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Ladwa News: लाडवा के संजय गांधी मेमोरियल स्कूल में लगी छबील

AAmandeep Singh
Ladwa News: लाडवा के संजय गांधी मेमोरियल स्कूल में लगी छबील
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लाडवा। (कैलाश गोयल): धनौरा-लाडवा स्थित संजय गांधी मेमोरियल सीनियर सेकेंडरी पब्लिक स्कूल में आज का दिन परंपरा, सेवा और आत्मीयता के नाम रहा। स्कूल परिसर ने आज एक ही दिन में दो बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील आयोजनों की मेजबानी की। सुबह की शुरुआत जहां तपती कौंध और रिकॉर्ड तोड़ गर्मी के बीच मानवता की सेवा से हुई, वहीं दोपहर ढलते-ढलते स्कूल के सभागार में एक गुरु के सम्मान और विदाई की भावुक रस्म अदा की गई। दोनों ही कार्यक्रमों ने समाज में सेवा भाव और गुरु-शिष्य परंपरा की एक सुंदर मिसाल पेश की।

चिलचिलाती धूप में राहगीरों को मिला ‘अमृत रस’, प्रबंधन ने खुद संभाली सेवा की कमान

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मई के महीने में आसमान से बरसती आग और गर्म थपेड़ों को देखते हुए स्कूल प्रशासन ने सुबह साढ़े 10 बजे मुख्य गेट के ठीक बाहर राहगीरों के लिए ठंडे और मीठे पानी की छबील लगाई। इस पुण्य कार्य की शुरुआत स्कूल प्रबंधन समिति के प्रधान पवन गर्ग, सचिव रविंद्र बंसल, वरिष्ठ अधिवक्ता एवं सम्मानित सदस्य वीरेंद्र गर्ग और प्रधानाचार्य नरेंद्र शर्मा ने खुद अपने हाथों से राहगीरों को जल पिलाकर की। इसके बाद स्कूल के पूरे स्टाफ ने मोर्चा संभाला और वहां से गुजरने वाले ऑटो चालकों, साइकिल सवारों, पैदल यात्रियों और आम जनता को रोक-रोक कर श्रद्धा के साथ मीठा पानी पिलाया। प्यास से बेहाल लोगों के चेहरों पर पानी पीकर जो संतुष्टि दिखी, उसने इस सेवा कार्य को सार्थक बना दिया।

विदाई की बेला: याद किया गया सुनीता अरोड़ा का 22 वर्षों का बेदाग सफर

दोपहर ठीक 12:30 बजे स्कूल का माहौल सेवा के उल्लास से बदलकर थोड़ा संजीदा और आत्मीय हो गया। अवसर था हिंदी विभाग की वरिष्ठ अध्यापिका सुनीता अरोड़ा का विदाई समारोह। श्रीमती अरोड़ा ने इस संस्थान को अपने जीवन के बेशकीमती 22 साल दिए हैं। विदाई की इस घड़ी में स्कूल के प्रधान पवन गर्ग, रविंद्र बंसल, वीरेंद्र गर्ग और प्रधानाचार्य नरेंद्र शर्मा ने उन्हें पुष्पगुच्छ भेंट किए और शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया। प्रधान पवन गर्ग ने उनके दीर्घ और बेदाग कार्यकाल की जमकर तारीफ की, तो वहीं प्रिंसिपल ने सुनीता अरोड़ा के योगदान को स्कूल के इतिहास में कभी न भूलने वाला अध्याय बताया।

यादों के गलियारे में भीगीं आंखें, जलपान के साथ नए सफर की शुभकामनाएं

जब सहकर्मी शिक्षकों ने मंच संभाला, तो पुरानी यादें ताजा हो उठीं। अध्यापकों ने सुनीता जी के धैर्य, अनुशासन और स्कूल के बच्चों व स्टाफ के प्रति उनके मातृत्व भाव (मां जैसे स्नेह) की खुलकर सराहना की। स्कूल परिवार की तरफ से उन्हें कई खूबसूरत उपहार और स्मृति चिह्न भेंट किए गए। सम्मान और अपनों का इतना प्यार पाकर सुनीता अरोड़ा की आंखें भर आईं और उन्होंने बेहद भावुक आवाज में पूरे स्कूल प्रशासन और सहयोगियों का आभार जताया। कार्यक्रम का समापन सामूहिक जलपान के साथ हुआ। भले ही विदाई की इस बेला में पूरा स्कूल स्टाफ भावुक था, लेकिन सभी ने मुस्कुराते हुए सुनीता अरोड़ा को उनके जीवन की इस नई दूसरी पारी और अच्छे स्वास्थ्य के लिए ढेरों मंगलकामनाएं देकर विदा किया।

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