Panipat Factory Fire: शनिवार का सूरज पानीपत के औद्योगिक क्षेत्र के लिए एक बार फिर खौफनाक सुबह लेकर आया। बलाना गांव स्थित एक कंबल फैक्ट्री में शनिवार सुबह अचानक आग भड़क उठी। आग इतनी भयानक थी कि कुछ ही मिनटों में उसने पूरी फैक्ट्री को अपनी चपेट में ले लिया।
आसमान को चीरती आग की ऊंची लपटें और काले धुएं के गुबार दूर-दूर तक दिखाई दे रहे थे, जिसे देखकर आसपास के इलाकों में दहशत फैल गई। आग की भूनने वाली तपिश और लपटों के जोर से फैक्ट्री की दीवारें भी कमजोर होकर गिरने लगीं। स्थानीय लोगों और राहगीरों की सांसें तब तक अटकी रहीं जब तक दमकल की गाड़ियां मौके पर नहीं पहुंच गईं।
वक्त रहते बाहर निकाले गए मजदूर, टला बड़ा जानलेवा हादसा
इस भयानक अग्निकांड के बीच सबसे बड़ी राहत की बात यह रही कि कोई जनहानि नहीं हुई। फैक्ट्री के भीतर काम कर रहे मजदूर और कर्मचारी जब तक कुछ समझ पाते, आग तेजी से फैल चुकी थी। हालांकि, गनीमत यह रही कि समय रहते सभी को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, वरना शिवनगर की तरह एक और बड़ी त्रासदी यहां घट सकती थी। आग बुझाने के लिए दमकल विभाग की कई गाड़ियों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी, लेकिन तब तक फैक्ट्री के भीतर रखा करोड़ों का कच्चा माल और मशीनरी जलकर राख में तब्दील हो चुके थे।
शिवनगर हादसे की कसक अभी बाकी, प्रशासनिक लापरवाही पर उठ रहे सवाल
पानीपत की औद्योगिक इकाइयों में आग लगने का यह कोई पहला मामला नहीं है। अभी कुछ दिन पहले ही शिवनगर स्थित एक धागा फैक्ट्री में भीषण आग लगने की वजह से एक गरीब मजदूर की दर्दनाक मौत हो गई थी, जबकि दूसरा गंभीर रूप से झुलस गया था। उस हादसे के जख्म अभी पूरी तरह भरे भी नहीं थे कि बलाना गांव की इस घटना ने प्रशासन और फैक्ट्री मालिकों की नींद उड़ा दी है। लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाएं इस बात का साफ प्रमाण हैं कि कागजों में चल रहे फायर सेफ्टी के इंतजाम जमीन पर पूरी तरह नदारद हैं।
प्रशासनिक स्तर पर यदि अब भी कड़े कदम नहीं उठाए गए और फैक्ट्रियों में अग्नि सुरक्षा मानकों की नियमित जांच नहीं की गई, तो पानीपत के उद्योग किसी बड़े खतरे की जद में आते रहेंगे। फिलहाल, आग लगने के असली कारणों की पड़ताल की जा रही है, लेकिन इस हादसे ने एक बार फिर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

