राजस्थान में अनोखी अंतिम यात्रा: पति ने पत्नी को दुल्हन की तरह सजाया, खुद भी दूल्हे की तरह सजे; मोक्षधाम में फूट-फूटकर रोए
42 साल का साथ, आखिरी विदाई भी शादी जैसी
Bikaner News: राजस्थान के बीकानेर में एक पति ने अपनी पत्नी को ऐसी अंतिम विदाई दी, जिसने वहां मौजूद हर व्यक्ति को भावुक कर दिया। सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के रिटायर्ड सहायक प्रशासनिक अधिकारी राजेंद्र प्रसाद जोशी ने अपनी पत्नी अमिता जोशी को दुल्हन की तरह सजाया और खुद भी दूल्हे की तरह तैयार हुए। 42 साल तक साथ निभाने वाली पत्नी को उन्होंने गाजे-बाजे और रामनाम संकीर्तन के बीच अंतिम विदाई दी। राजेंद्र प्रसाद का कहना था कि जिस तरह वह अमिता को दुल्हन बनाकर अपने घर लाए थे, उसी तरह उन्हें सुहागन के रूप में विदा करना चाहते थे। शुक्रवार को जब गंगाशहर स्थित उनके घर से अमिता की अंतिम यात्रा निकली, तो बैंड की धुनों के बीच माहौल भावुक हो गया। मोक्षधाम पहुंचकर अंतिम विदाई देते समय राजेंद्र प्रसाद अपने आंसू नहीं रोक सके और फूट-फूटकर रोने लगे।
बीकानेर के गंगाशहर रोड निवासी 65 वर्षीय राजेंद्र प्रसाद जोशी की शादी 18 फरवरी 1984 को उत्तराखंड के श्रीनगर की रहने वाली अमिता जोशी से हुई थी। विवाह के बाद अमिता बीकानेर आ गई थीं। दोनों ने करीब 42 साल तक साथ जीवन बिताया और परिवार की जिम्मेदारियां निभाईं। राजेंद्र प्रसाद सूचना एवं जनसंपर्क विभाग में सहायक प्रशासनिक अधिकारी (AAO) के पद पर कार्यरत रहे और अब सेवानिवृत्त हैं। उन्होंने बताया कि वैवाहिक जीवन के दौरान अमिता ने एक पत्नी के रूप में अपनी जिम्मेदारियां पूरी निष्ठा से निभाईं। परिवार और घर की देखभाल में उनका अहम योगदान रहा। अमिता लंबे समय से गुर्दे की बीमारी से पीड़ित थीं। बीमारी के चलते गुरुवार रात उनका निधन हो गया। पत्नी की मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। लेकिन अंतिम विदाई के लिए राजेंद्र प्रसाद ने ऐसा तरीका चुना, जो उनके 42 साल के साथ और पत्नी के प्रति प्रेम को बयां कर रहा था।
दुल्हन की तरह सजाया, खुद भी दूल्हे की तरह तैयार हुए
पत्नी के निधन के बाद राजेंद्र प्रसाद ने उन्हें दुल्हन की तरह सजाने का फैसला किया। उन्होंने खुद भी दूल्हे की तरह कपड़े पहने। उनका कहना था कि अमिता को जिस तरह शादी के समय अपने जीवन में लेकर आए थे, उसी तरह अब उन्हें सुहागन के रूप में विदा करना चाहते हैं। राजेंद्र प्रसाद की इस इच्छा के मुताबिक अंतिम यात्रा की तैयारी की गई। शुक्रवार को गंगाशहर में बाफना स्कूल के सामने स्थित गली से अमिता की अंतिम यात्रा रवाना हुई। इस दौरान बैंड पार्टी ने शादी के गीतों की धुनें बजाईं। रामनाम संकीर्तन भी किया गया। आमतौर पर अंतिम यात्रा में शोक और मातम का माहौल रहता है, लेकिन इस विदाई में शादी की धुनें भी सुनाई दीं। संगीत और संकीर्तन के बीच परिवार के लोग और रिश्तेदार भावुक हो गए। राजेंद्र प्रसाद के इस फैसले में पत्नी के साथ बिताए लंबे जीवन की यादें भी जुड़ी थीं।
अंतिम यात्रा में सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के पूर्व अधिकारी और कर्मचारी, पड़ोस के लोग तथा रिश्तेदार शामिल हुए। सभी ने परिवार को सांत्वना दी और राजेंद्र प्रसाद को ढांढस बंधाया। हालांकि, पत्नी से बिछड़ने का दुख उनके चेहरे पर साफ दिखाई दे रहा था। जब अंतिम यात्रा मोक्षधाम पहुंची और अमिता को अंतिम विदाई देने का समय आया, तो राजेंद्र प्रसाद खुद को संभाल नहीं सके। वह फूट-फूटकर रोने लगे। उन्हें इस तरह रोता देखकर परिवार के सदस्यों के साथ वहां मौजूद अन्य लोगों की आंखें भी नम हो गईं। राजेंद्र प्रसाद ने जिस तरह पत्नी को दुल्हन की तरह सजाकर विदा किया, वह उनके लिए सिर्फ एक रस्म नहीं थी। यह उनके वैवाहिक जीवन की शुरुआत से जुड़ी यादों को अंतिम विदाई के साथ जोड़ने का तरीका था। उनके शब्दों में, वह अमिता को उसी तरह विदा करना चाहते थे, जिस तरह शादी के बाद उन्हें अपने घर लेकर आए थे।
राजेंद्र प्रसाद और अमिता जोशी के परिवार में दो बेटे हैं। छोटा बेटा अभिषेक वेटरनरी डॉक्टर है, जबकि बड़ा बेटा अमित इंजीनियर है। मां के निधन के बाद दोनों बेटे और परिवार के अन्य सदस्य शोक में हैं। अमिता के निधन की खबर से रिश्तेदारों और परिचितों में भी शोक है। अंतिम यात्रा में शामिल लोगों ने परिवार के प्रति संवेदना जताई। 42 साल के वैवाहिक जीवन के बाद पत्नी को विदा करते समय राजेंद्र प्रसाद का भावुक होना वहां मौजूद लोगों के लिए भी बेहद मार्मिक पल रहा।
