Warren Buffett:जब कभी दुनिया के सबसे सफल और चतुर निवेशकों का जिक्र होता है, तो सबसे पहला नाम वॉरेन बफेट का आता है। ‘ओरेकल ऑफ ओमाहा’ के नाम से मशहूर 95 वर्षीय बफेट करीब 13.3 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति के मालिक हैं और दिग्गज निवेश फर्म बर्कशायर हैथवे के चेयरमैन हैं।
शेयर बाजार की चाल समझने में माहिर बफेट अपनी शानदार रणनीतियों के लिए तो जाने ही जाते हैं, लेकिन इन दिनों वह अपनी एक बेहद अनोखी और चौंकाने वाली निजी आदत को लेकर सुर्खियों में हैं। कहा जाता है कि दुनिया के इस दिग्गज निवेशक ने बीते 48 सालों से एक बूंद भी सादा पानी नहीं पिया है। पानी के विकल्प के रूप में उनकी पसंद कोका-कोला है, जिसके वह इस कदर दीवाने हैं कि उसी से अपनी प्यास बुझाते हैं।
बिल एकमैन के घर डिनर पर खुला था राज
वॉरेन बफेट की इस अजीब आदत का खुलासा किसी और ने नहीं, बल्कि जाने-माने हेज फंड मैनेजर बिल एकमैन ने एक पॉडकास्ट के दौरान किया था। एकमैन ने बताया कि उन्होंने एक बार बफेट को अपने घर पर डिनर के लिए आमंत्रित किया था। उस दौरान जब उन्होंने बफेट को सादा पानी या सोडा वाटर ऑफर किया, तो उन्होंने तुरंत इनकार कर दिया।
बफेट ने मजाकिया लेकिन हैरान करने वाले अंदाज में कहा, “बिल, मैंने पिछले 48 सालों से पानी नहीं पिया है।” शुरुआत में लोगों को लगा कि शायद यह कोई मज़ाक होगा, लेकिन बाद में खुद बफेट की बेटी सूजी बफेट ने भी एक डॉक्यूमेंट्री में इस बात की पुष्टि की कि उनके पिता लंबे समय से पानी से दूर हैं।
रोज पी जाते हैं 5 कैन कोका-कोला, शरीर को लेकर करते हैं मजाक
अगर बफेट सादा पानी नहीं पीते, तो फिर उनका शरीर कैसे हाइड्रेट रहता है? रिपोर्ट्स बताती हैं कि उन्हें कोका-कोला, खासकर ‘चेरी कोक’ पीना बेहद पसंद है। वह दिनभर में करीब 5 कैन कोका-कोला पी जाते हैं। अपनी इस अनूठी डाइट को लेकर वह खुद भी कई बार हल्के-फुल्के अंदाज में चुटकी लेते रहे हैं। उनका कहना है कि उनकी रोजाना की लगभग 2,700 कैलोरी में से 25 प्रतिशत हिस्सा इसी ड्रिंक से आता है, इसलिए उनका शरीर एक चौथाई कोका-कोला से बना है। हालांकि, जानकारों का मानना है कि यह उनकी व्यक्तिगत जीवनशैली का हिस्सा है, जिसे सेहत के लिहाज से सामान्य लोगों के लिए अनुकरण करने की सलाह नहीं दी जा सकती।
पहले पेप्सी के शौकीन थे, ऐसे बदली पसंद
कम ही लोग जानते हैं कि कोका-कोला के दीवाने बनने से पहले बफेट पेप्सी पिया करते थे। 1980 के दशक के शुरुआती दौर तक वह पेप्सी के इतने शौकीन थे कि उनके घरवाले उन्हें प्यार से ‘पेप्सी वॉरेन’ बुलाया करते थे। लेकिन साल 1985 में पासा पलट गया। उनके एक पड़ोसी, जो कोका-कोला कंपनी में बड़े अधिकारी थे, ने उन्हें चेरी कोक का एक सैंपल भिजवाया। बफेट को उसका स्वाद इतना भाया कि वह रातोंरात उसके पक्के ग्राहक बन गए। बात यहीं नहीं रुकी, 1986 में उन्होंने अपनी कंपनी बर्कशायर हैथवे की बोर्ड बैठकों का आधिकारिक पेय ही चेरी कोक को घोषित कर दिया।
निवेश का ऐसा दांव जो हर साल बरसाता है अरबों रुपये
वॉरेन बफेट का कोका-कोला प्रेम सिर्फ पीने की हद तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने इसे एक शानदार कारोबारी अवसर में बदल दिया। साल 1988 में बर्कशायर हैथवे ने करीब 1.3 अरब डॉलर खर्च करके कोका-कोला के 40 करोड़ शेयर खरीद लिए, जो उस समय कंपनी की कुल हिस्सेदारी का करीब 9 प्रतिशत हिस्सा था। बफेट हमेशा उसी बिजनेस में पैसा लगाने की वकालत करते हैं जिसे वे अच्छी तरह समझते हैं। उनका यह दांव पूरी तरह सटीक बैठा।
आज कोका-कोला से मिलने वाला डिविडेंड उनकी कंपनी के लिए कमाई का बड़ा जरिया है। हालिया आंकड़ों के मुताबिक, बर्कशायर हैथवे को इस निवेश से सालाना करीब 84.8 करोड़ डॉलर यानी भारतीय मुद्रा में लगभग 7,100 करोड़ रुपये सिर्फ डिविडेंड के रूप में मिलते हैं। यही वजह है कि कोका-कोला को ‘डिविडेंड किंग’ कहा जाता है और बफेट की यह कहानी साबित करती है कि पसंद और समझदारी भरा निवेश किस तरह चमत्कारी रिटर्न दे सकता है।
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