Chandigarh Deputation Policy: चंडीगढ़ के सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों और कर्मचारियों की कमी के बीच स्वास्थ्य विभाग को बड़ा प्रशासनिक झटका लगा है। शहर के दो प्रमुख सरकारी अस्पतालों जीएमसीएच-32 और जीएमएसएच-16 में कुल 319 पद समाप्त यानी लैप्स हो चुके हैं। इनमें केवल नर्सिंग और पैरामेडिकल स्टाफ के पद ही नहीं, बल्कि अस्पतालों के प्रशासनिक और शैक्षणिक ढांचे से जुड़े महत्वपूर्ण पद भी शामिल हैं।
दूसरे राज्यों से अधिकारियों को डेपुटेशन पर लाने और नियमित भर्ती की प्रक्रिया में लगातार देरी का असर अब अस्पतालों के मानव संसाधन पर दिखाई देने लगा है। करीब 15 से 20 साल तक कई पदों पर नियमित नियुक्तियां नहीं होने के कारण ये पद तीन साल तक खाली रहे और सरकारी नियमों के तहत समाप्त माने गए। इससे दोनों अस्पतालों में प्रशासनिक जिम्मेदारियों के बंटवारे से लेकर चिकित्सा सेवाओं के संचालन तक कई तरह की चुनौतियां पैदा हुई हैं। अब स्वास्थ्य विभाग ने समाप्त हो चुके पदों को दोबारा बहाल कराने की प्रक्रिया शुरू की है। इस संबंध में स्वास्थ्य मंत्रालय को प्रस्ताव भेजा गया है। मंत्रालय की मंजूरी मिलने के बाद ही इन पदों को फिर से जीवित करने और नियमित भर्ती का रास्ता साफ हो सकेगा।
जीएमसीएच-32 में डायरेक्टर और रजिस्ट्रार के पद भी हुए समाप्त
सेक्टर-32 स्थित गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (जीएमसीएच-32) में कुल 129 पद लैप्स हो चुके हैं। इनमें अस्पताल के प्रशासनिक और शैक्षणिक कामकाज से जुड़े महत्वपूर्ण पद भी शामिल हैं। डायरेक्टर और रजिस्ट्रार जैसे अहम पदों के अलावा फैकल्टी और प्रोफेसर स्तर के 34 पद समाप्त हो गए हैं। अस्पताल में नर्सिंग और पैरामेडिकल स्टाफ के 93 पद भी खत्म हो चुके हैं। इन पदों पर लंबे समय तक नियमित नियुक्तियां नहीं होने के कारण अस्पताल के कामकाज पर दबाव बढ़ा है। चिकित्सा संस्थान में डॉक्टरों और कर्मचारियों की उपलब्धता के साथ प्रशासनिक जिम्मेदारियों को संभालने का सवाल भी खड़ा हो गया है। नियमित नियुक्तियां नहीं होने के चलते दूसरे राज्यों से डेपुटेशन पर आए डॉक्टरों और अधिकारियों को विभाग प्रमुख और स्टोर इंचार्ज जैसे महत्वपूर्ण प्रभार सौंपने पड़ रहे हैं। अस्पताल के भीतर महत्वपूर्ण पदों और जिम्मेदारियों के बंटवारे को लेकर लंबे समय से खींचतान और जोड़-तोड़ की चर्चाएं भी सामने आती रही हैं। ऐसे में स्थायी नियुक्तियों की कमी से अस्पताल के प्रशासनिक ढांचे पर पड़ रहे असर को नजरअंदाज करना मुश्किल हो गया है।
जीएमएसएच-16 में नर्सिंग ऑफिसर के 59 पद खत्म
सेक्टर-16 स्थित गवर्नमेंट मल्टी स्पेशियलिटी हॉस्पिटल (जीएमएसएच-16) की स्थिति भी इससे अलग नहीं है। यहां नियमित भर्ती नहीं होने के कारण 190 पद लैप्स हो चुके हैं। इनमें नर्सिंग ऑफिसर के 59 पद शामिल हैं, जबकि डॉक्टरों, पैरामेडिकल स्टाफ और मंत्रालयिक वर्ग के 131 पद समाप्त हो गए हैं। नर्सिंग ऑफिसर के पद अस्पताल की रोजमर्रा की स्वास्थ्य सेवाओं के लिए बेहद अहम होते हैं। मरीजों की देखभाल, वार्डों का संचालन और चिकित्सा प्रक्रिया में सहयोग जैसी जिम्मेदारियां इसी स्टाफ पर निर्भर करती हैं। ऐसे में 59 पदों का समाप्त होना अस्पताल में कर्मचारियों की उपलब्धता और काम के बंटवारे पर असर डाल सकता है। कर्मचारियों का आरोप है कि डेपुटेशन के माध्यम से पसंदीदा अधिकारियों और कर्मचारियों को लाने की कोशिशों के बीच नियमित भर्ती से जुड़ी फाइलें लंबित रखी गईं। उनका कहना है कि भर्ती प्रक्रिया समय पर पूरी नहीं होने का खामियाजा अस्पतालों के मौजूदा स्टाफ और मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित प्रशासनिक पक्ष का आधिकारिक जवाब सामने आना बाकी है।
तीन साल खाली रहने पर पद हो जाता है समाप्त
सरकारी नियमों के मुताबिक, यदि कोई स्वीकृत पद लगातार तीन साल तक खाली रहता है तो उसे डीम्ड अबॉलिश्ड यानी समाप्त माना जा सकता है। इस व्यवस्था के पीछे यह तर्क है कि यदि किसी पद पर नियमित नियुक्ति किए बिना तीन साल तक कामकाज चलता रहता है तो माना जाता है कि उस पद की जरूरत नहीं रह गई है। इसी नियम के चलते जीएमसीएच-32 और जीएमएसएच-16 के कुल 319 पद समाप्त हो गए। लंबे समय तक भर्ती नहीं होने के कारण अस्पतालों के कई विभागों में स्वीकृत पदों की संख्या और वास्तविक उपलब्ध कर्मचारियों के बीच अंतर बढ़ गया है। अब इन पदों को बहाल करने के लिए प्रशासन को दोबारा प्रस्ताव तैयार कर मंत्रालय की मंजूरी लेनी पड़ रही है।
भर्ती प्रक्रिया अटकने के पीछे तीन बड़ी वजहें
इन पदों पर नियमित भर्ती नहीं हो पाने के पीछे तीन प्रमुख कारण बताए जा रहे हैं। पहला कारण डेपुटेशन पर रिक्त पद भरने के लिए पंजाब और हरियाणा से समय पर चिकित्सा अधिकारियों की सिफारिशें नहीं मिलना है। यूटी प्रशासन को इन राज्यों से आवश्यक सिफारिशें नहीं मिलने के कारण डेपुटेशन के जरिए पद भरने की प्रक्रिया प्रभावित हुई। दूसरी वजह ओबीसी आरक्षण नीति से जुड़ी बताई जा रही है। चंडीगढ़ प्रशासन की ओबीसी श्रेणी संबंधी नीति के कारण संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) इस वर्ग के लिए भर्ती प्रक्रिया पूरी नहीं कर सका। इससे संबंधित पदों पर नियुक्तियों का मामला आगे नहीं बढ़ पाया। तीसरा कारण भर्ती एवं सेवा नियमों यानी रिक्रूटमेंट रूल्स (आरआर) में संशोधन लंबित रहना है। मार्च 2023 से केंद्रीय वेतनमान लागू होने के बाद भर्ती नियमों में जरूरी बदलाव किए जाने थे, लेकिन यह प्रक्रिया लंबे समय तक अटकी रही। इसके चलते नियमित भर्ती की प्रक्रिया प्रभावित हुई और खाली पदों को भरने में देरी होती गई।
जीएमएसएच-16 के 190 पदों की बहाली को वित्त विभाग की मंजूरी
समाप्त हो चुके पदों को दोबारा बहाल कराने के लिए अब प्रशासनिक स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं। जीएमएसएच-16 के 190 पदों को फिर से जीवित करने के प्रस्ताव को वित्त विभाग से मंजूरी मिल चुकी है। इनमें नर्सिंग ऑफिसर के 59 पद और पैरामेडिकल व मंत्रालयिक वर्ग के 131 पद शामिल हैं। हालांकि, वित्त विभाग की मंजूरी के बाद भी इन पदों पर भर्ती का रास्ता पूरी तरह साफ नहीं हुआ है। सभी समाप्त पदों को दोबारा बहाल करने के लिए मामला स्वास्थ्य मंत्रालय को भेजा गया है। अब मंत्रालय के फैसले का इंतजार है। मंत्रालय से मंजूरी मिलने के बाद ही पदों की बहाली और नियमित भर्ती की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी। चंडीगढ़ के दोनों बड़े सरकारी अस्पतालों में कर्मचारियों की कमी दूर करने के लिए यह फैसला अहम माना जा रहा है। मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए केवल पदों की बहाली ही नहीं, बल्कि भर्ती प्रक्रिया को समय पर पूरा करना भी जरूरी होगा।
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