ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर कांग्रेस का देशभर में प्रदर्शन; देहरादून में बैरिकेड्स पर चढ़े कार्यकर्ता, पटना में चले वाटर कैनन
CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कांग्रेस का प्रदर्शन
Congress protests across the country: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने सचिवालय कूच किया। पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए बैरिकेडिंग की, जिसके बाद प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति बनी और कुछ कार्यकर्ता बैरिकेड्स पर चढ़ गए। कांग्रेस ने प्रदर्शन के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग दोहराई। पटना में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मार्च निकालकर ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। प्रदर्शनकारियों को चुनाव कार्यालय की ओर बढ़ने से रोकने के लिए पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। प्रदर्शन में मतदाता अधिकार और SIR से जुड़े मुद्दे प्रमुख रहे।
दिल्ली में जंतर-मंतर पर भी प्रदर्शन की कोशिश हुई। रिपोर्टों के मुताबिक पुलिस ने बैरिकेडिंग और भारी सुरक्षा व्यवस्था की तथा कुछ प्रदर्शनकारियों को बसों में ले जाया गया। दीपांकर भट्टाचार्य और प्रशांत भूषण को हिरासत में लिए जाने की भी खबर सामने आई है। जम्मू-कश्मीर विधानसभा में भी कांग्रेस विधायकों ने शुक्रवार को ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर पोस्टर दिखाए। पोस्टर पर ‘Gyanesh Kumar resign, protect the vote, protect democracy’ लिखा था। विधानसभा अध्यक्ष अब्दुल रहीम राथर ने विधायकों से पोस्टर हटाने को कहा और याद दिलाया कि चुनाव आयोग विधानसभा के नियंत्रण में नहीं है।
14 आपत्तियों की रिपोर्ट के बाद बढ़ा विवाद
द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने अक्टूबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच कम से कम 14 बार मतदाता सूची, नए मतदाताओं के नाम जोड़ने, नाम हटाने और बहाल करने, फॉर्म-6 में बदलाव तथा SIR से जुड़े फैसलों पर आपत्ति दर्ज की। रिपोर्ट के अनुसार चार आपत्तियां एक ही दिन दर्ज की गई थीं। इस रिपोर्ट के बाद विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए और ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग तेज कर दी। दूसरी तरफ चुनाव आयोग ने कहा कि अलग-अलग राय और टिप्पणियां किसी भी संस्थागत deliberation का हिस्सा हैं तथा SIR समेत आयोग के अंतिम फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की सहमति से लिए गए हैं। यही विवाद अब आम मतदाताओं के लिए भी अहम हो गया है, क्योंकि SIR का सीधा संबंध मतदाता सूची से है। किसी नाम के जुड़ने, हटने या बहाल होने की प्रक्रिया चुनाव में मतदान के अधिकार को प्रभावित कर सकती है, इसलिए आयोग के भीतर लिए जा रहे फैसलों और उनके रिकॉर्ड को लेकर राजनीतिक बहस तेज है।
SIR पर सुप्रीम कोर्ट में PIL, 13 करोड़ नामों की SIT जांच की मांग
SIR को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि दो अन्य चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों के बावजूद SIR से जुड़े फैसले लिए गए और ऐसे फैसलों को रद्द करने की मांग की गई है। याचिका में करीब 13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए जाने के मामले की SIT जांच कराने की मांग भी की गई है। यह संख्या और नाम हटाने से जुड़ा आरोप याचिकाकर्ता की दलील का हिस्सा है, इसे अदालत द्वारा स्थापित तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। महाराष्ट्र की मतदाता सूची के SIR को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट में भी दो याचिकाएं दायर की गई हैं। इनमें SIR की संवैधानिक वैधता, प्रक्रिया और इसे लागू करने के तरीके पर सवाल उठाए गए हैं तथा याचिकाकर्ताओं ने कथित तौर पर दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों के बावजूद जारी किए गए आदेशों को रद्द करने और दर्ज आपत्तियों को सार्वजनिक करने की मांग की है।
चुनाव आयोग ने उत्तर प्रदेश में ज्ञानेश कुमार के दो मतदाता जागरूकता कार्यक्रम स्थगित कर दिए हैं। मेरठ में 25 सितंबर और वाराणसी में 28 सितंबर को होने वाले कार्यक्रमों में उन्हें शामिल होना था। मेरठ का कार्यक्रम Electoral Literacy Clubs से जुड़ा था, जबकि वाराणसी में युवा मतदाताओं और Gen-Z के साथ संवाद का कार्यक्रम प्रस्तावित था। चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि दोनों कार्यक्रम 21 सितंबर को ही स्थगित कर दिए गए थे और इसका मौजूदा विवाद से कोई संबंध नहीं है। कार्यक्रम स्थगित होने की खबर ऐसे समय आई है जब चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेदों को लेकर राजनीतिक बहस चल रही है। आयोग ने अपने स्तर पर यह स्पष्ट किया है कि SIR सहित उसके अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं।
राहुल गांधी और प्रियंका ने लगाए गंभीर आरोप
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने ज्ञानेश कुमार पर मतदाता अधिकारों से जुड़े गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने ‘वोट चोरी’ की है और उन्हें ‘देशद्रोही’ बताया। राहुल गांधी ने यह भी कहा कि उन्होंने ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति का विरोध किया था, लेकिन सरकार ने उनकी बात नहीं मानी। प्रियंका गांधी ने दावा किया कि 13 करोड़ मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं और राहुल गांधी कई प्रेस कॉन्फ्रेंस में इससे जुड़े सबूत पेश कर चुके हैं। ये दोनों बयान कांग्रेस नेताओं के राजनीतिक आरोप हैं; चुनाव आयोग ने SIR और अपने फैसलों को लेकर अलग रुख रखा है।
कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्ष ने इससे पहले भी ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए संसदीय प्रक्रिया शुरू की थी। मार्च 2026 में लोकसभा के 130 और राज्यसभा के 63 सदस्यों ने उनके खिलाफ हटाने का प्रस्ताव देने संबंधी नोटिस दिया था, जिसे लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और राज्यसभा सभापति सीपी राधाकृष्णन ने 6 अप्रैल को स्वीकार नहीं किया। इसके बाद अप्रैल में राज्यसभा में ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए एक नया नोटिस भी दाखिल किया गया था। विपक्ष अब एक बार फिर संसदीय कार्रवाई की तैयारी की बात कह रहा है।
महुआ मोइत्रा की पुलिस शिकायत, चिराग ने आयोग से जवाब मांगा
TMC सांसद महुआ मोइत्रा ने 24 सितंबर को दिल्ली के पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने में ज्ञानेश कुमार के खिलाफ शिकायत दी और FIR दर्ज करने की मांग की। उन्होंने SIR के दौरान मतदाता सूची से जुड़े कथित बदलावों और दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों का हवाला दिया; पुलिस ने शिकायत मिलने की पुष्टि की थी, लेकिन उपलब्ध रिपोर्ट के समय तक FIR दर्ज नहीं हुई थी। इस पूरे विवाद में NDA के सहयोगी और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने भी चुनाव आयोग से अपना पक्ष स्पष्ट करने को कहा है। उन्होंने कहा कि अगर चुनाव प्रक्रिया को लेकर लोगों के मन में सवाल उठ रहे हैं तो CEC की जिम्मेदारी है कि वे अपनी स्थिति स्पष्ट करें और जनता का भरोसा बनाए रखें। उधर, कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे के लिए 48 घंटे की समयसीमा दी है। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने शुक्रवार को कहा कि अगर शनिवार तक इस्तीफा नहीं दिया गया तो 2 अक्टूबर को मुंबई से देशव्यापी आंदोलन शुरू किया जाएगा और इसे देश के दूसरे शहरों तक ले जाया जाएगा।
