Breaking News
Magha Shraddha 2026: 7 अक्टूबर को है मघा श्राद्ध, जानें द्वादशी तिथि पर तर्पण का शुभ समय और नियमKaithal Nursing Staff Strike: ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी के खिलाफ कैथल में नर्सिंग स्टाफ का हल्लाबोल, 5 से 7 अक्टूबर तक हड़तालMahendragarh : हकेवि की डॉ. सुमन रानी को मिला ‘श्रेष्ठ शिक्षक अवार्ड’, शिक्षा मंत्री ने किया सम्मानितNarnaul: हरियाणा के सभी जिलों में 8 अक्ट्रबर को होगा ‘वोट बचाओ-देश बचाओ’ विशाल रोष मार्चCEC ज्ञानेश कुमार मामले में SC ने EC से मांगा जवाब, CJI बोले Form-6 पर- हमने कोई बदलाव मंजूर नहीं कियाMagha Shraddha 2026: 7 अक्टूबर को है मघा श्राद्ध, जानें द्वादशी तिथि पर तर्पण का शुभ समय और नियमKaithal Nursing Staff Strike: ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी के खिलाफ कैथल में नर्सिंग स्टाफ का हल्लाबोल, 5 से 7 अक्टूबर तक हड़तालMahendragarh : हकेवि की डॉ. सुमन रानी को मिला ‘श्रेष्ठ शिक्षक अवार्ड’, शिक्षा मंत्री ने किया सम्मानितNarnaul: हरियाणा के सभी जिलों में 8 अक्ट्रबर को होगा ‘वोट बचाओ-देश बचाओ’ विशाल रोष मार्चCEC ज्ञानेश कुमार मामले में SC ने EC से मांगा जवाब, CJI बोले Form-6 पर- हमने कोई बदलाव मंजूर नहीं किया

Gurukul Kurukshetra: खेल महोत्सव 2026: गुरुकुल कुरुक्षेत्र के छात्र ने मल्लखंभ में दिखाई ताकत, चंडीगढ़ में मिला सम्मान

GGaganpreet Kaur
खेल महोत्सव 2026: गुरुकुल कुरुक्षेत्र के छात्र ने मल्लखंभ में दिखाई ताकत, चंडीगढ़ में मिला सम्मान
शेयर करें
AI Quick Summary

Want to save time? Let our AI read the article and give you 3 quick bullet points.

Listen to this article
AUDIO VERSION

कुरुक्षेत्र।  कुरुक्षेत्र की धरती अब केवल शिक्षा ही नहीं, बल्कि खेल के मैदान में भी अपनी पारंपरिक जड़ों के साथ नए कीर्तिमान स्थापित कर रही है। पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ में आयोजित ‘पांचवें भारतीय पारंपरिक खेल व खेलकूद महोत्सव’ में गुरुकुल कुरुक्षेत्र के होनहार छात्र वत्सल आर्य ने मल्लखंभ की पोल पर हैरतअंगेज करतब दिखाकर प्रदेश भर में तीसरा स्थान हासिल किया है। 1 से 3 मई तक चले इस प्रतिष्ठित महोत्सव में वत्सल की फुर्ती और संतुलन ने जजों के साथ-साथ दर्शकों को भी दांतों तले उंगली दबाने पर मजबूर कर दिया।

पारंपरिक खेलों का महाकुंभ: वत्सल का शानदार सफर

विज्ञापन

खेलो इंडिया और पंजाब यूनिवर्सिटी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस खेल महोत्सव का मुख्य उद्देश्य लुप्त हो रहे भारतीय खेलों को पुनर्जीवित करना था। कैंपस में जब मल्लखंभ की स्पर्धा शुरू हुई, तो वत्सल आर्य ने अपनी कड़ी मेहनत और कोच अनिल आर्य के मार्गदर्शन का बेहतरीन परिचय दिया। उनकी इस उपलब्धि पर पंजाब के पूर्व एडवोकेट जनरल अनमोल रत्न सिद्धू ने उन्हें मंच पर सम्मानित किया। इस महोत्सव में केवल मल्लखंभ ही नहीं, बल्कि गतका, मल्लयुद्ध, गिल्ली-डंडा, लाठी और योग जैसे 15 से अधिक खेलों में खिलाड़ियों ने अपना दमखम दिखाया।

गुरुकुल में जश्न: विजेताओं का भव्य स्वागत

वत्सल की इस कामयाबी की खबर जैसे ही कुरुक्षेत्र पहुंची, गुरुकुल परिसर में खुशी की लहर दौड़ गई। गुरुकुल के प्रधान राजकुमार गर्ग, निदेशक ब्रिगेडियर डॉ. प्रवीण कुमार और प्राचार्य सूबे प्रताप ने वत्सल और उनके कोच अनिल आर्य का फूल-मालाओं के साथ स्वागत किया। व्यवस्थापक रामनिवास आर्य ने भी छात्र की पीठ थपथपाई। ब्रिगेडियर डॉ. प्रवीण कुमार ने इस दौरान खेलों के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि आज के दौर में जहां बच्चे स्क्रीन की दुनिया में खोए हैं, वहां वत्सल जैसे खिलाड़ी पारंपरिक खेलों के जरिए अपनी शारीरिक और मानसिक शक्ति का लोहा मनवा रहे हैं।

अनुशासन और टीम भावना की जीत

निदेशक ने कहा कि खेल केवल पदक जीतने का जरिया नहीं है, बल्कि यह छात्र के भीतर टीम भावना और आपसी भाईचारे की नींव रखता है। गुरुकुल कुरुक्षेत्र लगातार अपने छात्रों को आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ इन प्राचीन विधाओं में भी निपुण बना रहा है। वत्सल की इस जीत ने यह साबित कर दिया है कि अगर सही दिशा और अनुशासन मिले, तो पारंपरिक खेलों में भी करियर और पहचान दोनों बनाई जा सकती है। फिलहाल, वत्सल की इस सफलता ने आगामी राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए कुरुक्षेत्र की उम्मीदें जगा दी हैं।

विज्ञापन

कुरुक्षेत्र की और ख़बरें

ताज़ा ख़बरें सीधे अपने ईमेल पर

जगमार्ग न्यूज़ की बड़ी ख़बरें रोज़ अपने इनबॉक्स में पाएं। मुफ़्त, कभी भी अनसब्सक्राइब करें।