Surya Movie Controversy: बॉलीवुड के ‘एक्शन हीरो’ सनी देओल की आने वाली बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘सूर्या: अंत से आरंभ तक’ सिनेमाघरों में दस्तक देने से पहले ही कानूनी विवादों के घेरे में आ गई है। फिल्म के हाल ही में रिलीज हुए ट्रेलर को लेकर देश के डॉक्टरों का एक वर्ग खुलकर विरोध में उतर आया है। मेडिकल प्रोफेशनल्स ने फिल्म में डॉक्टरों और चिकित्सा कर्मियों के साथ हिंसा और दुर्व्यवहार के दृश्यों को दिखाए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई है। इसी कड़ी में फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने की मांग को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया था, जहां अदालत ने बुधवार को इस मामले पर सुनवाई से साफ इनकार कर दिया।
हाईकोर्ट की दो सदस्यीय बेंच ने कहा- एक ही मुद्दे पर अलग सुनवाई की जरूरत नहीं
दिल्ली हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य जस्टिस नितिन वासुदेव सांब्रे और जस्टिस संजय शर्मा की खंडपीठ के सामने जब यह जनहित याचिका (PIL) आई, तो अदालत ने स्पष्ट किया कि इसी विवाद से जुड़ी एक अन्य याचिका पहले से ही हाईकोर्ट के सिंगल जज के समक्ष विचाराधीन है। बेंच ने दो टूक कहा कि एक ही विषय पर अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई करने का कोई औचित्य नहीं बनता है। अदालत ने जानकारी दी कि पूर्व में लंबित याचिका पर आगामी 16 नवंबर को सुनवाई होनी है। इसके साथ ही कोर्ट ने याचिकाकर्ता डॉक्टरों को उस मामले में पक्षकार बनने और संबंधित प्राधिकरणों के समक्ष अपना पक्ष मजबूती से रखने की पूरी छूट दे दी है।
‘हेल्थ सेक्टर को भ्रष्ट और डॉक्टरों के खिलाफ हिंसा को बढ़ावा दे रही फिल्म’
डॉक्टर नचिकेता भाटिया और डॉक्टर ध्रुव चौहान की तरफ से दायर इस जनहित याचिका में मुख्य आरोप यह लगाया गया है कि फिल्म के ट्रेलर में मेडिकल स्टाफ के साथ मारपीट के दृश्यों को इस तरह पेश किया गया है, मानो यह जायज हो। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि इससे समाज में डॉक्टरों और पूरे स्वास्थ्य तंत्र के प्रति नकारात्मकता फैलेगी, जिससे आम लोगों के मन में उनके प्रति गुस्सा भड़क सकता है और अस्पतालों में डॉक्टरों के खिलाफ होने वाली हिंसा को बढ़ावा मिल सकता है।
याचिका में सिनेमैटोग्राफ एक्ट 1952 की धारा 5B का हवाला देते हुए फिल्म के कुछ विवादित सीन्स और डायलॉग्स पर कड़ी आपत्ति जताई गई थी। डॉक्टरों ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के साथ-साथ केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) से मांग की थी कि वे इन आपत्तिजनक हिस्सों की गहराई से जांच करें और जब तक इनमें सुधार नहीं होता, तब तक फिल्म की रिलीज पर रोक लगाई जाए। वहीं, सेंसर बोर्ड की ओर से अदालत को यह स्पष्ट किया गया कि फिल्म को अभी तक आधिकारिक तौर पर सर्टिफिकेट नहीं दिया गया है और इसकी सर्टिफिकेशन प्रक्रिया अभी पाइपलाइन में है। बहरहाल, अदालत के इस रुख के बाद अब इस पूरे विवाद की अगली और अहम कड़ी 16 नवंबर को होने वाली सुनवाई पर टिक गई है।
यह भी पढ़ें– सलमान खान ने सुबह 5 बजे दिया फैंस को सरप्राइज, फिल्म ‘मातृभूमि’ का नया गाना ‘तेरी सेक्सी ब्यूटी’ रिलीज


