Nangal Chaudhary News: (विजय यादव) पहले तापमान ज्यादा होने से बिजाई में पछेत हो गई, इसके बाद चक्रवाती बारिश ने हजारों एकड़ में सरसों की बिजाई को डपट कर दिया। अब पछेती वैरायटी का बीज मददगार साबित हो सकता है। किसानों की सुविधा के लिए सरकार ने उपमंडल स्तर पर सरसों का बीज मुहैया कराया है, जिसकी अच्छी पैदावार होने के साथ तेल की मात्रा भी बेहतर रहेगी। जरूरतमंद किसान आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करके खंड कार्यालय से बीज और मार्गदर्शन प्राप्त कर सकते हैं।
आपका बता दें कि नांगल चौधरी-निजामपुर के अधिकांश गांव नहरों से अटेच नहीं। सिंचाई के विकल्प नहीं होने के कारण ग्रामीण रबी सीजन में सरसों, चने की फसलों को प्राथमिकता देते हैं। विभागीय निर्देशानुसार सरसों की बिजाई के लिए 10 से 25 अक्टूबर तक समय उपयुक्त होता है, इसके बाद अगेती या सामान्य किस्म की वैरायटी कम पैदावार देती है।
अबकी बाद 15 अक्टूबर तक 30 डिग्री से अधिक तापमान रहा, जिसमें बिजाई करना संभव नहीं हो पाया। इसके बाद किसानों को डीएपी खाद की किल्लत झेलनी पड़ी, ऐसे में निर्धारित समय के अंतिम पड़ाव में बिजाई हो पाई। किंतु बिजाई होते ही चक्रवाती बारिश हो गई जिससे विभिन्न गांवों में 1200 एकड़ से अधिक रकबा डपट हो गया।
रिपोर्ट मिलने पर कृषि विभाग ने उप मंडल स्तर पर सरसों का बीज सप्लाई किया है। नांगल चौधरी उपमंडल में अारएच-1706, 1424 बीज तैयार किया है, इस पछेती वैरायटी के बीज से किसान को 11 से 15 क्विंटन एक एकड़ की औसत से पैदावार मिलने का अनुमान है, वहीं सरसों में तेल की मात्रा 38 से 42 फीसदी तक रहेगी। विभाग के मुताबिक यह पछेती किस्म वाली फसल 130 से 135 दिन में पक जाएगी तथा पौधे का फुटाव और ऊंचाई औसत रहेगी।
खाली रकबे पर मसूर की बिजाई कराने में जुटा विभाग
कृषि विभाग ने डार्कजोन में कम पानी में पकने वाली फसलों को प्राथमिकता देने की योजना बनाई है। योजना के अनुसार नांगल चौधरी-निजामपुर के गांवों में बिजाई से वंचित रकबे को चिन्हित किया जाएगा। विभागीय अधिकारी किसान को मसूर की उपज लेने के लिए प्रेरित करेंगे।
इस फसल को करीब 30 दिन बाद एक सिंचाई की जरूरत होगी, तथा बेहतर पैदावार मिलने के साथ मार्केटिंग में परेशानी नहीं रहेगी। विभाग ने किसानों को निशुल्क बीज वितरण करने का प्रपोजल तैयार किया है।
सरसों की 1250 थैली किसानों को वितरित करेगा विभाग
कृषि विभाग के बीएओ डॉ हरीश यादव ने बताया कि नांगल चौधरी उपमंडल को सरसों के पछेती वैरायटी के बीज की 1250 थैली वितरित हुई हैं। जिसके लिए किसानों को आधार कार्ड तथा मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल पर पंजीकरण के दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे।
मसूर की फसल किसानों के लिए लाभकारी साबित होगी, क्योंकि एक सिंचाई में अच्छी पैदावार मिलती है। इसके बीज के लिए किसानों को शपथ पत्र देना होगा जिसमें बिजाई करने की गारंटी देना जरूरी है। उन्होंने बताया कि बीज का वितरण पहले आओ पहले पाओ की तर्ज पर किया जाएगा।

