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Second Marriage Advice: दूसरी शादी करने जा रहे हैं तो सावधान! यह एक आदत मिनटों में तोड़ सकती है आपका नया रिश्ता

Second Marriage Advice: दूसरी शादी करने जा रहे हैं तो सावधान! यह एक आदत मिनटों में तोड़ सकती है आपका नया रिश्ता

दूसरी शादी करने जा रहे हैं तो सावधान

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GGaganpreet Kaur

Second Marriage Advice: कहते हैं कि जिंदगी कभी रुकती नहीं, वह हमेशा आगे बढ़ने का नाम है। शादी और तलाक के दौर से गुजरने के बाद जब कोई शख्स दोबारा अपना घर बसाने का फैसला करता है, तो उसके मन में ढेरों उम्मीदें, सपने और एक नया सवेरा देखने की चाह होती है। दूसरी शादी को अमूमन लोग एक ‘सेकंड चांस’ यानी सुधरने और संभलने के मौके की तरह देखते हैं। लेकिन, मनोवैज्ञानिकों और रिलेशनशिप एक्सपर्ट्स की मानें तो यह नया सफर जितना खूबसूरत दिखता है, उतना ही संवेदनशील भी होता है। इस रिश्ते में अक्सर लोग अनजाने में एक ऐसी बड़ी गलती कर बैठते हैं, जो धीरे-धीरे हंसते-खेलते घर को दोबारा बर्बादी की कगार पर ले आती है। वह आदत है—अपने नए पार्टनर की तुलना लगातार पुराने जीवनसाथी से करना।

क्यों नए रिश्ते के लिए साइलेंट किलर बन जाती है ‘तुलना’?

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मानव स्वभाव है कि वह परिस्थितियों की तुलना करता है, लेकिन वैवाहिक जीवन में, खासकर दूसरी शादी में, यह आदत किसी ‘साइलेंट किलर’ से कम नहीं है। कई बार यह तुलना इंसान के अपने जेहन के भीतर चलती है, तो कई बार तल्खी या अनबन के दौरान यह जुबान पर आ जाती है। एक्सपर्ट्स कहते हैं कि दुनिया में कोई भी दो इंसान एक जैसे नहीं हो सकते; हर व्यक्ति का मिजाज, उसकी परवरिश, सोचने का तरीका और प्यार जताने का अंदाज जुदा होता है। जब आप अपने नए साथी के सामने बार-बार अतीत का जिक्र करते हैं या उसकी कमियों-खूबियों को पुराने पार्टनर के तराजू पर तौलते हैं, तो सामने वाले के आत्मसम्मान को गहरी ठेस पहुंचती है। उसे लगने लगता है कि वह इस रिश्ते में महज एक रिप्लेसमेंट (विकल्प) बनकर रह गया है।

अतीत की खिड़की से वर्तमान को देखना बंद करें

यह सच है कि पहली शादी के अनुभव—चाहे वे अच्छे रहे हों या बुरे—इंसान को परिपक्व बनाते हैं। लेकिन बुद्धिमानी इसी में है कि उन अनुभवों से सिर्फ सबक लिया जाए, उन्हें आज के फैसलों पर हावी न होने दिया जाए। अगर आप हर छोटी बात या बहस को पुराने चश्मे से देखेंगे, तो नए रिश्ते को कभी खुलकर सांस लेने का मौका ही नहीं मिलेगा। हर नए रिश्ते की अपनी एक रफ़्तार होती है, उसकी अपनी एक अलग केमिस्ट्री होती है। उसे वक्त दीजिए ताकि वह अपनी जमीन खुद तैयार कर सके, न कि पुरानी नींव पर खड़ी होने की कोशिश करे।

विश्वास का गणित: न जल्दबाजी, न हद से ज्यादा दूरी

अक्सर देखा गया है कि पहली शादी में धोखा या कड़वाहट झेल चुके लोग दूसरी शादी में कदम तो रख लेते हैं, लेकिन उनका मन शंकाओं से घिरा रहता है। वे नए पार्टनर पर आसानी से भरोसा नहीं कर पाते, जिससे रिश्ते में एक अदृश्य दीवार खड़ी हो जाती है। इसके विपरीत, कुछ लोग अकेलेपन से इस कदर घबराए होते हैं कि वे नए साथी से तुरंत ही बहुत ज्यादा उम्मीदें लगा बैठते हैं। एक्सपर्ट्स की सलाह है कि विश्वास रातों-रात पैदा नहीं होता, यह समय की मांग करता है। अपने पार्टनर को समझने, उसकी आदतों को अपनाने और रिश्ते की जड़ों को मजबूत होने के लिए पर्याप्त समय देना बेहद जरूरी है।

वर्तमान की हकीकत को गले लगाना ही एकमात्र रास्ता

बदलाव सिर्फ जीवनसाथी बदलने से नहीं आता, बल्कि अपनी सोच को नया मोड़ देने से आता है। दूसरी शादी की कामयाबी गुजरी हुई बातों के पोस्टमार्टम पर नहीं, बल्कि आने वाले कल के निर्माण पर टिकी होती है। आप अपने नए रिश्ते को कितना सम्मान देते हैं, एक-दूसरे की कमियों को कितनी सहजता से स्वीकार करते हैं और अतीत के पन्नों को पलटकर देखने की आदत को कितना नियंत्रित रख पाते हैं, यही बातें तय करती हैं कि आपका यह दूसरा दांव कितना कामयाब रहेगा।

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