Tarn Taran Patti Road Repair : तरनतारन-पट्टी सड़क की बदहाली पर फूटा लोगों का गुस्सा, 25 मिनट का सफर दो घंटे में हो रहा तय
तरनतारन-पट्टी सड़क की बदहाली पर फूटा लोगों का गुस्सा, 25 मिनट का सफर दो घंटे में हो रहा तय
Tarn Taran Patti Road Repair : पंजाब के पट्टी से तरनतारन और अमृतसर का रुख करने वाले मुसाफिरों के लिए इन दिनों सफर किसी सजा से कम नहीं है। लगभग 25 किलोमीटर लंबे इस अति-महत्वपूर्ण मार्ग पर फैली बदहाली और उस पर कछुआ गति से चल रहा मरम्मत का काम आम जनता के सब्र का इम्तिहान ले रहा है।
हालात ये हैं कि जिस दूरी को तय करने में बमुश्किल 25 से 30 मिनट का वक्त लगना चाहिए, आज के समय में वाहन चालकों को वही रास्ता पार करने में दो घंटे तक जूझना पड़ रहा है। विकास के दावों के बीच यह सड़क अब प्रशासनिक लापरवाही और सुस्ती की एक जीवंत तस्वीर बनती जा रही है, जिससे हर रोज इस रास्ते से गुजरने वाले हजारों लोगों का जीवन प्रभावित हो रहा है।
उद्घाटन और वादों के बीच धूल फांकती सड़क
इस मार्ग के नवीनीकरण और सुधारीकरण को लेकर प्रशासनिक स्तर पर कई बार कागजी घोड़े दौड़ाए गए और बड़े-बड़े शिलान्यास भी रखे गए, लेकिन जमीन पर हालात जस के तस बने हुए हैं। पिछले करीब दो महीनों से सड़क पर पैचवर्क और नए निर्माण का काम तो शुरू कर दिया गया, मगर इसकी सुस्त चाल ने लोगों के जख्मों पर नमक छिड़कने का काम किया है।
ठेकेदार ने कई जगहों पर सड़क को बीच से उखाड़कर छोड़ दिया है, जहां अब सिर्फ बजरी, मिट्टी और गटका बिखरा पड़ा है। बारिश हो या सूखी धूप, इन उबड़-खाबड़ रास्तों पर उड़ती धूल और फिसलते पहिए राहगीरों के लिए रोज की मुसीबत बन चुके हैं।
हादसों का डर और वाहनों को भारी नुकसान
रात के वक्त इस सड़क से गुजरना किसी खतरे से खाली नहीं है। पर्याप्त रोशनी और चेतावनी संकेतों के अभाव में वाहन चालक अक्सर गहरे गड्ढों में फंसकर दुर्घटनाओं का शिकार हो रहे हैं। मोटरसाइकिल सवारों के साथ-साथ कार, ऑटो और बसों के चालकों को भी भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
गाड़ियों के टायर फटने, सस्पेंशन टूटने और इंजन के पुर्जाें के खराब होने की शिकायतें आम हो चुकी हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि सड़क की इस खस्ताहाली की वजह से अतीत में कई गंभीर हादसे हो चुके हैं, जिनमें लोगों को अपनी जानें तक गंवानी पड़ी हैं, फिर भी जिम्मेदार महकमे की नींद नहीं टूट रही है।
विभाग का तर्क और जनता का तीखा रोष
जब इस पूरे मामले को लेकर लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के एक्सईएन से बातचीत की गई, तो उन्होंने अपनी सफाई में बताया कि पठानकोट क्षेत्र में माइनिंग बंद होने के कारण सड़क निर्माण के लिए जरूरी सामग्री की किल्लत चल रही है, जिसके चलते काम तय रफ्तार से आगे नहीं बढ़ पा रहा। हालांकि, उन्होंने जल्द ही काम पूरा करने का भरोसा भी दिलाया है।
दूसरी ओर, जनता का सवाल है कि अगर सामग्री की दिक्कत थी, तो बिना किसी ठोस वैकल्पिक योजना के सड़क को बीच में ही उखाड़कर क्यों छोड़ दिया गया? मरीजों को अस्पताल ले जाने वाली एम्बुलेंस हों, स्कूल-कॉलेज जाने वाले बच्चे हों या रोजमर्रा की आजीविका के लिए निकलने वाले व्यापारी—हर कोई इस प्रशासनिक लापरवाही का खामियाजा भुगत रहा है।
क्षेत्र के लोगों ने पंजाब सरकार, जिला प्रशासन और संबंधित विभाग के उच्च अधिकारियों से पुरजोर मांग की है कि इस महत्वपूर्ण सड़क के निर्माण कार्य की व्यक्तिगत रूप से समीक्षा की जाए। जनता चाहती है कि ठेकेदार को सख्त निर्देश देकर काम को युद्धस्तर पर पूरा करवाया जाए, ताकि पट्टी, तरनतारन और अमृतसर के बीच का यह अहम सफर एक बार फिर सुगम और सुरक्षित बन सके।
