Narnaul News: दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण की स्थिति को देखते हुए जिले में पटाखों के निर्माण, भंडारण, बिक्री और इन्हें फोड़ने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। आदेश का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 की धारा 5 के तहत सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। यह जानकारी उपायुक्त ने दी।
उन्होंने बताया कि हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के निर्देशों के तहत यह फैसला लिया गया है। माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा एम.सी. मेहता बनाम यूनियन ऑफ इंडिया मामले में दिए गए आदेशों और पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 की धारा 5 के अंतर्गत राज्य सरकार ने यह कदम उठाया है, जिसका जिला प्रशासन सख्ती से पालन कराएगा।
उपायुक्त ने स्पष्ट किया कि प्रतिबंध के दायरे में हर तरह के पटाखे आएंगे। पटाखों का निर्माण, गोदामों में भंडारण, थोक या खुदरा बिक्री, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के जरिए ऑनलाइन डिलीवरी और उन्हें फोड़ने की गतिविधियों पर पूरी तरह रोक रहेगी।
उन्होंने कहा कि अक्तूबर से जनवरी के बीच एनसीआर क्षेत्र में वायु प्रदूषण का स्तर उच्चतम स्तर पर पहुंच जाता है। ऐसे में पटाखे फोड़ने से वातावरण में सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन डाइऑक्साइड जैसे हानिकारक रसायनों के साथ धातु के कण और जहरीली गैसें घुल जाती हैं।
इससे पीएम 2.5 और पीएम 10 का स्तर बढ़ जाता है और हवा की गुणवत्ता गंभीर रूप से प्रभावित होती है। यह प्रदूषित हवा आम लोगों, विशेषकर बच्चों, बुजुर्गों और सांस तथा हृदय रोगियों के स्वास्थ्य के लिए अत्यंत घातक है।
जिले के सभी प्रशासनिक अधिकारियों, पुलिस विभाग और हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्राधिकार में आदेश का कड़ाई से पालन कराने के निर्देश दिए गए हैं।
उपायुक्त ने आमजन से अपील की है कि वे पर्यावरण को स्वच्छ रखने और जनस्वास्थ्य की रक्षा में प्रशासन का सहयोग करें और पटाखों का प्रयोग न कर सुरक्षित, प्रदूषण मुक्त वातावरण बनाने में योगदान दें।
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