Bikram Majithia case: पंजाब में शिरोमणि अकाली दल (SAD) के नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया से जुड़े आय से अधिक संपत्ति मामले में विजिलेंस ब्यूरो ने जांच आगे बढ़ाते हुए सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की है। 28 अक्टूबर को दाखिल की गई इस चार्जशीट में करीब 700 करोड़ रुपये के लेनदेन का उल्लेख किया गया है। विजिलेंस टीम दस्तावेजों को ट्रंकों में भरकर अदालत पहुंची थी। यह मामला मजीठिया की वर्ष 2007 से 2017 के बीच की संपत्ति और वित्तीय लेनदेन की जांच से जुड़ा है। विजिलेंस ब्यूरो का आरोप है कि मजीठिया और उनसे जुड़े लोगों की संपत्तियां उनकी ज्ञात आय के मुकाबले अधिक हैं। एजेंसी ने संपत्तियों, बैंक खातों और विभिन्न कंपनियों के वित्तीय लेनदेन की जांच की है। हालांकि, जांच एजेंसी के आरोपों को अदालत में साबित होना अभी बाकी है। रिपोर्टों के मुताबिक, सप्लीमेंट्री चार्जशीट में गुरमेहर सिंह, मजीठिया के साले गज्जपत सिंह ग्रेवाल, हरप्रीत गुलाटी और अमरदीप सिंह के नाम शामिल हैं। इसके अलावा 10 कंपनियों को भी मामले में आरोपी बनाया गया है। इन लोगों और कंपनियों की कथित भूमिका को लेकर अभियोजन पक्ष अदालत में अपना पक्ष रखेगा।
पहले भी दाखिल हो चुकी है बड़ी चार्जशीट
विजिलेंस ब्यूरो इससे पहले अगस्त 2025 में मजीठिया के खिलाफ करीब 40 हजार पन्नों की चार्जशीट दाखिल कर चुका है। उस समय दस्तावेजों को भी ट्रंकों में भरकर मोहाली की अदालत में पेश किया गया था। जांच के दौरान 200 से अधिक गवाहों के बयान और करीब 400 बैंक खातों से संबंधित जानकारी सामने आने की बात अभियोजन पक्ष ने कही थी। अब नई सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल होने से मामले में जांच से जुड़े दस्तावेजों का दायरा और बढ़ गया है। उपलब्ध रिपोर्टों में दोनों चार्जशीट के दस्तावेजों की कुल संख्या करीब 53 हजार पन्ने बताई गई है। विजिलेंस ने इस मामले में अब तक चार चार्जशीट दाखिल किए जाने की जानकारी भी दी है। चार्जशीट में शामिल दस्तावेजों का उद्देश्य जांच के दौरान जुटाए गए साक्ष्य अदालत के सामने रखना है। इनमें वित्तीय लेनदेन, बैंक खातों, संपत्तियों और संबंधित व्यक्तियों तथा कंपनियों से जुड़े रिकॉर्ड अहम हो सकते हैं। अंतिम रूप से इन साक्ष्यों की स्वीकार्यता और आरोपों की पुष्टि अदालत में होने वाली सुनवाई के दौरान तय होगी।
25 जून 2025 को हुई थी गिरफ्तारी, सुप्रीम कोर्ट से मिली जमानत
मजीठिया के खिलाफ पंजाब विजिलेंस ब्यूरो ने 25 जून 2025 को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत FIR नंबर 22 दर्ज की थी। इसी दिन उन्हें गिरफ्तार किया गया था। मामला वर्ष 2007 से 2017 के बीच कथित रूप से आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोपों से जुड़ा है। 18 अगस्त 2025 को मोहाली की निचली अदालत ने उनकी नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद मजीठिया ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का रुख किया। हाईकोर्ट ने 4 दिसंबर 2025 को उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी, जिसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में अपील की। 2 फरवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने मजीठिया को नियमित जमानत दे दी। शीर्ष अदालत ने आदेश में उनकी करीब सात महीने की हिरासत और मामले में पुलिस रिपोर्ट दाखिल हो जाने समेत अन्य परिस्थितियों पर विचार किया। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि ट्रायल कोर्ट जमानत की शर्तें तय कर सकती है और मुकदमे में देरी होने पर अभियोजन पक्ष उचित आदेश के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख कर सकता है।
जमानत मिलने का अर्थ यह नहीं है कि मजीठिया को आरोपों से बरी कर दिया गया है। मामले की सुनवाई और साक्ष्यों का मूल्यांकन अदालत में होना है। सप्लीमेंट्री चार्जशीट के जरिए विजिलेंस ब्यूरो ने जांच से जुड़े अतिरिक्त दस्तावेज अदालत के सामने रखे हैं। अब अदालत में इन दस्तावेजों और अभियोजन पक्ष के साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया चलेगी। जिन लोगों और कंपनियों के नाम चार्जशीट में शामिल हैं, उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों पर भी न्यायिक प्रक्रिया के तहत विचार होगा। करीब 700 करोड़ रुपये के लेनदेन का उल्लेख इस मामले का अहम पहलू है, लेकिन लेनदेन की कुल राशि और आय से अधिक संपत्ति के आरोपों के बीच संबंध को अदालत में पेश साक्ष्यों के आधार पर ही समझा जाएगा। जब तक अदालत आरोपों पर फैसला नहीं सुनाती, तब तक इन्हें सिद्ध अपराध नहीं माना जा सकता।
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