Breaking News
Magha Shraddha 2026: 7 अक्टूबर को है मघा श्राद्ध, जानें द्वादशी तिथि पर तर्पण का शुभ समय और नियमKaithal Nursing Staff Strike: ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी के खिलाफ कैथल में नर्सिंग स्टाफ का हल्लाबोल, 5 से 7 अक्टूबर तक हड़तालMahendragarh : हकेवि की डॉ. सुमन रानी को मिला ‘श्रेष्ठ शिक्षक अवार्ड’, शिक्षा मंत्री ने किया सम्मानितNarnaul: हरियाणा के सभी जिलों में 8 अक्ट्रबर को होगा ‘वोट बचाओ-देश बचाओ’ विशाल रोष मार्चCEC ज्ञानेश कुमार मामले में SC ने EC से मांगा जवाब, CJI बोले Form-6 पर- हमने कोई बदलाव मंजूर नहीं कियाMagha Shraddha 2026: 7 अक्टूबर को है मघा श्राद्ध, जानें द्वादशी तिथि पर तर्पण का शुभ समय और नियमKaithal Nursing Staff Strike: ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी के खिलाफ कैथल में नर्सिंग स्टाफ का हल्लाबोल, 5 से 7 अक्टूबर तक हड़तालMahendragarh : हकेवि की डॉ. सुमन रानी को मिला ‘श्रेष्ठ शिक्षक अवार्ड’, शिक्षा मंत्री ने किया सम्मानितNarnaul: हरियाणा के सभी जिलों में 8 अक्ट्रबर को होगा ‘वोट बचाओ-देश बचाओ’ विशाल रोष मार्चCEC ज्ञानेश कुमार मामले में SC ने EC से मांगा जवाब, CJI बोले Form-6 पर- हमने कोई बदलाव मंजूर नहीं किया

आरएसएस को समझने के लिए इसका स्वयं अनुभव लेना होगा: मोहन भागवत

JJagmarg Desk
आरएसएस को समझने के लिए इसका स्वयं अनुभव लेना होगा: मोहन भागवत
शेयर करें
AI Quick Summary

Want to save time? Let our AI read the article and give you 3 quick bullet points.

Listen to this article
AUDIO VERSION

कुरुक्षेत्र: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने शनिवार को कहा कि संस्कृति, मूल्य, नैतिकता और सही आचरण संगठन का मूल आधार है और इसे समझने के लिए, व्यक्ति को इसे भीतर से अनुभव करना होगा।

भागवत ने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के सभागार में शिक्षाविदों, सेवानिवृत्त प्रशासनिक अधिकारियों और न्यायाधीशों की एक सभा को संबोधित करते हुए कहा कि एक स्वस्थ और मजबूत समाज के निर्माण के लिए नैतिक मूल्यों, अनुशासित आचरण, सांस्कृतिक आधार और प्रतिबद्ध प्रयास का सामंजस्यपूर्ण मिश्रण आवश्यक है। यह कार्यक्रम आरएसएस के शताब्दी समारोह के हिस्से के रूप में आयोजित किया गया था।

विज्ञापन

आरएसएस द्वारा जारी एक प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक भागवत ने अपने भाषण में ‘कुटुंब प्रबोधन’ (परिवारिक जागृति) के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि परिवारों को सार्थक संवाद की संस्कृति को बढ़ावा देना चाहिए। उन्होंने कहा कि घरों में हार्दिक संवाद को बढ़ावा देना चाहिए जहां बच्चे सही और गलत के बीच अंतर करना सीखें।

भागवत ने कहा कि केवल उपदेश ही पर्याप्त नहीं हैं, क्योंकि केवल एक स्वस्थ और मूल्य-उन्मुख वातावरण ही व्यक्तियों को भटकने से रोक सकता है। उन्होंने कहा कि समृद्धि के समय में कई लोग एक साथ खड़े होते हैं, लेकिन विपत्ति के समय ही परिवार और सामाजिक मूल्यों की ताकत की परीक्षा होती है।

आरएसएस प्रमुख ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति असफल हो जाता है या बुरी संगत में पड़ जाता है, तो परिवार और समाज का यह दायित्व है कि वे उसका मार्गदर्शन और समर्थन करें। मूल्यों पर आधारित वातावरण का निर्माण करना समय की आवश्यकता है, क्योंकि इससे जिम्मेदार और संवेदनशील, मजबूत चरित्र वाले व्यक्ति तैयार होते हैं।

भागवत ने आरएसएस के बारे में कहा कि संगठन को केवल बाहरी अवलोकन या प्रचलित विमर्शों के माध्यम से नहीं समझा जा सकता है। भागवत ने कहा कि संघ को समझने के लिए, इसे भीतर से अनुभव करना आवश्यक है। उन्होंने दावा किया कि इसकी कार्यशैली अद्वितीय है।

भागवत ने कहा कि विश्व भर की जानी-मानी हस्तियां संघ के संगठनात्मक ढांचे को समझने के लिए इसका दौरा करती हैं और अक्सर अपने देशों में इसी तरह की युवा-उन्मुख ढांचे को स्थापित करने के लिए मार्गदर्शन मांगती हैं।

भागवत ने कहा कि हमारे स्वयंसेवक कला और खेल से लेकर सामाजिक और सार्वजनिक जीवन तक विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय हैं, फिर भी चरित्र निर्माण संगठन का मूल उद्देश्य बना हुआ है। उन्होंने रेखांकित किया कि आरएसएस का उदय प्रतिस्पर्धा या प्रतिक्रिया से नहीं, बल्कि राष्ट्रीय पुनर्निर्माण के प्रति प्रतिबद्धता से हुआ है।

भागवत ने आरएसएस के संस्थापक के.बी. हेडगेवार को विशेष श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उन्हें जन्मजात देशभक्त बताया। उन्होंने कहा कि हेडगेवार का प्रारंभिक जीवन महान राष्ट्रीय गौरव और प्रतिबद्धता को दर्शाता था।

आरएसएस प्रमुख ने कहा कि हेडगेवार का मानना ​​था कि सामाजिक संगठन और चरित्र विकास के बिना केवल राजनीतिक स्वतंत्रता ही पर्याप्त नहीं है। वर्षों के प्रयोगों के बाद, उन्होंने एक अनूठी कार्यप्रणाली विकसित की, जिसके परिणामस्वरूप आरएसएस की स्थापना (1925 में) हुई।

विज्ञापन

कुरुक्षेत्र की और ख़बरें

ताज़ा ख़बरें सीधे अपने ईमेल पर

जगमार्ग न्यूज़ की बड़ी ख़बरें रोज़ अपने इनबॉक्स में पाएं। मुफ़्त, कभी भी अनसब्सक्राइब करें।