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Coffee Facts: क्या वाकई थकान मिटाती है कॉफी? डॉक्टरों ने बताया ‘कैफीन क्रैश’ का असली सच

Coffee Facts: क्या वाकई थकान मिटाती है कॉफी? डॉक्टरों ने बताया 'कैफीन क्रैश' का असली सच

क्या कॉफी वाकई थकान दूर करती है या सिर्फ इसे छिपाती है?

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GGaganpreet Kaur

Coffee Facts: दफ्तर की मेज पर फाइलों और स्क्रीन के बीच जूझते हुए जैसे ही दोपहर के तीन बजते हैं, शरीर में एक अजीब सी सुस्ती घर करने लगती है। आंखें भारी होने लगती हैं और ध्यान भटकने लगता है। ऐसे में बिना ज्यादा सोचे पैर खुद-ब-खुद पेंट्री या कॉफी मशीन की तरफ बढ़ जाते हैं।

एक कप कड़क कॉफी हलक से नीचे उतरती है और थोड़ी देर के लिए दिमाग फिर से दौड़ने लगता है। इसी ताजगी के लालच में दिनभर में तीसरा और चौथा कप भी खाली हो जाता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिस कॉफी को आप अपनी ऊर्जा का पावरहाउस समझ रहे हैं, वह वाकई थकान मिटा रही है या सिर्फ आपके शरीर को धोखा दे रही है?

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चिकित्सा विज्ञान और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की मानें तो कॉफी कोई ‘एनर्जी ड्रिंक’ नहीं है। यह सिर्फ एक ऐसा जरिया है जो आपके थक चुके दिमाग को कुछ समय के लिए यह अहसास नहीं होने देता कि उसे आराम की जरूरत है।

दिमाग को कैसे झांसा देती है आपकी कॉफी?

वैज्ञानिक नजरिए से देखें तो दिनभर काम करने के बाद हमारे दिमाग में ‘एडेनोसिन’ (Adenosine) नाम का एक न्यूरोट्रांसमीटर यानी रसायन बनता है। यह रसायन जैसे-जैसे दिमाग के रिसेप्टर्स से जुड़ता है, हमें थकान और नींद का अहसास होने लगता है।

कॉफी में मौजूद कैफीन की बनावट हूबहू एडेनोसिन जैसी ही होती है। जब हम कॉफी पीते हैं, तो कैफीन दिमाग के उन रास्तों को ब्लॉक कर देता है जहां एडेनोसिन को पहुंचना था। नतीजा यह होता है कि शरीर थका होने के बावजूद दिमाग को थकान का सिग्नल नहीं मिल पाता और हम खुद को एक्टिव महसूस करने लगते हैं। यानी, कॉफी ने आपकी थकान दूर नहीं की, बल्कि उस सिग्नल को बीच रास्ते में ही दबा दिया।

लिवर के लिए वरदान भी है, लेकिन शर्त लागू

अमृता हॉस्पिटल, फरीदाबाद के गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी विभाग के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. महेंद्र सिंह राजपूत कहते हैं, “कॉफी को बिना सोचे-समझे सेहत का दुश्मन मान लेना गलत है। असल समस्या कॉफी नहीं, बल्कि उसे पीने का हमारा तरीका, उसमें घुली सफेद चीनी और उसकी वजह से हमारे खान-पान में होने वाली लापरवाही है।”

डॉ. राजपूत बताते हैं कि कई अंतरराष्ट्रीय शोध इस बात की तस्दीक करते हैं कि यदि बिना चीनी या बेहद कम चीनी के साथ रोजाना औसतन दो कप कॉफी पी जाए, तो यह लिवर के लिए सुरक्षा कवच का काम कर सकती है। यह लिवर में बनने वाले एंजाइम्स को संतुलित रखती है, लिवर फाइब्रोसिस की रफ्तार को धीमा करती है और गंभीर मामलों में सिरोसिस व लिवर कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों के जोखिम को काफी हद तक कम कर सकती है। लेकिन इसका मतलब यह कतई नहीं है कि अधिक फायदे के चक्कर में कॉफी के प्याले बढ़ा दिए जाएं।

‘कैफीन क्रैश’ और नींद का बिगड़ता गणित

अक्सर दोपहर में कॉफी पीने के दो-तीन घंटे बाद शरीर अचानक दोगुनी सुस्ती का शिकार हो जाता है। इसे मेडिकल की भाषा में ‘कैफीन क्रैश’ कहा जाता है। दरअसल, जब कैफीन का असर खत्म होता है, तो पहले से रुका हुआ एडेनोसिन रसायन एक साथ दिमाग पर हावी हो जाता है। इस स्थिति से बचने के लिए लोग एक और कप कॉफी पी लेते हैं, जो धीरे-धीरे एक लत का रूप ले लेती है।

इसके अलावा, बहुत कम लोग यह जानते हैं कि कैफीन की ‘हाफ-लाइफ’ (शरीर में आधा असर रहने की अवधि) करीब 5 से 6 घंटे की होती है। इसका मतलब यह है कि अगर आपने शाम 4 बजे कॉफी पी है, तो रात 10 बजे तक भी उसका आधा असर आपके खून में दौड़ रहा होगा। यही वजह है कि बिस्तर पर लेटने के बाद भी दिमाग शांत नहीं होता और नींद आने में भारी मशक्कत करनी पड़ती है। नींद की गुणवत्ता बेहतर रखने के लिए बिस्तर पर जाने से कम से कम 6 से 8 घंटे पहले कैफीन से तौबा कर लेनी चाहिए।

हर सुस्ती काम के बोझ से नहीं होती

यदि आपको रोज दोपहर में सुस्ती आ रही है, तो केवल कॉफी को अपना सहारा न बनाएं। इसके पीछे शरीर में पानी की कमी (डीहाइड्रेशन), लंच में बहुत अधिक कार्बोहाइड्रेट या भारी भोजन लेना, धूप और ताजी हवा की कमी, या फिर शरीर में आयरन, विटामिन B12 और विटामिन D की छिपी हुई कमी भी हो सकती है।

अगर आप कैफीन के झटके के बिना खुद को तरोताजा रखना चाहते हैं, तो ‘कॉफी नैप’ (दवा या कॉफी लेने के तुरंत बाद 15-20 मिनट की झपकी) एक अच्छा विकल्प हो सकती है। इसके अलावा ग्रीन टी भी बेहतर है, जिसमें कैफीन कम होता है और ‘एल-थियानिन’ नामक अमीनो एसिड एकाग्रता बढ़ाने में मदद करता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, एक स्वस्थ वयस्क के लिए दिनभर में 400 मिलीग्राम (लगभग 3 से 4 सामान्य कप) कैफीन सुरक्षित मानी गई है। लेकिन याद रखें, थके हुए शरीर का एकमात्र इलाज पर्याप्त नींद, सही पोषण और उचित आराम ही है, कॉफी का कप नहीं।

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