एशियन गेम्स में भारत के खाते में 6 मेडल, शूटिंग का दबदबा; हिमांशु को सिल्वर, रुद्रांक्ष ने जीता ब्रॉन्ज
एशियन गेम्स में भारत के 6 मेडल, शूटिंग से आए 5
Asian Games 2026: आइची-नागोया एशियन गेम्स में भारतीय निशानेबाज लगातार पदक जीत रहे हैं। सोमवार को पुरुषों की 10 मीटर एयर राइफल व्यक्तिगत स्पर्धा में हिमांशु ढिल्लों और रुद्रांक्ष पाटिल ने एक साथ पोडियम पर जगह बनाई। हिमांशु ने सिल्वर और रुद्रांक्ष ने ब्रॉन्ज पदक जीता। चीन के ओलंपिक चैंपियन शेंग लिहाओ ने 254.2 अंक के साथ गोल्ड जीता। हिमांशु ने 252.4 अंक जुटाए, जबकि रुद्रांक्ष 230.9 अंक के साथ तीसरे स्थान पर रहे। शेंग ने इस प्रदर्शन के साथ एशियन गेम्स रिकॉर्ड भी बनाया। हिमांशु के लिए यह पदक खास रहा क्योंकि वह पहली बार एशियन गेम्स में हिस्सा ले रहे हैं। क्वालिफिकेशन में सातवें स्थान पर रहने के बाद उन्होंने फाइनल में अपना प्रदर्शन सुधारा और सिल्वर तक पहुंचे।
टीम इवेंट में भी भारत ने जीता सिल्वर
व्यक्तिगत मुकाबले से पहले भारत ने पुरुषों की 10 मीटर एयर राइफल टीम स्पर्धा में भी सिल्वर पदक जीता था। भारतीय टीम में रुद्रांक्ष पाटिल, हिमांशु ढिल्लों और पार्थ माने शामिल थे। भारतीय टीम ने कुल 1890.1 अंक हासिल किए। चीन ने 1899.0 अंक के साथ गोल्ड जीता, जबकि दक्षिण कोरिया 1884.2 अंक के साथ तीसरे स्थान पर रहा। चीन की टीम ने इस प्रदर्शन के साथ अपना पिछला विश्व रिकॉर्ड भी बेहतर किया। टीम सिल्वर और व्यक्तिगत स्पर्धा के दो पदकों के साथ सोमवार को ही भारत ने शूटिंग में तीन पदक जोड़ लिए। इससे भारतीय शूटिंग दल की मौजूदा एशियन गेम्स पदक संख्या पांच हो गई।
आखिरी दौर में हिमांशु ने बदली बाजी
पुरुषों की 10 मीटर एयर राइफल फाइनल में शुरुआत में रुद्रांक्ष भारतीय चुनौती को आगे बढ़ाते नजर आए। एक समय वह शेंग लिहाओ से आगे चल रहे थे, लेकिन एलिमिनेशन राउंड में स्थिति बदल गई। फाइनल के निर्णायक दौर में रुद्रांक्ष ने 9.7 का निशाना लगाया, जबकि हिमांशु ने 10.6 अंक हासिल किए। इसके बाद हिमांशु ने रजत पदक की स्थिति मजबूत कर ली। दोनों भारतीयों के बीच अंतर बेहद कम था, इसलिए आखिरी शॉट तक मुकाबला बना रहा। हिमांशु ने दबाव के बीच अपना संयम बनाए रखा और अपने डेब्यू एशियन गेम्स में सिल्वर पदक जीत लिया। रुद्रांक्ष को ब्रॉन्ज मिला। रुद्रांक्ष इससे पहले 2022 हांगझोउ एशियन गेम्स में पुरुषों की 10 मीटर एयर राइफल टीम स्पर्धा में गोल्ड जीत चुके हैं। इस बार व्यक्तिगत ब्रॉन्ज के साथ उन्होंने एशियन गेम्स में एक और पदक अपने नाम किया।
18 साल के पार्थ माने का भी अहम योगदान
भारतीय टीम की सफलता में 18 वर्षीय पार्थ माने की भूमिका भी अहम रही। वह अपने पहले एशियन गेम्स में हिस्सा ले रहे हैं। व्यक्तिगत क्वालिफिकेशन में 628.3 अंक के साथ वह शीर्ष आठ में जगह नहीं बना सके, लेकिन टीम स्पर्धा में उनके स्कोर ने भारत के सिल्वर पदक में योगदान दिया। माने का निशानेबाजी का सफर भी कम उम्र में शुरू हुआ। सोलापुर में जन्मे माने को 13 साल की उम्र में स्कूल के एक समर कैंप के दौरान इस खेल से परिचय हुआ था। उनके पुलिस अधिकारी पिता ने उन्हें कैंप में भेजने के लिए प्रोत्साहित किया। इसके बाद निशानेबाजी उनके लिए गंभीर लक्ष्य बन गई। बेहतर सुविधाओं के लिए उनका परिवार मुंबई चला गया, जहां उन्होंने ओलंपियन और कोच सुमा शिरूर के साथ प्रशिक्षण लिया। अब अपने पहले एशियन गेम्स में टीम सिल्वर जीतने के बाद माने के पास मिश्रित टीम स्पर्धा में भी पदक की चुनौती पेश करने का मौका है।
सुचिका तारियाल ने MMA में रचा इतिहास
भारत के छह पदकों में पांच शूटिंग से आए हैं, जबकि एक पदक मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स से मिला है। सुचिका तारियाल ने महिलाओं के ट्रेडिशनल 60 किग्रा वर्ग में ब्रॉन्ज जीतकर एशियन गेम्स के इतिहास में भारत के लिए MMA का पहला पदक हासिल किया। सुचिका ने क्वार्टर फाइनल में मंगोलिया की अल्तानचिमेग बैगलमा को हराकर पदक पक्का किया था। सेमीफाइनल में उनका मुकाबला सिंगापुर की टियो हुई हूं से हुआ, जहां मुकाबला करीबी रहा। हार के बाद सुचिका को ब्रॉन्ज से संतोष करना पड़ा। MMA को पहली बार एशियन गेम्स में शामिल किया गया है। ऐसे में सुचिका का पदक भारतीय खेलों के लिए भी एक नया अध्याय है।
भारत की पदक तालिका में मजबूत शुरुआत
सोमवार के मुकाबलों के बाद भारत के खाते में कुल छह पदक हो गए हैं। इनमें चार सिल्वर और दो ब्रॉन्ज हैं। इनमें पांच पदक शूटिंग से और एक MMA से आया है। शूटिंग में भारत के पदकों की शुरुआत महिलाओं की 10 मीटर एयर राइफल टीम और व्यक्तिगत स्पर्धा से हुई थी। इसके बाद पुरुषों की टीम और व्यक्तिगत स्पर्धाओं में भी भारतीय निशानेबाजों ने पोडियम फिनिश हासिल किया। एशियन गेम्स की शुरुआत में ही शूटिंग भारत के लिए पदक जुटाने वाला प्रमुख खेल बन गया है। अब भारतीय दल की नजर अन्य खेलों पर भी है, जहां आने वाले दिनों में पदक की कई और उम्मीदें हैं।
