Ujjain Mahakal Temple: महाकाल मंदिर में करंट की अफवाह से भगदड़ जैसे हालात, 13 की तबीयत बिगड़ी, 40 हजार श्रद्धालु लाइन में

महाकाल मंदिर में करंट की अफवाह से भगदड़ जैसे हालात
Ujjain Mahakal Temple: उज्जैन के प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर परिसर में सोमवार को नागपंचमी और सावन सोमवार के चलते भारी भीड़ उमड़ी। इसी दौरान करंट फैलने की अफवाह के बाद अचानक भगदड़ जैसे हालात बन गए और श्रद्धालुओं में अफरा-तफरी मच गई। भीड़ का दबाव बढ़ने से कई लोग एक-दूसरे के ऊपर गिर पड़े, जिसमें 13 श्रद्धालुओं के घायल होने की जानकारी सामने आई है।
पुलिस और प्रशासनिक टीम ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को संभाला। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, प्राथमिक इलाज के बाद ज्यादातर घायलों को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई, जबकि कुछ श्रद्धालुओं का इलाज जारी रहा।
40 हजार श्रद्धालु कतार में, लाखों कर चुके दर्शन
उज्जैन पुलिस के मुताबिक नागचंद्रेश्वर भगवान के दर्शन के लिए करीब 40 हजार श्रद्धालु कतार में थे। यह मंदिर महाकाल मंदिर की तीसरी मंजिल पर स्थित है और साल में सिर्फ एक बार नागपंचमी के अवसर पर 24 घंटे के लिए खोला जाता है। इसी वजह से नागपंचमी पर यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।
इस साल नागपंचमी के साथ सावन सोमवार का संयोग होने से भीड़ और बढ़ गई। स्थानीय रिपोर्ट के अनुसार, लाखों श्रद्धालु नागचंद्रेश्वर के दर्शन के लिए उज्जैन पहुंचे हैं।
घायल सागर ने बताया- अचानक बैरिकेड खोले गए
भगदड़ में घायल सागर ने आरोप लगाया कि वह कई घंटे से दर्शन की कतार में खड़ा था। उसके मुताबिक, वह 7-8 घंटे बाद हरसिद्धि चौराहे तक पहुंचा और वहां करीब दो घंटे तक भीड़ के बीच खड़ा रहा।
सागर का कहना है कि भीड़ लगातार बढ़ रही थी और आरती के समय के कारण श्रद्धालुओं को वहीं रोक दिया गया था। उसके मुताबिक अचानक बैरिकेड खोल दिए गए, जिसके बाद भगदड़ जैसे हालात बन गए। टेंट और बैरिकेड गिरने से उसके दोनों पैर उनके नीचे फंस गए और एक पैर में फ्रैक्चर हुआ।
सागर ने मंदिर परिसर की व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उसका आरोप है कि हादसे के दौरान उसे तत्काल मदद नहीं मिली और बाद में एक व्यक्ति ने उसे मेडिकल कैंप तक पहुंचाया।
VIP दर्शन को लेकर भी श्रद्धालु ने लगाए आरोप
घायल सागर ने VIP दर्शन की व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए। उसका दावा है कि इस दौरान 300 रुपए की रसीद काटकर शीघ्र या VIP दर्शन कराए जा रहे थे, जबकि आम श्रद्धालु घंटों तक कतार में खड़े थे।
सागर ने कहा कि वह इससे एक दिन पहले भी महाकाल मंदिर गया था और उस समय भी भारी भीड़ के बीच VIP लोगों को प्रवेश मिलता दिखाई दिया। उसके मुताबिक आम श्रद्धालु मानसरोवर गेट पर करीब चार घंटे से इंतजार कर रहे थे।
यह आरोप श्रद्धालु की ओर से लगाए गए हैं। मंदिर प्रशासन की ओर से इस मामले में अलग से कोई आधिकारिक पक्ष इस खबर में उपलब्ध नहीं है।
अस्पताल में भर्ती को लेकर भी सामने आए सवाल
उज्जैन निवासी मनोहर भावसार ने अस्पताल में किसी श्रद्धालु के भर्ती न होने के दावों पर सवाल उठाया। उन्होंने बताया कि उनके दोस्त का बच्चा महाकाल मंदिर में दर्शन के लिए गया था और घटना के बाद महाकाल की एंबुलेंस से अस्पताल पहुंचा।
भावसार के मुताबिक बच्चे के पैर में फ्रैक्चर है और उसे अस्पताल में भर्ती किया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन की ओर से घटना को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं की जा रही थी और परिवार आर्थिक स्थिति के कारण निजी अस्पताल में इलाज कराने में सक्षम नहीं था।
इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं हो सकी है। वहीं, स्थानीय रिपोर्टों में घायलों के जिला अस्पताल पहुंचने और इलाज किए जाने की जानकारी दी गई है।
ग्वालियर से आई महिला बोली- बेटी के दांत टूटे
ग्वालियर से दर्शन के लिए आई श्रद्धालु आरती ने बताया कि उनकी बेटी भी घटना में घायल हुई है। आरती के अनुसार, भगदड़ के दौरान बेटी को चक्कर आया और वह रेलिंग से जा टकराई।
महिला ने बताया कि उसकी बेटी बेहोश हो गई थी और बाद में एंबुलेंस से अस्पताल पहुंचाया गया। उनके मुताबिक बेटी के दांत टूट गए हैं और वह घटना के बाद ठीक से बोल भी नहीं पा रही है।
साल में सिर्फ एक दिन खुलता है नागचंद्रेश्वर मंदिर
महाकालेश्वर मंदिर की तीसरी मंजिल पर स्थित नागचंद्रेश्वर मंदिर की सबसे खास बात यह है कि इसके कपाट साल में केवल एक बार नागपंचमी के दिन खोले जाते हैं। श्रद्धालुओं को इस दिन 24 घंटे तक भगवान नागचंद्रेश्वर के दर्शन का अवसर मिलता है।
इसी विशेष अवसर के कारण हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु उज्जैन पहुंचते हैं। इस बार नागपंचमी और सावन सोमवार एक साथ होने से भीड़ और ज्यादा रही। मंदिर में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए 300 रुपए के शीघ्र दर्शन की ऑनलाइन व्यवस्था भी की गई थी।
प्रशासन ने संभाली स्थिति, लेकिन भीड़ प्रबंधन पर सवाल
घटना के बाद पुलिस और प्रशासन ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित किया। पुलिस के अनुसार फिलहाल हालात नियंत्रण में हैं। हालांकि घायलों और उनके परिजनों की ओर से भीड़ प्रबंधन, बैरिकेडिंग और मदद मिलने में देरी को लेकर सवाल उठाए गए हैं।
नागपंचमी जैसे बड़े धार्मिक आयोजनों में हजारों श्रद्धालु एक साथ पहुंचते हैं। ऐसे में कतारों को नियंत्रित करना, बैरिकेडिंग के बीच पर्याप्त जगह रखना, अफवाहों पर तुरंत रोक लगाना और मेडिकल सहायता को भीड़ के नजदीक उपलब्ध रखना सुरक्षा के लिहाज से बेहद जरूरी हो जाता है।
