इस बार पटाखे बेचने के अस्थायी लाइसेंस हासिल करने के लिए लोगों में काफी होड़ रही। कुल 4100 लोगों ने आवेदन किया था। प्रशासन ने दस्तावेजों और निर्धारित शर्तों की जांच के बाद 3963 आवेदनों को मंजूरी दी। जांच के दौरान 11 आवेदन सीधे खारिज कर दिए गए, जबकि 126 आवेदकों को आपत्तियां दूर करने का अवसर दिया गया। निर्धारित कमियां दूर नहीं करने पर इन आवेदनों को भी स्वीकार नहीं किया गया। इस तरह कुल 137 आवेदन निरस्त हुए। इसके बाद मंजूर आवेदनों में से ड्रॉ के जरिए 96 विक्रेताओं का चयन किया गया।पटाखा विक्रेताओं को समय रहते अपनी तैयारियां पूरी करने का मौका देने के लिए प्रशासन ने इस बार दिवाली से करीब डेढ़ महीने पहले ही लाइसेंस का ड्रॉ निकाल दिया था। सेक्टर-23 स्थित बाल भवन में आयोजित ड्रॉ के माध्यम से चयनित 96 लोगों को अस्थायी लाइसेंस दिए गए हैं। प्रशासन की योजना है कि निर्धारित स्थानों पर व्यवस्थित तरीके से बिक्री हो और बाजार में अनधिकृत स्टॉल न लगें।
शहर में सबसे अधिक स्टॉल सेक्टर-43 के दशहरा ग्राउंड में लगाए जाएंगे। यहां 15 स्टॉल होंगे। इसके बाद मनीमाजरा में फायर स्टेशन कार्यालय के पास खुले मैदान में 12 और सेक्टर-46 में पुरानी रेहड़ी मार्केट के साथ लगते खुले मैदान में 11 स्टॉल निर्धारित किए गए हैं। रामदरबार की सब्जी मंडी ग्राउंड में 10 स्टॉल लगाए जाएंगे। अन्य स्थानों की बात करें तो सेक्टर-49 में रयान इंटरनेशनल पब्लिक स्कूल के पास स्थित खुले सब्जी मंडी मैदान में सात और सेक्टर-24 में गुजरात भवन के सामने छह स्टॉल होंगे। वहीं, सेक्टर-33-सी, सेक्टर-37-सी, सेक्टर-29, सेक्टर-40, सेक्टर-30, सेक्टर-28 और धनास में पांच-पांच स्टॉल लगाए जाएंगे। इन सभी स्थानों पर रविवार रात तक पटाखों की बिक्री होगी। प्रशासन ने ऑनलाइन पटाखे बेचने पर रोक लगाई है। ऐसे में लोगों को निर्धारित बिक्री केंद्रों से ही पटाखे खरीदने होंगे।
पटाखों की बिक्री के दौरान आगजनी की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने सभी स्टॉलों पर सुरक्षा के इंतजाम अनिवार्य किए हैं। प्रत्येक स्टॉल पर रेत से भरी बाल्टियां, पानी और अग्निशमन उपकरण रखने होंगे। किसी भी आपात स्थिति में इनका इस्तेमाल कर तत्काल बचाव कार्रवाई की जा सकेगी। ग्रीन पटाखे बेचने की अनुमति के साथ प्रशासन ने उन्हें जलाने का समय भी निर्धारित किया है। दिवाली के दिन रात आठ से दस बजे तक ही आतिशबाजी की जा सकेगी।
यानी लोगों को पटाखे जलाने के लिए केवल दो घंटे मिलेंगे। इस संबंध में प्रशासन अलग से अधिसूचना जारी कर चुका है। पटाखों की बिक्री में नियमों का उल्लंघन रोकने के लिए प्रशासन ने शहर को तीन जोन में बांटकर निगरानी टीमें बनाई हैं। ये टीमें सभी स्टॉलों की जांच करेंगी। अधिकारियों के अनुसार, स्टॉल पर ग्रीन पटाखों के अलावा अन्य पटाखे बेचने की अनुमति नहीं होगी। नियमों का उल्लंघन करने वाले विक्रेताओं के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। लाइसेंस के दुरुपयोग को रोकने के लिए यह भी स्पष्ट किया गया है कि स्टॉल पर वही व्यक्ति मौजूद होना चाहिए, जिसके नाम पर लाइसेंस जारी हुआ है। लाइसेंस किसी दूसरे व्यक्ति को सौंपने या सबलेट करने की अनुमति नहीं होगी। जांच के दौरान नकली ग्रीन पटाखे मिलने पर उन्हें जब्त किया जाएगा और संबंधित विक्रेता का लाइसेंस रद्द करने की सिफारिश की जाएगी। प्रशासन की टीमें बिक्री के तीनों दिनों में स्टॉलों पर निगरानी रखेंगी।
ग्रीन पटाखे भी छोड़ते हैं जहरीला धुआं
ग्रीन पटाखों को पारंपरिक पटाखों के मुकाबले कम प्रदूषण फैलाने वाला विकल्प माना जाता है, लेकिन ये पूरी तरह प्रदूषण मुक्त नहीं हैं। इनके जलने से भी धुआं, बारीक प्रदूषक कण और हानिकारक गैसें निकलती हैं। ऐसे में ज्यादा आतिशबाजी हवा की गुणवत्ता को बिगाड़ सकती है।पीजीआई के कम्युनिटी मेडिसिन एवं स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के प्रो. सोनू गोयल के अनुसार, ग्रीन पटाखों को इस तरह तैयार किया जाता है कि पारंपरिक पटाखों की तुलना में इनसे होने वाला प्रदूषण कम हो। इनकी रासायनिक संरचना में बदलाव कर पार्टिकुलेट मैटर और कुछ हानिकारक गैसों का उत्सर्जन घटाया जाता है। हालांकि, इससे प्रदूषण पूरी तरह खत्म नहीं होता। इसलिए ग्रीन पटाखे होने का मतलब यह नहीं है कि इनका कितना भी इस्तेमाल किया जा सकता है। कम आतिशबाजी ही पर्यावरण और लोगों की सेहत के लिहाज से बेहतर विकल्प है। प्रो सोनू गोयल ने बताया कि पटाखों से निकलने वाले PM2.5 जैसे बेहद बारीक कण सांस के साथ फेफड़ों के भीतर तक पहुंच सकते हैं। इससे सांस लेने में परेशानी, खांसी और सांस संबंधी बीमारियों के लक्षण बढ़ सकते हैं। अस्थमा और सीओपीडी के मरीजों के साथ हृदय रोग से पीड़ित लोगों को भी अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए।


