Ambala Sondha Drowning Case: अंबाला सिटी के नजदीक बसे गांव सोंढा में शुक्रवार को एक ऐसी हृदयविदारक घटना सामने आई, जिसने हर किसी की आंखें नम कर दीं। अपने घर के आंगन में मासूमियत से खेल रही 2 साल की बच्ची अचानक बाहर बने पानी के खुले हौद (टैंक) में गिर गई। पानी में दम घुटने के कारण बच्ची की दर्दनाक मौत हो गई। मृतका की पहचान चंदा कुमारी के रूप में हुई है।
यह परिवार मूल रूप से बिहार के बेगूसराय जिले का रहने वाला है और मजदूरी कर अपना पेट पालता है। महज एक महीने पहले गांव में किराये के मकान में आकर बसे इस गरीब परिवार की खुशियां इस हादसे के बाद पलभर में मातम में बदल गईं।
आंगन में खेलते-खेलते ओझल हुई मासूम, मां तलाशती रही और हौद में थम गई सांसें
प्रत्यक्षदर्शियों और परिजनों से मिली जानकारी के मुताबिक, बच्ची के पिता छोटूराम पेशे से दिहाड़ी मजदूर हैं। शुक्रवार को जब छोटूराम काम पर गए हुए थे, तब उनकी दो साल की बेटी चंदा घर के आंगन में खेल रही थी। मां घर के कामकाज में व्यस्त थी। इसी दौरान खेलते-खेलते मासूम कदम बढ़ाती हुई मकान के बाहर बने पानी के हौद के पास पहुंच गई।
कुछ देर तक जब घर में बच्ची की आवाज सुनाई नहीं दी, तो मां ने उसे तलाशना शुरू किया। आसपास और गली में ढूंढने के बाद भी जब चंदा का कोई सुराग नहीं मिला, तो मां घबरा गई। शक होने पर उसने शोर मचाया, जिसके बाद पड़ोसी और आसपास के लोग मौके पर जुट गए।
राहगीर ने हौद से निकाला बाहर, अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने मृत घोषित किया
शोर सुनकर पहुंची एक पड़ोसी महिला ने बताया कि बच्ची की मां रोते हुए चिल्ला रही थी कि उसकी बेटी नहीं मिल रही। जब लोगों ने घर के बाहर बने हौद के अंदर झांका, तो शुरुआत में गहरा पानी होने के कारण बच्ची नजर नहीं आई। लेकिन बारीकी से देखने पर बच्ची पानी के नीचे अचेत हालत में दिखाई दी।
मौके से गुजर रहे एक अज्ञात राहगीर युवक को तुरंत बुलाकर हौद के अंदर उतारा गया। युवक ने बमुश्किल मासूम को पानी से बाहर निकाला। इसके बाद पड़ोस की महिला और परिजन बच्ची को आनन-फानन में पहले नजदीक के निजी डॉक्टर के पास ले गए। हालत नाजुक देखते हुए उसे तुरंत अंबाला के नागरिक अस्पताल (सिविल अस्पताल) ले जाया गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने जांच के बाद मासूम को मृत घोषित कर दिया।
पानी भरने के लिए खोला गया था ढक्कन, लापरवाही पड़ी भारी
स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि सोंढा गांव में किरायेदार दैनिक जरूरतों के लिए इस भूमिगत हौद के पानी का इस्तेमाल करते हैं। आमतौर पर हौद का ढक्कन बंद रखा जाता है, लेकिन जब उसमें पानी भरा जाता है या पानी निकाला जाता है, तभी ढक्कन खोला जाता है।
हादसे के वक्त यह हौद खुला रह गया था, जो मासूम के लिए काल बन गया। हालांकि बच्ची कितनी देर तक पानी के अंदर रही और हौद की गहराई कितनी थी, इसकी सटीक पुष्टि नहीं हो सकी है। एक महीने पहले गांव में रोजी-रोटी की तलाश में आए परिवार के सिर पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
यह भी पढ़ें– गन्ने के रेट में 15 रुपये की बढ़ोतरी पर भड़के हरियाणा के किसान, नारायणगढ़ में सीएम नायब सैनी का पुतला फूंका

