चंडीगढ़ में 54 करोड़ से सुधरेगी हवा: अब LPG की जगह इलेक्ट्रिक शवदाह, धुएं को भी किया जाएगा साफ
चंडीगढ़ में प्रदूषण घटाने के लिए 54 करोड़ की योजना
Air Pollution Control: चंडीगढ़ में वायु प्रदूषण कम करने के लिए नगर निगम ने 54 करोड़ रुपये से अधिक की योजना तैयार की है। इसके तहत शहर के श्मशान घाटों में होने वाले प्रदूषण को कम करने के साथ सड़कों की धूल, वाहनों से होने वाले प्रदूषण और हरियाली बढ़ाने पर भी काम किया जाएगा। सेक्टर-25 स्थित श्मशान घाट में LPG आधारित शवदाह प्रणाली की जगह इलेक्ट्रिक सिस्टम लगाने का प्रस्ताव है। इसके साथ ही चिताओं से निकलने वाले धुएं को एकत्र कर वेट स्क्रबर के जरिए साफ करने की व्यवस्था भी की जाएगी। नगर निगम की इस योजना का उद्देश्य प्रदूषण के अलग-अलग स्रोतों पर एक साथ काम करना है। इसके लिए जेटिंग मशीन, रोड स्वीपर और सक्शन मशीनें खरीदने के साथ सड़कों के सुधार, ग्रीन बेल्ट और मियावाकी फॉरेस्ट विकसित करने की भी तैयारी है। निगम ने परियोजनाओं की मंजूरी और फंड जारी करने के लिए प्रस्ताव चंडीगढ़ प्रदूषण नियंत्रण समिति को भेजे हैं।
नगर निगम सेक्टर-25 स्थित श्मशान घाट में मौजूदा LPG आधारित शवदाह प्रणाली को इलेक्ट्रिक सिस्टम में बदलने की तैयारी कर रहा है। इस परियोजना पर करीब 2.73 करोड़ रुपये खर्च करने का प्रस्ताव है। इसके साथ ही शवदाह के दौरान निकलने वाले धुएं को सीधे वातावरण में फैलने से रोकने के लिए विशेष व्यवस्था की जाएगी। श्मशान घाट में चिताओं के ऊपर रिट्रैक्टेबल हुड लगाए जाएंगे। ये हुड शवदाह के दौरान निकलने वाले धुएं को एकत्र करेंगे। इसके बाद डक्टिंग सिस्टम के माध्यम से धुएं को वेट स्क्रबर तक पहुंचाया जाएगा, जहां उसमें मौजूद प्रदूषक तत्वों को नियंत्रित करने की व्यवस्था होगी। इस तकनीक का उद्देश्य शवदाह के दौरान निकलने वाले धुएं को बिना उपचार के वातावरण में फैलने से रोकना है। इससे श्मशान घाट के आसपास वायु प्रदूषण कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है। हालांकि, इसका वास्तविक असर सिस्टम के संचालन और प्रदूषकों को नियंत्रित करने की क्षमता पर निर्भर करेगा।
इंडस्ट्रियल एरिया फेज-1 में भी बनेगा इलेक्ट्रिक शवदाह गृह
नगर निगम की योजना में इंडस्ट्रियल एरिया फेज-1 में नया इलेक्ट्रिक शवदाह गृह विकसित करना भी शामिल है। इसके लिए करीब 3.57 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। निगम का उद्देश्य शहर में शवदाह से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए इलेक्ट्रिक प्रणाली का विस्तार करना है। सेक्टर-25 में मौजूदा LPG प्रणाली को इलेक्ट्रिक सिस्टम में बदलने और इंडस्ट्रियल एरिया में नया इलेक्ट्रिक शवदाह गृह बनाने से दोनों जगहों पर शवदाह की व्यवस्था में बदलाव आएगा। इसके साथ ही सेक्टर-25 में धुएं के उपचार के लिए वेट स्क्रबर और हुड लगाने की योजना भी है। इन दोनों परियोजनाओं पर कुल 6.30 करोड़ रुपये खर्च होने का प्रस्ताव है। हालांकि, इनके क्रियान्वयन के लिए संबंधित विभागों से मंजूरी और फंड जारी होना जरूरी है।
नगर निगम की 54 करोड़ रुपये से अधिक की योजना में केवल श्मशान घाटों से होने वाले प्रदूषण को कम करना शामिल नहीं है। शहर की सड़कों पर जमा धूल और वाहनों की आवाजाही से उड़ने वाली धूल को नियंत्रित करने के लिए भी कदम उठाए जाएंगे। इसके तहत निगम जेटिंग मशीन, रोड स्वीपर और सक्शन मशीनें खरीदने की तैयारी कर रहा है। इन मशीनों की मदद से सड़कों की नियमित सफाई और धूल को नियंत्रित करने का काम किया जाएगा। इसके अलावा सड़कों के सुधार पर भी 10 करोड़ रुपये से अधिक खर्च करने का प्रस्ताव है। सड़कों की बेहतर सफाई और मरम्मत से धूल के दोबारा हवा में फैलने की समस्या को कम करने में मदद मिल सकती है। शहर में बढ़ते यातायात और निर्माण गतिविधियों के बीच सड़क की धूल भी वायु प्रदूषण का एक स्रोत है। ऐसे में निगम की योजना में इस पर विशेष ध्यान दिया गया है।
हरियाली बढ़ाने और ट्रैफिक सुधारने पर भी खर्च होंगे करोड़ों रुपये
प्रदूषण नियंत्रण की योजना में शहर की हरियाली बढ़ाने के लिए भी 3 करोड़ रुपये से अधिक की राशि प्रस्तावित है। इसके तहत मियावाकी फॉरेस्ट और ग्रीन बेल्ट विकसित की जाएंगी। इससे शहर में हरित क्षेत्र बढ़ाने के साथ पर्यावरण सुधारने के प्रयास किए जाएंगे। इसके अलावा यातायात प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट सिस्टम (ITS) को भी योजना में शामिल किया गया है। इसके माध्यम से ट्रैफिक व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित करने की तैयारी है। निगम प्रदूषण नियंत्रण के लिए जनजागरूकता अभियान भी चलाएगा, ताकि लोगों को प्रदूषण के स्रोतों और उसे कम करने के उपायों के बारे में जानकारी दी जा सके। इस तरह योजना में सड़क की धूल, शवदाह से निकलने वाले धुएं, यातायात और हरियाली जैसे कई पहलुओं को शामिल किया गया है। निगम का लक्ष्य अलग-अलग स्रोतों से होने वाले प्रदूषण को नियंत्रित कर शहर की वायु गुणवत्ता में सुधार करना है।
नगर निगम ने इन सभी परियोजनाओं की मंजूरी और फंड जारी करने के लिए प्रस्ताव चंडीगढ़ प्रदूषण नियंत्रण समिति को भेजे हैं। प्रस्तावों को मंजूरी मिलने और राशि उपलब्ध होने के बाद इनके क्रियान्वयन की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। इन परियोजनाओं पर 54 करोड़ रुपये से अधिक खर्च करने की योजना है। इसके तहत इलेक्ट्रिक शवदाह प्रणाली, धुएं की सफाई, सड़क सुधार, सफाई मशीनों की खरीद, हरियाली और ट्रैफिक प्रबंधन जैसे काम किए जाएंगे। नगर निगम का मानना है कि प्रदूषण के अलग-अलग स्रोतों पर एक साथ काम करने से वायु गुणवत्ता में सुधार लाया जा सकता है। हालांकि, योजना के वास्तविक परिणाम इसके समय पर क्रियान्वयन और मशीनों व प्रणालियों के नियमित संचालन पर निर्भर करेंगे।
चंडीगढ़ में PM10 का स्तर 114 से घटकर 90 हुआ
केंद्र सरकार ने लोकसभा में राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के तहत देश के 130 शहरों के PM10 प्रदूषण से जुड़े आंकड़े जारी किए थे। इन आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2017-18 को आधार वर्ष मानते हुए चंडीगढ़ में 2024-25 के दौरान PM10 का औसत स्तर 114 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया था। उस अवधि में इसमें कोई कमी दर्ज नहीं हुई थी। हालांकि, 2025-26 में चंडीगढ़ के PM10 का औसत स्तर घटकर 90 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रह गया। पिछले साल के मुकाबले इसमें 26 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर की गिरावट दर्ज की गई। यह आंकड़ा शहर में PM10 प्रदूषण के स्तर में कमी को दर्शाता है।
इसी प्रदर्शन के आधार पर वर्ष 2026-27 में चंडीगढ़ के लिए राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के तहत फंडिंग बढ़ाकर 53.27 करोड़ रुपये कर दी गई है। वर्ष 2025-26 में यह राशि 13.95 करोड़ रुपये थी। यानी एक साल में कार्यक्रम के तहत मिलने वाली राशि में बड़ा इजाफा हुआ है। नई फंडिंग और नगर निगम की प्रस्तावित परियोजनाओं से शहर में प्रदूषण नियंत्रण के प्रयासों को आगे बढ़ाने की योजना है। अब इन परियोजनाओं की मंजूरी और क्रियान्वयन के बाद ही पता चलेगा कि इनसे चंडीगढ़ की वायु गुणवत्ता में कितना सुधार होता है।
