Narnaul News: दक्षिण हरियाणा के प्रसिद्ध मंदिर श्री चमत्कारी बालाजी मंदिर हुड्डा में रविवार को शिव परिवार एवं माता शीतला की प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम के तहत भव्य कलश यात्रा निकाली गई। सुबह करीब 8 बजे मंदिर परिसर से शुरू हुई कलश यात्रा में सैकड़ों महिलाओं ने सिर पर कलश धारण कर श्रद्धा और उत्साह के साथ भाग लिया। यात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने से पूरा क्षेत्र भक्तिमय माहौल में नजर आया।
कलश यात्रा के लिए महिलाओं ने विशेष रूप से सजे हुए कलश धारण किए। मंदिर परिसर से यात्रा के प्रारंभ होने के बाद श्रद्धालु भजन-कीर्तन करते हुए हुड्डा क्षेत्र के विभिन्न मार्गों से होकर आगे बढ़े। यात्रा में ढोल-नगाड़ों और डीजे पर बज रहे धार्मिक भजनों के बीच श्रद्धालु भक्ति में लीन नजर आए।
महिलाओं के साथ अन्य श्रद्धालु भी यात्रा में शामिल हुए और धार्मिक जयघोष करते हुए आगे बढ़े। कलश यात्रा के दौरान मार्ग में जगह-जगह लोगों ने धार्मिक उत्साह के साथ इसका स्वागत किया।
कलश यात्रा में शामिल महिलाओं की कतार काफी लंबी रही। सिर पर कलश धारण किए महिलाओं के साथ चल रहे श्रद्धालुओं से पूरा वातावरण धार्मिक रंग में रंगा नजर आया। भजन-कीर्तन और ढोल-नगाड़ों की धुन से हुड्डा क्षेत्र में उत्सव जैसा माहौल बना रहा। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की मौजूदगी के कारण यात्रा विशेष आकर्षण का केंद्र बनी रही।
मंदिर से शुरू हुई कलश यात्रा हुड्डा का चक्कर पूरा करने के बाद वापस श्री चमत्कारी बालाजी मंदिर पहुंची। यहां पहुंचने पर धार्मिक कार्यक्रम के अगले चरण का आयोजन किया गया। मंदिर में शिव परिवार एवं माता शीतला की प्राण प्रतिष्ठा के लिए धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए गए। श्रद्धालुओं ने मंदिर में पहुंचकर पूजा-अर्चना की और प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में भाग लिया।
इस अवसर पर मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की काफी भीड़ रही। महिलाओं के साथ परिवारों और अन्य श्रद्धालुओं ने भी धार्मिक कार्यक्रम में उत्साहपूर्वक भाग लिया। सुबह से ही मंदिर परिसर में भक्तों का पहुंचना शुरू हो गया था। कलश यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह दिखाई दिया। धार्मिक वातावरण के बीच आयोजित इस कार्यक्रम से मंदिर परिसर और आसपास का क्षेत्र भक्ति के रंग में डूबा रहा।
शिव परिवार एवं माता शीतला की प्राण प्रतिष्ठा को लेकर मंदिर में आयोजित कार्यक्रम में श्रद्धालुओं ने श्रद्धा के साथ भाग लिया। कलश यात्रा को धार्मिक आयोजन की महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में आयोजित किया गया, जिसमें महिलाओं की बड़ी भागीदारी रही। कलश यात्रा के मंदिर में वापस पहुंचने के बाद श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना कर परिवार की सुख-समृद्धि और क्षेत्र की खुशहाली की कामना की।
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