RSS Shastra Pujan: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने विजयादशमी के अवसर पर नागपुर स्थित संघ मुख्यालय में शस्त्र पूजन किया। इसके बाद उन्होंने संघ के वार्षिक विजयादशमी उत्सव को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के दुरुपयोग, सामाजिक एकता, सांस्कृतिक विविधता और देश के विकास से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात रखी। भागवत ने कहा कि तकनीक को रोका नहीं जा सकता, लेकिन उसका इस्तेमाल किस तरह किया जा रहा है, यह ज्यादा महत्वपूर्ण है।
AI जैसी तकनीकों के आने से गलत वीडियो बनाने और उनका इस्तेमाल करने जैसी चुनौतियां सामने आ रही हैं। ऐसे में तकनीक के उपयोग को लेकर समझ और विवेक जरूरी है। OTT प्लेटफॉर्म के लिए भी नियमों की आवश्यकता पर जोर दिया गया। उन्होंने कहा कि तकनीक और ज्ञान अपने आप में साधन हैं। इनका परिणाम इस बात पर निर्भर करता है कि इनका उपयोग किस उद्देश्य से और किस तरीके से किया जाता है। बिना सही-गलत का विचार किए किसी तकनीक या जानकारी का इस्तेमाल करने से गलत नतीजे सामने आ सकते हैं।
भागवत बोले- समाज को बांटने के बजाय आपसी विश्वास बढ़ाएं
संघ प्रमुख ने कहा कि समाज में पहले से मौजूद संघर्षों के कारण लोगों के मन में कई तरह की गांठें बन गई हैं। इन्हें सुलझाने और नई गांठें बनने से रोकने के लिए व्यवहार में बदलाव जरूरी है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग छोटी-छोटी बातों पर विवाद बढ़ाने की कोशिश करते हैं। ऐसे में समाज को सावधान रहना चाहिए और आपसी प्रेम तथा विश्वास बनाए रखना चाहिए। भागवत ने कहा कि संघ अपने लिए लोकप्रियता या प्रतिष्ठा नहीं चाहता। उसका उद्देश्य समाज का भला करना है। उन्होंने देश की विविधता का सम्मान करने और भाषा, पंथ तथा रीति-रिवाजों के अंतर के बावजूद आपसी एकता बनाए रखने की जरूरत बताई।
उन्होंने कहा कि भारत के लोगों के पूर्वज और सांस्कृतिक मूल एक हैं। किसी की छोटी पहचान को मिटाए बिना सभी को साथ लेकर चलने की क्षमता विकसित करनी चाहिए। विविधता का सम्मान करते हुए समय के साथ बदलाव अपनाना भी जरूरी है। भागवत के मुताबिक, लचीलापन भारतीय परंपरा की विशेषता है और इसे वर्तमान परिस्थितियों के अनुसार आगे बढ़ाना चाहिए। भागवत ने यह भी कहा कि हिंदू दृष्टि किसी एक तरह की पूजा को अनिवार्य नहीं मानती। उनके अनुसार, पूजा करने या न करने और पूजा के तरीके के आधार पर किसी व्यक्ति को देखने के बजाय व्यापक मानवीय दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।
विकास के साथ पर्यावरण और नैतिकता का संतुलन जरूरी
मोहन भागवत ने विकास की दिशा पर बात करते हुए कहा कि ऐसा विकास नहीं होना चाहिए, जिसमें विकास करने वाले लोगों का ही नुकसान हो जाए। उन्होंने नेपाल में हुई घटनाओं का संदर्भ देते हुए कहा कि हिमालयी क्षेत्र में विकास गतिविधियों और प्रकृति के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है। तकनीक और अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाते समय पर्यावरण तथा नैतिकता को भी ध्यान में रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि दुनिया के सामने विकास और पर्यावरण को साथ लेकर चलने तथा अलग-अलग विचारों और समुदायों के बीच सामंजस्य स्थापित करने की चुनौती है। भारत के पास इन समस्याओं के समाधान देने की क्षमता है, लेकिन इसके लिए नई पीढ़ी को तैयार करना होगा।
भागवत ने कहा कि पहले बच्चों को आचरण की सीख परिवार, पड़ोस, किताबों और समाज से मिलती थी, लेकिन यह व्यवस्था धीरे-धीरे कमजोर हो रही है। उन्होंने नशे के दुष्परिणामों का उदाहरण देते हुए कहा कि केवल जानकारी देना पर्याप्त नहीं है। लोगों में सही और गलत के बीच अंतर समझने का विवेक भी विकसित करना होगा। उन्होंने नई पीढ़ी से देश के प्रति जिम्मेदारी निभाने का आह्वान किया। भागवत के अनुसार, भारत को विश्वगुरु बनाने की बात तभी सार्थक होगी, जब युवा ज्ञान, तकनीक और संस्कारों के साथ आगे बढ़ेंगे।
भागवत बोले- आजादी के समय से ज्यादा तप करने की जरूरत
भागवत ने कहा कि देश के लोग विभाजित होकर कमजोर हुए और उन्हें लंबे समय तक गुलामी झेलनी पड़ी। स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान और तपस्या के बाद देश को आजादी मिली। उन्होंने कहा कि आज देश को उस समय से भी ज्यादा तप और प्रयास करने की जरूरत है। उन्होंने पश्चिम से आने वाले सांस्कृतिक प्रभावों का उल्लेख करते हुए कहा कि केवल सरकार या व्यवस्था बदल देने से सभी समस्याओं का समाधान नहीं होता। भागवत ने फ्रांस, नेपाल और बांग्लादेश की परिस्थितियों का संदर्भ देते हुए कहा कि स्थायी बदलाव के लिए समाज की भूमिका और उसकी दिशा भी मायने रखती है। उन्होंने कहा कि देश को आगे बढ़ाने के लिए नेतृत्व के साथ समाज और नई पीढ़ी का योगदान जरूरी है। लोगों को आपसी मतभेदों से ऊपर उठकर देश और समाज के हित में काम करना चाहिए।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ हर साल विजयादशमी पर अपना स्थापना दिवस मनाता है। संघ की स्थापना 1925 में हुई थी। वर्ष 2026 में संघ अपने 101वें स्थापना वर्ष के अवसर पर कार्यक्रम आयोजित कर रहा है। नागपुर में आयोजित समारोह में पत्रकार और संपादक संजय गुप्ता मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ अपनी पत्नी डॉ. सुदेश धनखड़ के साथ कार्यक्रम में पहुंचे। इजराइल के कॉन्सुल जनरल यानिव रेवाच को भी आमंत्रित किया गया। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी भी कार्यक्रम में मौजूद रहे। भागवत ने अपने संबोधन में सामाजिक एकता, सांस्कृतिक मूल्यों, तकनीक के जिम्मेदार इस्तेमाल और पर्यावरण के अनुकूल विकास को देश के भविष्य के लिए जरूरी बताया। पंचकूला में बनेगा 221 फीट ऊंचा रावण, दो साल बाद शालीमार ग्राउंड में लौटेगी ट्राईसिटी के सबसे बड़े दशहरा महोत्सव की रौनक

