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Hindu New Year: हिंदू नव वर्ष : 19 मार्च को कलश स्थापना के लिए मिलेगा बहुत कम समय, नोट कर लें सही मुहूर्त

AAmandeep Singh
हिंदू नव वर्ष :  19 मार्च को कलश स्थापना के लिए मिलेगा बहुत कम समय, नोट कर लें सही मुहूर्त
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ज्योतिष। धर्म और आस्था के केंद्र हरियाणा और दिल्ली-NCR समेत पूरे देश में चैत्र नवरात्रि की तैयारियां परवान चढ़ रही हैं। 19 मार्च, गुरुवार से शुरू हो रही यह नवरात्रि केवल शक्ति की उपासना का पर्व नहीं है, बल्कि इसी दिन से हिंदू नव वर्ष ‘विक्रम संवत 2083’ की भी शुरुआत होगी। ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक, इस बार माता का आगमन ‘डोली’ (पालकी) पर हो रहा है। ज्योतिष शास्त्र में गुरुवार के दिन नवरात्रि शुरू होने पर माता का वाहन डोली माना जाता है, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर थोड़ी उथल-पुथल और स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों का संकेत देता है, लेकिन भक्तों के लिए यह समय अटूट श्रद्धा और साधना का है।

कलश स्थापना: बस 1 घंटा 9 मिनट की है शुभ बेला

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शास्त्रों में कलश स्थापना को नवरात्रि की सबसे महत्वपूर्ण प्रक्रिया माना गया है। इस बार घट स्थापना के लिए समय काफी सीमित है। शुभ मुहूर्त सुबह 06:23 मिनट से शुरू होकर 07:32 मिनट तक रहेगा। यानी भक्तों के पास विधि-विधान से कलश स्थापित करने के लिए मात्र 1 घंटा 9 मिनट का समय होगा। मान्यता है कि सही मुहूर्त में की गई कलश स्थापना घर में सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है। घरों और मंदिरों में मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप ‘शैलपुत्री’ की पूजा के साथ ही नौ दिनों के अखंड उपवास का संकल्प लिया जाएगा।

अष्टमी और नवमी का विशेष संयोग: 26 मार्च को होगा महापूजन

इस साल की चैत्र नवरात्रि में तिथियों का बड़ा ही रोचक मेल देखने को मिल रहा है। 26 मार्च को अष्टमी और नवमी तिथि एक साथ पड़ रही हैं। इसका सीधा मतलब यह है कि जो लोग अष्टमी को कन्या पूजन करते हैं और जो नवमी को व्रत का पारण करते हैं, वे दोनों ही 26 मार्च को अपना अनुष्ठान पूरा करेंगे। इसी दिन रामनवमी का महापर्व भी मनाया जाएगा। नवमी के दिन मां दुर्गा ‘गज’ यानी हाथी पर सवार होकर विदा होंगी। शास्त्रों में माता का प्रस्थान हाथी पर होना बहुत ही शुभ माना गया है, जो अच्छी वर्षा और अन्न-धन के भंडार भरने का संकेत है।

भक्ति के साथ बाजारों में भी छाई रौनक

वैसे तो साल में दो गुप्त और दो मुख्य नवरात्रि आती हैं, लेकिन चैत्र और शारदीय नवरात्रि का महत्व सबसे ऊपर है। हरियाणा के प्राचीन देवी मंदिरों से लेकर महानगरों की सोसायटियों तक, हर जगह माता रानी के स्वागत की भव्य तैयारी है। बाजारों में पूजा सामग्री, फल और सूखे मेवों की मांग बढ़ गई है। मान्यता है कि जो भक्त इन नौ दिनों में सात्विक रहकर मां के नौ स्वरूपों की उपासना करते हैं, उनके जीवन की समस्त बाधाएं दूर हो जाती हैं।

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