September 29, 2026

Rewari : एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक जीतकर वतन लौटे निशानेबाज कमलजीत, 2019 के भीषण हादसे में पैर टूटने के बाद भी नहीं हारी हिम्मत, एयरपोर्ट पर हुआ जोरदार स्वागत

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Rewari : एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक जीतकर वतन लौटे निशानेबाज कमलजीत, 2019 के भीषण हादसे में पैर टूटने के बाद भी नहीं हारी हिम्मत, एयरपोर्ट पर हुआ जोरदार स्वागत

Rewari : एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक जीतकर वतन लौटे निशानेबाज कमलजीत, 2019 के भीषण हादसे में पैर टूटने के बाद भी नहीं हारी हिम्मत, एयरपोर्ट पर हुआ जोरदार स्वागत

Rewari : एशियन गेम्स में अपनी अचूक निशानेबाजी से देश के लिए स्वर्ण पदक (Gold Medal) जीतकर तिरंगे का मान बढ़ाने वाले प्रतिभावान शूटर कमलजीत रविवार को स्वदेश लौट आए। एयरपोर्ट पर पहुंचते ही उनके समर्थकों, परिजनों और खेल प्रेमियों ने उनका गर्मजोशी से भव्य स्वागत किया।

 

कमलजीत की यह सफलता केवल एक पदक भर नहीं है, बल्कि यह उस अटूट संघर्ष, अदम्य साहस और जिजीविषा की कहानी है, जिसने वर्ष 2019 के एक भयंकर हादसे को मात देकर फर्श से अर्श तक का सफर तय किया है।

 

 

हादसे ने तोड़ा था एथलीट बनने का सपना

मूल रूप से महेंद्रगढ़ जिले के गांव सुलखा के रहने वाले कमलजीत का शुरुआती सपना एक बेहतरीन एथलीट बनने का था। लेकिन वर्ष 2019 में जब वह रेवाड़ी कोचिंग के लिए जा रहे थे, तब रास्ते में उनके टैंपो का भीषण एक्सीडेंट हो गया। इस दर्दनाक हादसे में दो लोगों की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि कमलजीत का पैर बुरी तरह टूट गया था। इस गंभीर चोट के कारण उनका एथलेटिक्स का करियर अधर में लटक गया।

 

हालांकि, इस आपदा के बीच उनके चाचा शक्ति पाल ने उन्हें निशानेबाजी (Shooting) की दुनिया में कदम रखने के लिए प्रेरित किया। खेल भले ही बदला, लेकिन कमलजीत के आगे बढ़ने का जज्बा कम नहीं हुआ। गंभीर चोट के चलते बिस्तर पर लेटे रहने के बावजूद उन्होंने मानसिक रूप से अभ्यास जारी रखा और हादसे के महज 20 दिन बाद ही ट्रायल में सफल होकर अपनी नई यात्रा शुरू की।

 

आर्थिक तंगी और कर्ज के बीच संघर्ष

कमलजीत का यह सफर कतई आसान नहीं था। एक मध्यमवर्गीय परिवार से ताल्लुक रखने वाले कमलजीत के पिता रतीराम एक निजी फैक्ट्री में नौकरी करते हैं और परिवार के पास केवल पांच एकड़ कृषि योग्य भूमि है। निशानेबाजी एक बेहद महंगा खेल है, जिसमें उच्च कोटि के उपकरण, निरंतर प्रशिक्षण, डाइट और विदेशी यात्राओं का भारी खर्च होता है।

 

हादसे के बाद इलाज और खेल की जरूरतों को पूरा करने के लिए परिवार पर भारी आर्थिक दबाव आ गया। हालात यहां तक पहुंच गए कि परिवार को कर्ज लेना पड़ा और अपनी छोटी-छोटी बचत भी बेटे के सपनों की भेंट चढ़ानी पड़ी। एक समय ऐसा भी आया जब आर्थिक तंगी के दबाव में आकर कमलजीत ने खुद शूटिंग छोड़ने का मन बना लिया था, लेकिन माता-पिता और उनके कोच के अटूट समर्थन ने उन्हें पीछे हटने नहीं दिया।

 

जूनियर से लेकर एशियन गोल्ड तक का सफर

कड़े संघर्ष और दिन-रात की मेहनत के दम पर कमलजीत ने साल 2023 में जूनियर विश्व चैंपियनशिप और जूनियर विश्व कप में पदक जीतकर राष्ट्रीय सीनियर टीम तक अपनी पहुंच बनाई।

 

एशियन गेम्स में उन्हें मिश्रित टीम स्पर्धा के लिए अंतिम समय में मौका मिला, जिसे उन्होंने दोनों हाथों से लपका। कमलजीत ने अपनी साथी शूटर सुरुचि सिंह के साथ मिलकर 10 मीटर एयर पिस्टल मिश्रित टीम स्पर्धा में शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक पर कब्जा जमाया और साथ ही नया एशियन गेम्स रिकॉर्ड भी स्थापित कर दिया।

 

मां बनाएंगी चूरमा और गोंद के लड्डू

बेटे की इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर गांव सुलखा स्थित उनके पैतृक घर में खुशियों का सैलाब उमड़ पड़ा। मां राजबाला अपने लाल के भारत लौटने का बेसब्री से इंतजार कर रही थीं।

 

उन्होंने गर्व से कहा कि उनके बेटे को चूरमा बेहद पसंद है और वह उसकी घर वापसी पर उसके लिए विशेष रूप से चूरमा और गोंद के पौष्टिक लड्डू तैयार करेंगी। पिता रतीराम और परिवार के अन्य सदस्यों ने भी इस सफलता को पूरे देश और क्षेत्र के लिए गर्व का क्षण बताया है।

 

 

यह भी देखें – रेवाड़ी के बावल में दर्दनाक सड़क हादसा, पानी भरे गड्ढे से बचाने के फेर में कार ने बाइक सवार किशोर को कुचला, मौत के बाद ड्राइवर फरार

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