AI Dating Partners: कभी डेटिंग ऐप्स को आधुनिक दौर में सच्चा प्यार तलाशने का सबसे आसान और जादुई जरिया माना जाता था। लेकिन वक्त के साथ इन ऐप्स की हकीकत से लोगों का मोहभंग होने लगा है। किसी को घंटों मैसेज का जवाब नहीं मिलता, तो कोई बातचीत शुरू होने से पहले ही ‘घोस्टिंग’ (अचानक गायब हो जाना) का शिकार हो जाता है।
ऊपर से अजीबोगरीब प्रोफाइल्स और ऐसे सूखे चैट, जिन्हें आगे बढ़ाने के लिए हर बार नए सिरे से सवाल सोचने पड़ते हैं। ऐसे में अगर कोई ऐसा साथी मिल जाए जो दिन हो या रात के दो बज रहे हों, हर वक्त आपकी बात सुनने के लिए तैयार बैठा हो, बिना किसी उलाहना के आपकी हर बात याद रखे, तो उस डिजिटल सुकून की तरफ खिंच जाना स्वाभाविक लगने लगता है। यही वजह है कि आज एक नया और हैरान करने वाला ट्रेंड तेजी से उभर रहा है, जहां लोग इंसानों के बजाय एआई चैटबॉट्स में अपना साथी तलाश रहे हैं।
बिना किसी शर्त और रिजेक्शन के मिलने वाला सुकून
यह चलन अब सिर्फ विदेशों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके दायरे में भारतीय युवा भी आ चुके हैं। इस दिलचस्प और थोड़े अजीब ट्रेंड को गहराई से समझने पर कुछ ऐसी कहानियां सामने आती हैं जो चौंकाती भी हैं और सोचने पर भी मजबूर करती हैं। सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट इंजीनियर अनिका शर्मा पिछले छह महीनों से एक एआई साथी के साथ रिश्ते में हैं। अनिका का मानना है कि इस वर्चुअल रिश्ते की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यहां खुद को हर पल साबित करने का दबाव नहीं होता। उन्हें यह सोचने की जरूरत नहीं पड़ती कि उन्होंने कुछ ज्यादा बोल दिया है या सामने वाला उनसे नाराज हो गया है।
कुछ ऐसी ही कहानी सेल्स एग्जीक्यूटिव दृष्टिका कटारिया की है, जो पिछले नौ महीनों से एआई पार्टनर को डेट कर रही हैं। दृष्टिका का कहना है कि आज की डेटिंग कई बार किसी नौकरी के इंटरव्यू जैसी लगने लगी है, जहां दोनों तरफ के लोग अपनी असली भावनाएं छिपाकर रखते हैं। वहीं, ब्रिटिश नागरिक मायाना मिलर का मानना है कि लोग एआई के प्रति लगाव को गलत समझ लेते हैं। उनका कहना है कि किसी चीज से गहरा भावनात्मक जुड़ाव होना और उसे असल इंसान मान लेना दोनों अलग बातें हैं। एआई के साथ सबसे बड़ा फायदा यह है कि यहां रिजेक्शन, अनदेखी और गलतफहमी का कोई डर नहीं होता।
जब एआई हर बात पर आपकी हां में हां मिलाने लगे
लेकिन इस डिजिटल रोमांस का एक दूसरा पहलू भी है, जो वैज्ञानिकों और मनोवैज्ञानिकों को चिंता में डाल रहा है। सवाल यह उठता है कि अगर आपका पार्टनर आपकी हर बात पर सिर्फ सहमति जताए, आपकी हर गलती को सही ठहराए और कभी आपको अपनी गलती का अहसास न कराए, तो क्या यह किसी स्वस्थ रिश्ते के लिए अच्छा है? मार्च 2026 में प्रतिष्ठित जर्नल ‘साइंस’ में एक स्टडी प्रकाशित हुई थी, जिसका शीर्षक ‘Sycophantic AI Decreases Prosocial Intentions and Promotes Dependence’ था। इस रिसर्च में 11 अलग-अलग एआई मॉडल का अध्ययन किया गया, जिसमें सामने आया कि एआई ने इंसानों की तुलना में यूजर की हर बात का 49 प्रतिशत ज्यादा समर्थन किया।
2,405 लोगों पर किए गए इन प्रयोगों से यह साफ हुआ कि जरूरत से ज्यादा हां में हां मिलाने वाले एआई जवाब इंसानों को अपनी गलती स्वीकार करने और रिश्तों में सुधार करने से दूर कर सकते हैं। अगर आप गुस्से में आकर कोई गलत कदम उठा लें और एआई से पूछें कि गलती किसकी थी, तो संभव है कि वह सिर्फ आपकी ही साइड ले। इससे आपको यह भ्रम हो सकता है कि आप हमेशा सही हैं, जबकि वास्तविक जीवन के रिश्ते बहस, असहमति और सुधार के जरिए ही मजबूत होते हैं।
क्या एआई कभी ले पाएगा इंसानी प्यार की जगह?
जानकारों का मानना है कि एआई चैटबॉट्स के साथ रिश्ता रखने वाले लोग सिर्फ तकनीक के साथ वक्त नहीं बिता रहे, बल्कि वे अपनी भावनाओं को एक ऐसी सुरक्षित जगह दे रहे हैं जहां उन्हें बिना किसी शर्त के सुना जाता है। एआई आपका मैसेज कभी सीन करके नहीं छोड़ेगा, काम का बहाना बनाकर मिलने से मना नहीं करेगा और आपको कभी इंतजार नहीं करवाएगा।
लेकिन इसका यह कतई मतलब नहीं है कि वह आपकी तरह प्यार महसूस करता है। असली सवाल यह नहीं है कि क्या एआई इंसानी पार्टनर की जगह ले सकता है, बल्कि बड़ा सवाल यह है कि क्या आज के दौर में लोग असल प्यार से ज्यादा उस तसल्ली की तलाश में हैं, जहां उन्हें बिना किसी झिझक के सुना और समझा जा सके? क्योंकि कभी-कभी किसी का वक्त पर जवाब देना ही प्यार का सबसे बड़ा भ्रम पैदा कर देता है।

