AI Work Lord: आज के आधुनिक दौर में हर कोई अपने समय की बचत करने और दफ्तर के कामकाज को आसान बनाने के लिए एआई (AI) टूल्स का सहारा ले रहा है। उम्मीद यही होती है कि तकनीक की मदद से भागदौड़ कम होगी और काम तेजी से निपटेगा। लेकिन अमेरिका की एक जानी-मानी महिला उद्यमी के साथ इसका ठीक उल्टा अनुभव सामने आया है।
अपने दैनिक कार्यों का प्रबंधन AI असिस्टेंट को सौंपना उन्हें इस कदर भारी पड़ गया कि उनकी रोजाना की टू-डू लिस्ट में देखते ही देखते 156 नए काम जुड़ गए। इस वाकये ने अब इस बहस को जन्म दे दिया है कि क्या हर छोटे-बड़े काम के लिए एआई पर निर्भर रहना वाकई बुद्धिमानी है?
प्लानिंग के जाल में उलझ गया असली काम
लेखक, उद्यमी और एआई रणनीतिकार डॉ. मोरिसा श्वार्ट्ज ने अंतरराष्ट्रीय पत्रिका ‘फॉर्च्यून’ से अपना यह कड़वा अनुभव साझा किया है। उन्होंने बताया कि उन पर पांडुलिपियों को संभालने, ढेरों ई-मेल का जवाब देने और विभिन्न व्यावसायिक प्रोजेक्ट्स को समय पर पूरा करने की बड़ी जिम्मेदारियां रहती हैं। (Morissa Schwartz AI experience) ऐसे में उन्होंने अपनी मदद के लिए एक एआई असिस्टेंट की सेवाएं लीं। शुरुआत में तो सब ठीक लगा, लेकिन धीरे-धीरे एआई ने हर काम को बेहद जटिल बना दिया।
श्वार्ट्ज के अनुसार, जब भी वे किसी प्रोजेक्ट के लिए एआई से योजना बनाने को कहतीं, तो वह पहले एक मास्टर प्लान तैयार करता। फिर उस प्लान को बारीक हिस्सों में बांटकर चेकलिस्ट बनाता और उस चेकलिस्ट के हर एक बिंदु के लिए अलग-अलग सब-टास्क खड़े कर देता। नतीजा यह हुआ कि एक ई-मेल भेजने की तैयारी में ही दस नए काम सामने आ जाते। काम खत्म होने की जगह केवल उसकी तैयारी का दायरा बढ़ता चला गया।
संख्या नहीं, नतीजों से तय हो प्रोडक्टिविटी
156 कामों की विशाल सूची देखने के बाद डॉ. श्वार्ट्ज को अपनी कार्यशैली बदलने पर मजबूर होना पड़ा। उनका स्पष्ट मानना है कि किसी भी कार्यकुशलता (प्रॉडक्टिविटी) सिस्टम का वास्तविक मूल्यांकन इस बात से होना चाहिए कि उससे कितना वास्तविक काम पूरा हुआ, न कि इस बात से कि उसने कितनी लंबी चेकलिस्ट तैयार की।
इस अनुभव से सीख लेते हुए अब उन्होंने अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। अब वे अपने कामकाजी दिनों में टू-डू लिस्ट में अधिकतम 25 जरूरी कामों को ही जगह देती हैं। (AI assistant task overload) वे सलाह देती हैं कि एआई का इस्तेमाल सिर्फ प्लानिंग का पहाड़ खड़ा करने के लिए नहीं, बल्कि अंतिम नतीजों—जैसे मेल भेजा गया या नहीं, प्रोजेक्ट पूरा हुआ या नहीं—को हासिल करने के लिए किया जाना चाहिए।
यह भी पढ़ें–Durga Puja Sand Art: 8 टन रेत और ताजे फलों से तैयार की दुर्गा प्रतिमा, वायरल हुई सुदर्शन पटनायक की सैंड आर्ट

