना पड़ सकता है। दिल्ली जैसे शहर में मेट्रो लाखों लोगों की रोजाना आवाजाही का अहम माध्यम है, इसलिए सुरक्षा प्रतिबंधों का असर आम नागरिकों तक पहुंचता है। AAP ने इसी मुद्दे को उठाते हुए सवाल किया कि प्रदर्शन को नियंत्रित करने के लिए इतने व्यापक प्रतिबंध क्यों लगाए गए। हालांकि, मेट्रो स्टेशन बंद रखने का फैसला सुरक्षा संबंधी परामर्श के तहत लिया गया था। उपलब्ध जानकारी में सभी स्टेशनों के नाम और प्रत्येक स्टेशन को बंद रखने के अलग-अलग कारणों का विस्तृत ब्योरा नहीं दिया गया है।
केजरीवाल ने परिवार के साथ प्रदर्शन में शामिल होने की बात कही थी
AAP के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने शुक्रवार को कहा था कि वह अपने परिवार के साथ कॉजपा के प्रदर्शन में शामिल होंगे। उन्होंने युवाओं से भी प्रदर्शन में हिस्सा लेने की अपील की थी। इसके बाद शनिवार को AAP नेताओं ने पुलिस कार्रवाई और सुरक्षा प्रतिबंधों को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। कॉजपा ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए आरोप लगाया है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के जरिए ‘वोट चोरी’ की जा रही है। यह संगठन का आरोप है। चुनावी प्रक्रिया से जुड़े इन दावों की पुष्टि के लिए संबंधित दस्तावेजों और निर्वाचन आयोग के आधिकारिक पक्ष को देखना जरूरी है।
फिलहाल, जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था और राजनीतिक बयानबाजी दोनों तेज हैं। एक तरफ पुलिस सुरक्षा बनाए रखने के लिए प्रतिबंध लगा रही है, वहीं AAP और कॉजपा जैसे राजनीतिक समूह इन कदमों पर सवाल उठा रहे हैं। इस विवाद के बीच आम लोगों के लिए परिवहन सेवाओं की स्थिति और सार्वजनिक रास्तों से जुड़ी आधिकारिक सूचनाओं पर नजर रखना जरूरी है।

